सांगली हादसा: मरगुबाई देवी कार्यक्रम में दीवार गिरने से 6 श्रद्धालुओं की मौत, 15 घायल

महाराष्ट्र के सांगली जिले के जत तालुका स्थित मोटेवाडी गांव में मंगलवार शाम को एक धार्मिक कार्यक्रम के दौरान दीवार गिरने से 6 श्रद्धालुओं की मौत हो गई और 15 अन्य घायल हो गए।

महाराष्ट्र के सांगली जिले से एक अत्यंत हृदयविदारक समाचार सामने आया है, जहां जत तालुका के अंतर्गत आने वाले मोटेवाडी गांव में मंगलवार की शाम एक भीषण दुर्घटना घटित हुई। यहाँ आयोजित मरगुबाई देवी के एक धार्मिक कार्यक्रम के दौरान अचानक आए तेज आंधी-तूफान और बारिश ने उत्सव के माहौल को मातम में बदल दिया। इस प्राकृतिक आपदा के बीच एक निर्माणाधीन स्थल की दीवार गिरने से छह श्रद्धालुओं की दर्दनाक मृत्यु हो गई, जबकि पंद्रह अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं और इस घटना ने पूरे क्षेत्र में शोक की लहर पैदा कर दी है और प्रशासन राहत कार्यों में जुटा हुआ है।

आंधी-तूफान और शेड के नीचे मची अफरा-तफरी

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मोटेवाडी गांव में मरगुबाई देवी के सम्मान में एक विशेष धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन किया गया था, जिसमें भारी संख्या में श्रद्धालु अपनी श्रद्धा प्रकट करने पहुंचे थे। कार्यक्रम सुचारू रूप से चल रहा था कि तभी अचानक मौसम ने करवट ली और तेज आंधी के साथ मूसलाधार बारिश शुरू हो गई। मौसम के इस उग्र रूप से बचने के लिए वहां मौजूद श्रद्धालु सुरक्षित स्थान की तलाश करने लगे। इसी क्रम में, बड़ी संख्या में लोग पास में ही स्थित एक निर्माणाधीन स्थल पर बने टीन शेड के नीचे जाकर खड़े हो गए ताकि वे बारिश और हवा से बच सकें।

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि आंधी इतनी शक्तिशाली थी कि उसने वहां लगे टीन के शेड को उखाड़ दिया। तेज हवा के झोंकों के कारण वह टीन का शेड हवा में उड़कर पास ही स्थित एक कच्ची चिरा-ईंट की दीवार से जा टकराया। शेड के टकराने के प्रभाव से वह दीवार अचानक भरभराकर नीचे खड़े श्रद्धालुओं के ऊपर गिर पड़ी। दीवार के मलबे के नीचे दबने से वहां मौजूद लोगों में चीख-पुकार मच गई और कई लोग मलबे में फंस गए।

मृतकों में दो मासूम बच्चे भी शामिल

इस भीषण हादसे के परिणामस्वरूप कुल छह लोगों ने अपनी जान गंवा दी है। अत्यंत दुखद बात यह है कि मृतकों में 12 वर्ष और 13 वर्ष की आयु के दो मासूम बच्चे भी शामिल हैं, जिनका जीवन इस आकस्मिक आपदा ने छीन लिया। मृतकों की पहचान और उनके निवास स्थान के बारे में मिली जानकारी के अनुसार, इनमें से चार मृतक महाराष्ट्र के सांगली जिले के जत तालुका के ही निवासी थे। वहीं, दो अन्य मृतक पड़ोसी राज्य कर्नाटक के रहने वाले बताए जा रहे हैं, जो इस धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए सीमा पार से आए थे।

घायलों का विभिन्न अस्पतालों में उपचार जारी

दीवार गिरने की घटना के तुरंत बाद मौके पर अफरा-तफरी का माहौल व्याप्त हो गया और स्थानीय ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए मलबे में दबे लोगों को बाहर निकालने का प्रयास शुरू किया। इस हादसे में कुल 15 लोग घायल हुए हैं, जिनमें से कई की हालत अत्यंत गंभीर बनी हुई है। घायलों को तत्काल चिकित्सा सहायता प्रदान करने के लिए एम्बुलेंस और निजी वाहनों के माध्यम से नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों पर ले जाया गया।

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, कुछ घायलों का प्राथमिक उपचार जत के स्थानीय अस्पताल में किया जा रहा है। हालांकि, जिन लोगों की चोटें अधिक गंभीर थीं और जिन्हें विशेष चिकित्सा देखभाल की आवश्यकता थी, उन्हें बेहतर इलाज के लिए पड़ोसी राज्य कर्नाटक के विजयपुर और महाराष्ट्र के मिरज स्थित बड़े अस्पतालों में रेफर किया गया है। डॉक्टरों की टीमें घायलों की जान बचाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही हैं।

प्रशासनिक कार्रवाई और राजनीतिक प्रतिक्रिया

हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और पुलिस की टीमें बिना किसी देरी के मोटेवाडी गांव पहुंच गईं। पुलिस बल ने घटनास्थल को अपने नियंत्रण में लिया और राहत व बचाव कार्यों को गति दी। अधिकारियों ने स्थिति का जायजा लिया और सुनिश्चित किया कि प्रत्येक घायल व्यक्ति को उचित और त्वरित चिकित्सा सुविधा प्राप्त हो और प्रशासन की ओर से इस पूरी घटना की जांच के निर्देश भी दिए जा सकते हैं ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

इस दुखद घटना पर विधान परिषद सदस्य गोपीचंद पडलकर ने गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने इस हादसे को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए मृतकों के शोक संतप्त परिजनों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं प्रकट की हैं। पडलकर ने स्थानीय प्रशासन से संपर्क साधकर घायलों के लिए सर्वोत्तम संभव उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस कठिन समय में वे और प्रशासन प्रभावित परिवारों के साथ खड़े हैं। फिलहाल, पूरे गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है और लोग इस आकस्मिक क्षति से उबरने का प्रयास कर रहे हैं।