राजस्थान विधानसभा: विपक्ष की अनुपस्थिति पर अध्यक्ष की पीड़ा, सत्ता पक्ष ने कहा दिल्ली के इशारे पर लोकतंत्र की हत्या

राजस्थान विधानसभा सत्र के पहले दिन विपक्ष की अनुपस्थिति पर विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने दुख व्यक्त किया। सत्ता पक्ष ने इसे दिल्ली के इशारे पर लोकतंत्र की हत्या करार दिया। सदन में दो महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए गए और दिवंगत नेताओं को श्रद्धांजलि दी गई।

राजस्थान विधानसभा सत्र के पहले दिन सदन का नजारा काफी अलग रहा क्योंकि विपक्ष ने कार्यवाही में हिस्सा नहीं लिया। विपक्षी विधायकों की इस अनुपस्थिति को लेकर सत्ता पक्ष ने कड़ी नाराजगी जताई है। विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने सदन में विपक्ष की खाली सीटों को देखकर अपनी गहरी पीड़ा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है और उन्हें अपने मुद्दे सदन के भीतर रखने का पूरा अधिकार है। अध्यक्ष ने जोर देकर कहा कि विपक्ष को विधानसभा की कार्यवाही में अनिवार्य रूप से शामिल होना चाहिए ताकि जनता के मुद्दों पर सार्थक चर्चा हो सके। वहीं, सत्ता पक्ष ने विपक्ष पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया कि दिल्ली के इशारे पर लोकतंत्र की हत्या की गई है।

खाली सीटें देख छलका विधानसभा अध्यक्ष का दर्द

विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने सदन को संबोधित करते हुए कहा कि विपक्ष के पास जनता से जुड़े विषयों को उठाने का न केवल अवसर है, बल्कि यह उनका संवैधानिक अधिकार भी है और उन्होंने कहा कि सदन में विपक्ष की खाली सीटों को देखकर उन्हें व्यक्तिगत रूप से पीड़ा हो रही है। देवनानी ने स्पष्ट किया कि विपक्ष को अपनी बात सदन के भीतर रखनी चाहिए, न कि कार्यवाही का बहिष्कार करना चाहिए। उन्होंने सभी सदस्यों से अपील की कि वे विधानसभा की कार्यवाही में सक्रिय रूप से भाग लें और जो भी ज्वलंत विषय हैं, उन्हें सदन के पटल पर रखें। उन्होंने कहा कि जनता के मुद्दों के समाधान के लिए सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों का सहयोग अनिवार्य है।

वंदे मातरम् के गायन और बहिष्कार पर सत्ता पक्ष का तंज

विपक्ष के सदन में न आने पर भाजपा के मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग ने भी कड़ा रुख अपनाया। गर्ग ने कहा कि बिना किसी ठोस कारण के विपक्ष का सदन से नदारद रहना समझ से परे है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि संभवतः विपक्ष इसीलिए सदन में नहीं आया क्योंकि उन्हें कार्यवाही की शुरुआत में वंदे मातरम् के गायन में शामिल होना पड़ता। गर्ग ने तर्क दिया कि यदि विपक्ष के पास सरकार के खिलाफ कोई मुद्दा था, तो उन्हें सदन में आकर सरकार से जवाब मांगना चाहिए था। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में बहिष्कार के बजाय चर्चा का रास्ता चुनना अधिक उचित होता है, लेकिन विपक्ष ने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया है।

संसदीय कार्यमंत्री ने लगाया सर्वदलीय बैठक की अवहेलना का आरोप

संसदीय कार्यमंत्री जोगाराम पटेल ने विपक्ष की अनुपस्थिति को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि विधानसभा सत्र शुरू होने से पहले एक सर्वदलीय बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें सभी दलों के नेताओं ने हिस्सा लिया था। पटेल के अनुसार, उस बैठक में इस बात पर सर्वसम्मति बनी थी कि राजस्थान विधानसभा की गौरवपूर्ण परंपराओं का सम्मान किया जाएगा और सभी दल कार्यवाही में भाग लेंगे। उन्होंने कहा कि पहले हुई सहमति के बावजूद विपक्ष का सदन से दूर रहना उचित नहीं है। पटेल ने कहा कि विधानसभा जनता के मुद्दों पर चर्चा का सबसे बड़ा मंच है और विपक्ष को सरकार के कामकाज पर आपत्ति जताने के लिए इसी मंच का उपयोग करना चाहिए था।

विधायी कार्य: सदन में रखे गए दो महत्वपूर्ण विधेयक

विपक्ष की अनुपस्थिति के बीच सदन की विधायी कार्यवाही जारी रही। सत्र के पहले दिन उपमुख्यमंत्री डॉ. पीसी बैरवा ने गीतांजलि ग्लोबल विश्वविद्यालय जयपुर विधेयक, 2026 सदन के पटल पर रखा। इसके साथ ही संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने राजस्थान वृक्ष संरक्षण विधेयक, 2026 पेश किया। सदन की कार्यवाही शुरू होने पर सबसे पहले शोकाभिव्यक्ति की गई। वाई. पाटील, उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूरी और आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एन और भास्कर राव को श्रद्धांजलि दी गई। इनके अलावा पूर्व सांसद विष्णु मोदी, पूर्व सदस्य ब्रह्मदेव कुमावत, बाबूलाल बैरवा और नवनीत लाल निनामा के निधन पर भी शोक व्यक्त किया गया।

कार्य सलाहकार समिति की बैठक और आगामी रणनीति

सत्र के पहले दिन की कार्यवाही पूरी होने के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने सदन को शुक्रवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया। इससे पहले विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी की अध्यक्षता में कार्य सलाहकार समिति (BAC) की बैठक हुई। इस बैठक में कल तक के कामकाज की रूपरेखा तय की गई है। सूत्रों के अनुसार, कल की कार्यवाही के बाद सदन को अनिश्चित काल के लिए स्थगित किया जा सकता है और पहले दिन के घटनाक्रम ने यह संकेत दे दिए हैं कि आने वाले समय में यूसीसी (UCC) जैसे महत्वपूर्ण विधेयकों और अन्य जनहित के मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव और बढ़ सकता है।