राजस्थान विधानसभा: हंगामे के बीच UCC विधेयक 2026 पेश, सदन अनिश्चितकाल के लिए स्थगित

राजस्थान विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन भारी हंगामे के बीच समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक 2026 पेश किया गया। विपक्ष के वॉकआउट और विरोध के बाद सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। विधेयक में विवाह पंजीकरण और समान उत्तराधिकार जैसे प्रावधान हैं।

जयपुर में राजस्थान विधानसभा के मानसून सत्र का दूसरा दिन भी भारी हंगामे और राजनीतिक गहमागहमी की भेंट चढ़ गया। शुक्रवार को सदन की कार्यवाही के दौरान विपक्ष के कड़े विरोध और वॉकआउट के बीच राज्य सरकार ने ऐतिहासिक राजस्थान समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक 2026 को सदन के पटल पर रखा। संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने इस महत्वपूर्ण विधेयक को सदन में पेश किया। हालांकि, इस विधेयक को पेश किए जाने के तुरंत बाद सदन की कार्यवाही को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया।

विधेयक पेश करने की प्रक्रिया और तकनीकी बदलाव

विधानसभा की कार्यवाही के दौरान UCC विधेयक को सदन में रखने की पूरी तैयारी थी और नियमानुसार इसे गृह राज्यमंत्री जवाहर सिंह बेढम के जरिए सदन में रखा जाना था, लेकिन ऐन वक्त पर विधेयक से संबंधित आवश्यक कागजात उनके पास उपलब्ध नहीं होने के कारण संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने इसे सदन के पटल पर रखा। विधेयक को फिलहाल सदन में पुरस्थापित किया गया है, जिसका अर्थ है कि इस पर तत्काल चर्चा नहीं होगी। विधानसभा के नियमों के अनुसार, किसी भी विधेयक पर चर्चा शुरू करने से पहले सदस्यों को कम से कम 48 घंटे का समय दिया जाता है। ऐसे में अब इस विधेयक पर विस्तृत चर्चा और आगे की विधायी प्रक्रिया विधानसभा के मौजूदा सत्र के दूसरे चरण में होने की संभावना है।

क्या है राजस्थान UCC विधेयक 2026 के मुख्य प्रावधान?

समान नागरिक संहिता का मूल उद्देश्य राज्य के सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे निजी मामलों में एक समान कानूनी व्यवस्था लागू करना है। सरकार इसे सामाजिक न्याय और समानता की दिशा में एक बड़ा कदम बता रही है। विधेयक में यह भी स्पष्ट किया गया है कि अनुसूचित जनजातियों और संविधान के तहत संरक्षित पारंपरिक अधिकारों वाले वर्गों को इस कानून के दायरे से बाहर रखा जा सकता है।

प्रवेश द्वार विवाद पर अध्यक्ष का स्पष्टीकरण

सदन की कार्यवाही के दौरान विधानसभा गेट से प्रवेश को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखा विवाद देखा गया। इस पर विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि सदन में प्रवेश की व्यवस्था पहले से ही निर्धारित है। उन्होंने बताया कि वाहनों से आने वाले सदस्यों के लिए अलग मार्ग है, जबकि पैदल आने वाले विधायक गेट नंबर 6 का उपयोग कर सकते हैं। अध्यक्ष ने कहा कि यह गेट कल भी खुला था और आज भी खुला है, लेकिन सामूहिक रूप से गेट से प्रवेश की अनुमति न पहले थी और न अब है। उन्होंने गेट पर चढ़कर अंदर आने के प्रयास को सुरक्षा और संसदीय मर्यादा की दृष्टि से अवांछनीय बताया और सुरक्षाकर्मियों के धैर्य की सराहना की।

विपक्ष का वॉकआउट और अन्य विधायी कार्य

विपक्ष की ओर से नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सरकार पर तीखा हमला बोला और उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार केवल अपना एजेंडा थोपना चाहती है और बेरोजगारी, शिक्षा, युवाओं तथा किसानों से जुड़े वास्तविक मुद्दों पर चर्चा से भाग रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विपक्ष को सदन के बाहर रोका जा रहा है और अंदर बोलने नहीं दिया जा रहा और इसके विरोध में कांग्रेस विधायकों ने सदन से वॉकआउट किया। इसी हंगामे के बीच उप मुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री दीया कुमारी ने राजस्थान माल एवं सेवा कर (संशोधन) विधेयक 2026 भी सदन के पटल पर रखा। अध्यक्ष देवनानी ने सदन की गरिमा बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि राजस्थान की 8 करोड़ जनता की उम्मीदें इस सदन से जुड़ी हैं, इसके बाद उन्होंने कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी।