TCS नासिक: यौन उत्पीड़न और धर्मांतरण आरोपों के बीच 150 कर्मचारियों को 'वर्क फ्रॉम होम'

टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने नासिक यूनिट के 150 कर्मचारियों को यौन उत्पीड़न और जबरन धर्मांतरण के गंभीर आरोपों के बाद 'वर्क फ्रॉम होम' का निर्देश दिया है। पुलिस ने मामले की जांच के लिए NIA और ATS को पत्र लिखा है, जबकि अब तक 7 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं।

टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने यौन उत्पीड़न और जबरन धर्म परिवर्तन के गंभीर आरोपों के बीच अपने नासिक यूनिट के सभी 150 कर्मचारियों को 'वर्क फ्रॉम होम' (घर से काम करने) के निर्देश दिए हैं। कंपनी के इस फैसले के बाद अब से कोई भी ऑफिस ऑपरेशन, ऑफिस बिल्डिंग प्रेमिसेस से संचालित नहीं होगा। प्रबंधन के अनुसार, यह निर्णय कर्मचारियों की सुविधा और सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए लिया गया है।

पुलिस जांच में NIA और ATS की भूमिका

नासिक पुलिस ने TCS ऑफिस में कथित यौन उत्पीड़न और जबरन धर्म परिवर्तन के मामले में अपनी जांच को और तेज कर दिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए नासिक पुलिस ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA), आतंकवाद निरोधक दस्ता (ATS) और राज्य की खुफिया इकाइयों को पत्र लिखकर जांच में शामिल होने का आग्रह किया है। पुलिस कमिश्नर संदीप कर्णिक ने जानकारी दी कि जांचकर्ता सोशल मीडिया पर व्यक्त की जा रही उन चिंताओं की भी समीक्षा कर रहे हैं, जिनमें इस कथित दुराचार के पीछे संभावित चरमपंथी संबंधों या विदेशी फंडिंग की आशंका जताई गई है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि अब तक ऐसे दावों का समर्थन करने वाला कोई ठोस सबूत नहीं मिला है और इन एजेंसियों से संपर्क केवल व्यापक जांच सुनिश्चित करने के लिए किया गया है।

9 FIR और गंभीर आरोपों का विवरण

अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, कर्मचारियों की शिकायतों के आधार पर अब तक कुल नौ FIR दर्ज की गई हैं।

गिरफ्तारियां और फरार आरोपियों की तलाश

इस मामले में पुलिस ने अब तक छह कर्मचारियों और एक असिस्टेंट जनरल मैनेजर (AGM) को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार किए गए कई आरोपियों के पास सुपरवाइजरी भूमिकाएं थीं, जिसका उन्होंने कथित तौर पर अपने जूनियर सहकर्मियों के खिलाफ दुरुपयोग किया। मामले में एक अन्य महिला आरोपी अभी भी फरार है, जिसकी तलाश जारी है।

HR विभाग की भूमिका और आंतरिक जांच

जांच के दायरे में कंपनी का HR विभाग भी आ गया है। आरोपियों में एक वरिष्ठ HR अधिकारी सहित अन्य महिला कर्मचारी भी शामिल हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने एक शिकायतकर्ता को अपनी शिकायत पर आगे बढ़ने से हतोत्साहित किया। पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि उन पर शिकायत को आंतरिक रूप से दबाने और उसे उचित स्तर तक आगे न बढ़ाने का आरोप है।