Bollywood Actress / आर्मी में कर्नल थे एक्ट्रेस के पिता, देश के लिए दी थी शहादत, अब बेटी करती है फिल्मी दुनिया पर राज

एक्ट्रेस रुक्मिणी वसंत के पिता कर्नल वसंत वेणुगोपाल ने 2007 में उरी में देश के लिए शहादत दी थी। उन्हें अशोक चक्र से सम्मानित किया गया था। अब रुक्मिणी ने 'कांतारा: चैप्टर 1' जैसी 850 करोड़ की ब्लॉकबस्टर फिल्म में काम कर फिल्मी दुनिया में अपनी पहचान बनाई है।

फिल्मी दुनिया में ऐसी कई अभिनेत्रियां हैं जिनके पिता ने भारतीय सेना में रहकर देश के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। इन्हीं में से एक हैं एक्ट्रेस रुक्मिणी वसंत, जिनके पिता भारतीय सेना में कर्नल थे और उन्होंने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। आज उनकी बेटी फिल्मी दुनिया में अपना नाम कमा रही है और 'कांतारा: चैप्टर 1' जैसी 800 करोड़ से अधिक की कमाई करने वाली सुपरहिट फिल्म का हिस्सा रह चुकी हैं। रुक्मिणी वसंत की यह यात्रा साहस, दृढ़ता और अपने काम के प्रति अटूट समर्पण से भरी हुई है।

रुक्मिणी वसंत की जड़ें असाधारण वीरता में निहित हैं। उनके पिता, कर्नल वसंत वेणुगोपाल, ने 2007 में जम्मू-कश्मीर के उरी में भारत-पाकिस्तान सीमा पार। करने की कोशिश कर रहे आतंकवादियों को रोकते हुए अपने प्राणों की आहुति दे दी थी। उनकी यह शहादत देश के प्रति उनके अदम्य साहस और कर्तव्यनिष्ठा का प्रतीक है। कर्नल वसंत वेणुगोपाल कर्नाटक के पहले ऐसे व्यक्ति हैं जिन्हें भारत। के सर्वोच्च शांति सैन्य सम्मान, अशोक चक्र से सम्मानित किया गया है। उनकी ईमानदारी और वीरता की यह विरासत अभिनेत्री रुक्मिणी के जीवन पथ को। निरंतर मार्गदर्शन प्रदान करती है, उन्हें अपने हर कदम पर प्रेरणा देती है।

मां का प्रेरणादायक योगदान

रुक्मिणी के जीवन पर उनकी माता, सुभाषिनी वसंत, का भी गहरा प्रभाव है। सुभाषिनी वसंत एक प्रसिद्ध भरतनाट्यम नृत्यांगना हैं, जिन्होंने अपने दुख को एक उद्देश्य में परिवर्तित किया। उन्होंने 'वीर रत्न' नामक एक संस्था की स्थापना की, जो युद्ध विधवाओं और उनके परिवारों का समर्थन करती है। उनकी गरिमा, करुणा और रचनात्मक भावना ने रुक्मिणी के विश्वदृष्टिकोण को गहराई से प्रभावित किया है। मां और पिता दोनों के असाधारण जीवन ने रुक्मिणी को जीवन में चुनौतियों। का सामना करने और अपने सपनों को पूरा करने के लिए प्रेरित किया है।

कलात्मक प्रशिक्षण और प्रारंभिक करियर

अपनी कला को निखारने के दृढ़ संकल्प के साथ, रुक्मिणी ने लंदन स्थित प्रतिष्ठित रॉयल एकेडमी ऑफ ड्रामेटिक आर्ट (राडा) में प्रशिक्षण लिया। इस प्रतिष्ठित संस्थान में उन्होंने एक मजबूत कलात्मक आधार और भावनात्मक क्षमता विकसित की, जो उन्हें एक कुशल अभिनेत्री के रूप में तैयार करने में सहायक सिद्ध हुई। 2019 में, उन्होंने कन्नड़ फिल्म 'बिरबल ट्रिलॉजी' से अपने अभिनय करियर की। शुरुआत की, जिससे उन्हें फिल्मी दुनिया में पहला कदम रखने का अवसर मिला।

'सप्त सागरदाचे एलो' में मिली पहचान

2023 में, रुक्मिणी वसंत ने दो भागों में निर्मित रोमांटिक ड्रामा 'सप्त सागरदाचे एलो' में अपने शानदार प्रदर्शन से दर्शकों और समीक्षकों का ध्यान आकर्षित किया। इस फिल्म में उनके अभिनय को खूब सराहा गया, जिसके लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री (कन्नड़) का फिल्मफेयर क्रिटिक्स अवार्ड मिला। इस पुरस्कार ने एक प्रतिभाशाली अभिनेत्री के रूप में उनकी पहचान को और। मजबूत किया और उन्हें कन्नड़ फिल्म उद्योग में एक प्रमुख चेहरा बना दिया।

'कांतारा: चैप्टर 1' की अपार सफलता

रुक्मिणी वसंत की प्रसिद्धि में सबसे बड़ा योगदान 2025 में आई पौराणिक एक्शन ड्रामा फिल्म 'कांतारा: चैप्टर 1' का रहा। इस फिल्म में रुक्मिणी ने राजकुमारी कनकवती का प्रभावशाली किरदार निभाया और इस भूमिका के लिए उन्होंने तलवारबाजी, शास्त्रीय नृत्य और घुड़सवारी के दृश्यों के लिए गहन प्रशिक्षण लिया, जो उनके समर्पण को दर्शाता है। ऋषभ शेट्टी द्वारा निर्देशित और अभिनीत यह अखिल भारतीय फिल्म जबरदस्त हिट साबित हुई। दुनिया भर में 850 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई के साथ, 'कांतारा' का यह प्रीक्वल इस साल की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली भारतीय फिल्मों में से एक है। रुक्मिणी वसंत की यह सफलता उनके पिता की वीरता और मां के सामाजिक कार्यों की। विरासत को आगे बढ़ाती है, और उन्हें फिल्मी दुनिया में एक चमकता सितारा बनाती है।

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