Taliban Reshuffle / तालिबान में बड़ा फेरबदल: अखुंदजादा के आदेश पर 25 अधिकारियों का तबादला, वफादारी को प्राथमिकता

तालिबान प्रमुख मुल्ला हैबतुल्लाह अखुंदजादा ने 25 अधिकारियों के तबादले और नई नियुक्तियां की हैं। इनमें राज्यपाल, सैन्य कमांडर और रक्षा मंत्रालय के अधिकारी शामिल हैं। ये फैसले सीधे तालिबान नेता ने लिए, जिसमें पेशेवर योग्यता से ज्यादा वफादारी और युद्ध अनुभव को प्राथमिकता दी गई है।

अफगानिस्तान में तालिबान शासन ने एक बार फिर बड़े पैमाने पर प्रशासनिक और सैन्य फेरबदल किए हैं। तालिबान के सर्वोच्च नेता मुल्ला हैबतुल्लाह अखुंदजादा के सीधे आदेश पर कुल 25 अधिकारियों को उनके पदों से बदला गया है या नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं और यह कदम तालिबान के आंतरिक ढांचे में एक महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाता है, जहां निर्णय लेने की शक्ति सीधे शीर्ष नेता के हाथों में केंद्रित होती दिख रही है।

बड़े पैमाने पर हुए बदलाव

इन व्यापक फेरबदल में विभिन्न प्रांतों के राज्यपाल, प्रमुख सैन्य कमांडर, कोर कमांडर और स्थानीय प्रशासन से जुड़े कई अधिकारी शामिल हैं। विशेष रूप से, आंतरिक मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय में ये बदलाव सबसे अधिक देखे गए हैं, जो तालिबान की सुरक्षा और शासन व्यवस्था को पुनर्गठित करने की मंशा को उजागर करते हैं। इन नियुक्तियों और तबादलों का उद्देश्य तालिबान के नियंत्रण को मजबूत करना। और अपने प्रमुख नेता के प्रति वफादारी सुनिश्चित करना प्रतीत होता है।

प्रमुख नियुक्तियां और तबादले

तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने गुरुवार को इन बदलावों की पुष्टि की और उनके अनुसार, हैबतुल्लाह अखुंदजादा के आदेश पर कई प्रांतों में नए अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। कारी गुल हैदर शफाक को बामियान प्रांत का नया गवर्नर बनाया गया है, जो एक रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र है और वहीं, बामियान के पूर्व गवर्नर अब्दुल्ला सरहदी को अब जौजजान प्रांत का गवर्नर नियुक्त किया गया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि अधिकारियों को विभिन्न क्षेत्रों में स्थानांतरित किया जा रहा है ताकि उनकी पहुंच और प्रभाव को संतुलित किया जा सके। इसके अलावा, सर-ए-पुल प्रांत के गवर्नर को भी उनके पद से हटा दिया गया है, जो इस बात का संकेत है कि तालिबान नेतृत्व अपनी प्रशासनिक टीम में लगातार बदलाव कर रहा है।

सैन्य और नागरिक पदों पर नई जिम्मेदारियां

सर-ए-पुल के नए गवर्नर के रूप में अहमद शाह दिंडोस्त को जिम्मेदारी दी गई है, जो पहले 205वीं अल-बद्र कोर के कमांडर रह चुके हैं। यह नियुक्ति दर्शाती है कि सैन्य पृष्ठभूमि वाले व्यक्तियों को नागरिक प्रशासन में भी महत्वपूर्ण भूमिकाएं दी जा रही हैं। इसी तरह, 201वीं खालिद बिन वालिद कोर के पूर्व चीफ ऑफ स्टाफ अंजार गुल अब्दुल्ला को लगमान प्रांत का उप-गवर्नर बनाया गया है। कंधार में भी तीन महत्वपूर्ण नियुक्तियां की गई हैं, जिनमें एक जिला गवर्नर, एक आयुक्त और एक सैन्य कमांडर शामिल हैं, जो इस क्षेत्र में तालिबान की पकड़ को मजबूत करने के प्रयासों का हिस्सा है। रक्षा मंत्रालय में कुल 15 बड़े फेरबदल किए गए हैं, जो सैन्य नेतृत्व और संरचना में महत्वपूर्ण बदलावों की ओर इशारा करते हैं।

वफादारी और युद्ध अनुभव को प्राथमिकता

इन फैसलों के तहत, सर-ए-पुल के पूर्व गवर्नर को अब 205वीं अल-बद्र कोर का नया कमांडर बनाया गया है, जबकि पंजशीर प्रांत की विशेष ब्रिगेड के पूर्व उप-कमांडर को इसी कोर का डिप्टी कमांडर नियुक्त किया गया है। सैन्य कोर की संरचना में कई और बदलाव भी किए गए हैं, जो तालिबान की सैन्य क्षमताओं और परिचालन दक्षता को बढ़ाने के उद्देश्य से किए गए प्रतीत होते हैं। इन नियुक्तियों में एक खास बात यह है कि दो नागरिक अधिकारियों को सैन्य पदों पर तैनात किया गया है। हेलमंद में ग्रामीण विकास के पूर्व उप मंत्री को 217वीं ओमारी कोर का चीफ ऑफ स्टाफ बनाया गया है, और आवास और शहरी विकास के पूर्व प्रमुख को 205वीं अल-बद्र कोर की दूसरी इन्फैंट्री ब्रिगेड का कमांडर नियुक्त किया गया है। यह कदम तालिबान की अनूठी प्रशासनिक शैली को दर्शाता है, जहां। पारंपरिक विशेषज्ञता की बजाय अन्य कारकों को प्राथमिकता दी जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन बदलावों से यह स्पष्ट होता है कि तालिबान ने सैन्य विशेषज्ञता और पेशेवर अनुभव को उतना महत्व नहीं दिया है जितना कि आमतौर पर एक आधुनिक प्रशासन में दिया जाता है और इसके बजाय, नियुक्तियां अधिकतर धार्मिक जुड़ाव, मुल्ला हैबतुल्लाह के प्रति अटूट वफादारी और युद्ध के मैदान में उनके अनुभव के आधार पर की गई हैं। यह दृष्टिकोण तालिबान के वैचारिक आधार और उसके शासन के तरीके को रेखांकित करता है, जहां व्यक्तिगत निष्ठा और धार्मिक प्रतिबद्धता को तकनीकी कौशल से ऊपर रखा जाता है।

अखुंदजादा की सीधी कमान

इन फेरबदल से यह भी स्पष्ट होता है कि तालिबान शासन में असली ताकत सीधे समूह के सर्वोच्च नेता मुल्ला हैबतुल्लाह अखुंदजादा के हाथ में केंद्रित है। काबुल में बैठे मंत्रियों की भूमिका सीमित होती जा रही है, और महत्वपूर्ण निर्णय सीधे कंधार में बैठे अखुंदजादा द्वारा लिए जा रहे हैं। इससे पहले खबर थी कि सिराजुद्दीन हक्कानी ने सुरक्षा नियुक्तियों के लिए एक अलग आयोग बनाने का सुझाव दिया था, लेकिन मौजूदा। फैसले बताते हैं कि अंतिम निर्णय अब भी हैबतुल्लाह अखुंदजादा ही लेते हैं, जिससे उनकी सर्वोच्च सत्ता और नियंत्रण की पुष्टि होती है। यह केंद्रीकृत निर्णय-प्रक्रिया तालिबान के शासन मॉडल का एक महत्वपूर्ण पहलू है,। जो भविष्य में अफगानिस्तान की प्रशासनिक और सुरक्षा नीतियों को आकार देगा।