अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में करीब 2 घंटे लंबी एक अत्यंत महत्वपूर्ण और गोपनीय बैठक की। इस बैठक को लेकर दुनिया भर में यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव को खत्म करने के लिए किसी बड़े समझौते या सीजफायर का ऐलान हो सकता है। हालांकि, बैठक खत्म होने के बाद भी किसी अंतिम समझौते पर सहमति नहीं बन पाई और न ही कोई आधिकारिक घोषणा की गई।
अमेरिकी हितों और शर्तों पर ट्रंप का रुख
व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बैठक के बाद स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति ट्रंप केवल उसी समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे जो पूरी तरह से अमेरिका के हित में होगा और उनकी निर्धारित शर्तों को पूरा करेगा। अधिकारी ने कड़े शब्दों में कहा कि अमेरिका किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं देगा। यह अमेरिका की विदेश नीति का एक प्रमुख हिस्सा है जिसे इस बातचीत में प्राथमिकता दी जा रही है।
बैठक शुरू होने से पहले ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर अपनी मांगों को स्पष्ट किया था। उन्होंने कहा कि ईरान को सबसे पहले होर्मुज स्ट्रेट में बिछाई गई अपनी सी माइंस को हटाना होगा। ट्रंप के अनुसार, इसके बाद ही अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकेबंदी को खत्म करेगा जिससे जहाजों की आवाजाही फिर से सामान्य रूप से शुरू हो सकेगी और इसके अलावा, ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ईरान के पास मौजूद उच्च स्तर तक संवर्धित यूरेनियम को खोजकर उसे पूरी तरह नष्ट किया जाना चाहिए।
वित्तीय विवाद और जब्त संपत्तियों का मुद्दा
पैसे के लेनदेन को लेकर भी दोनों देशों के बीच स्थिति स्पष्ट नहीं है। ट्रंप ने साफ कर दिया है कि फिलहाल ईरान को कोई पैसा नहीं दिया जाएगा। यह बयान उन खबरों के जवाब में आया है जिनमें दावा किया गया था कि ईरान बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए अपनी जब्त की गई 12 अरब डॉलर की संपत्तियों को जारी करने की मांग कर रहा है। अमेरिका इस समय किसी भी वित्तीय रियायत के मूड में नहीं दिख रहा है।
ईरान की प्रतिक्रिया और संप्रभुता का दावा
दूसरी ओर, ईरान ने भी स्पष्ट किया है कि अभी तक अमेरिका के साथ कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने जानकारी दी कि दोनों देशों के बीच संदेशों का आदान-प्रदान और बातचीत की प्रक्रिया अभी भी जारी है। बघाई ने जोर देकर कहा कि इस समय ईरान की सबसे बड़ी प्राथमिकता क्षेत्र में जारी युद्ध को समाप्त करना है।
ईरानी प्रवक्ता ने यह भी बताया कि वर्तमान में यूरेनियम संवर्धन और परमाणु कार्यक्रम से जुड़े तकनीकी पहलुओं पर कोई अंतिम चर्चा नहीं हो रही है। होर्मुज स्ट्रेट के मुद्दे पर ईरान का रुख काफी सख्त है। बघाई ने कहा कि इस रणनीतिक जलमार्ग का भविष्य केवल ईरान और ओमान ही तय करेंगे। ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बघेर गालिबाफ ने सोशल मीडिया पर अपनी बात रखते हुए कहा कि ईरान बातचीत की मेज पर झुककर नहीं बल्कि अपनी ताकत के दम पर रियायतें हासिल करता है। उन्होंने अमेरिकी वादों पर अविश्वास जताते हुए कहा कि पहले अमेरिका को ठोस कदम उठाने होंगे।
इन प्रमुख मुद्दों पर फंसा है पेंच
दोनों देशों के बीच कई ऐसे गंभीर मुद्दे हैं जिन पर सहमति बनना अभी बाकी है। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपना यूरेनियम संवर्धन पूरी तरह बंद कर दे और अपने पास मौजूद संवर्धित यूरेनियम को किसी दूसरे देश को सौंप दे। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी यानी आईएईए की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के पास वर्तमान में 60 प्रतिशत तक संवर्धित 440 किलो 900 ग्राम यूरेनियम मौजूद है। यह स्तर परमाणु हथियार बनाने के लिए आवश्यक ग्रेड के बेहद करीब माना जाता है।
इसके अलावा, अमेरिका की मांग है कि होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह से व्यापार के लिए खोला जाए और वहां बिछाई गई माइंस को 30 दिन के भीतर हटाया जाए। वहीं, ईरान अपनी विदेशों में फंसी लगभग 24 अरब डॉलर की संपत्तियों की वापसी पर अड़ा हुआ है। ईरान यह कानूनी गारंटी भी मांग रहा है कि भविष्य में अमेरिका इस समझौते से पीछे नहीं हटेगा। इन जटिल परिस्थितियों के बीच बातचीत का दौर जारी है, लेकिन अंतिम नतीजे तक पहुंचने के लिए अभी और इंतजार करना पड़ सकता है।
