ब्रिटेन में सियासी भूचाल: प्रधानमंत्री कीर स्टारमर इस्तीफे के लिए तैयार, अपनी शर्तों पर छोड़ेंगे पद

ब्रिटेन की लेबर सरकार गहरे संकट में है। प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने पद छोड़ने के संकेत दिए हैं, जबकि कैबिनेट मंत्रियों के इस्तीफे और गिरती लोकप्रियता ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं। यूगोव सर्वे के अनुसार स्टारमर अब तक के सबसे अलोकप्रिय प्रधानमंत्री बन गए हैं।

यूनाइटेड किंगडम की राजनीति में इस समय जबरदस्त उथल-पुथल का माहौल बना हुआ है और ताजा मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर अपने पद को छोड़ने के लिए मानसिक रूप से तैयार हो चुके हैं, लेकिन उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह अपनी शर्तों पर ही इस्तीफा देंगे। यूके की लेबर सरकार इस समय मतदाताओं की भारी नाराजगी और पार्टी के भीतर चल रहे आंतरिक विवादों के दोहरे संकट से जूझ रही है और स्थानीय चुनावों में पार्टी के निराशाजनक प्रदर्शन और कैबिनेट मंत्रियों के लगातार होते इस्तीफों ने इस राजनीतिक संकट को और अधिक गहरा कर दिया है। ब्रिटिश मीडिया में इस बात की व्यापक चर्चा है कि स्टारमर का प्रशासन अब अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है।

कैबिनेट में बगावत और इस्तीफे की तैयारी

ब्रिटेन की सियासत में चल रही इस हलचल के बीच यह बात सामने आई है कि कीर स्टारमर ने अपने बेहद करीबी सहयोगियों से पद छोड़ने की इच्छा जताई है। मीडिया रिपोर्ट्स में कैबिनेट के एक सदस्य के हवाले से बताया गया है कि स्टारमर प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं, लेकिन वह इसे गरिमापूर्ण तरीके से करना चाहते हैं। सूत्रों का कहना है कि प्रधानमंत्री को इस बात का भली-भांति एहसास है कि देश में फैली मौजूदा अराजकता और सरकार के भीतर का असंतोष ज्यादा समय तक नहीं चल सकता। वह अपनी पसंद के ढंग से सत्ता का हस्तांतरण करना चाहते हैं और इसके लिए वह जल्द ही एक समय सारिणी की घोषणा कर सकते हैं। उनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उनका जाना किसी विवाद के बजाय एक व्यवस्थित प्रक्रिया के तहत हो।

संकट में घिरी यूके सरकार

स्टारमर प्रशासन के प्रति मतदाताओं की बढ़ती नाराजगी के कारण यूके की लेबर सरकार खुद को एक बड़े संकट में फंसा हुआ पा रही है। सरकार की मुश्किलें तब और बढ़ गईं जब पीटर मैंडेलसन की नियुक्ति और बाल यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन के साथ उनके पुराने संबंधों से जुड़े विवाद ने तूल पकड़ लिया और इस विवाद ने सरकार की छवि को काफी नुकसान पहुंचाया है। इसके साथ ही, हाल ही में हुए स्थानीय चुनावों में लेबर पार्टी के खराब प्रदर्शन ने आग में घी डालने का काम किया है। इन सभी कारणों से अब स्टारमर के इस्तीफे की मांग न केवल विपक्ष की ओर से, बल्कि उनकी अपनी पार्टी के भीतर से भी काफी ज्यादा बढ़ गई है।

वेस स्ट्रीटिंग का इस्तीफा और नेतृत्व को चुनौती

स्टारमर सरकार को सबसे ताजा और बड़ा झटका तब लगा जब उनकी कैबिनेट के महत्वपूर्ण सदस्य और पूर्व स्वास्थ्य सचिव वेस स्ट्रीटिंग ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया और शनिवार को एक सार्वजनिक बयान में स्ट्रीटिंग ने स्पष्ट किया कि वह लेबर पार्टी के नेतृत्व के लिए भविष्य में होने वाले किसी भी मुकाबले में कीर स्टारमर को सीधी चुनौती देंगे। उन्होंने प्रधानमंत्री पद के लिए अपनी दावेदारी पेश कर दी है, जिससे पार्टी के भीतर सत्ता संघर्ष और तेज हो गया है। अपने भाषण के दौरान पूर्व स्वास्थ्य सचिव ने स्टारमर से यह भी पुरजोर अपील की है कि वे अपने पद छोड़ने के लिए एक निश्चित समय-सीमा तय करें ताकि पार्टी के भविष्य पर मंडरा रहे अनिश्चितता के बादल छंट सकें।

स्टारमर की गिरती लोकप्रियता और लिज ट्रस से तुलना

इस राजनीतिक उथल-पुथल के बीच कीर स्टारमर की व्यक्तिगत लोकप्रियता में भी भारी गिरावट दर्ज की गई है। YouGov UK द्वारा किए गए एक हालिया सर्वे के अनुसार, ब्रिटेन के लगभग 69 प्रतिशत लोगों की राय लेबर पार्टी के इस नेता के बारे में पूरी तरह से नकारात्मक हो चुकी है। YouGov की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि स्टारमर फिलहाल रिकॉर्ड पर अब तक के सबसे कम लोकप्रिय प्रधानमंत्री बन गए हैं। जनता के बीच उनकी छवि इतनी खराब हो चुकी है कि कई लोग उनकी तुलना लिज ट्रस से कर रहे हैं, जिनका यूके के प्रधानमंत्री के तौर पर कार्यकाल मात्र 49 दिनों का रहा था। यह तुलना स्टारमर के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका मानी जा रही है।

पार्टी के भीतर भविष्य का डर

प्रधानमंत्री की गिरती लोकप्रियता का असर अब लेबर पार्टी के सांसदों के मनोबल पर भी दिखने लगा है। पार्टी के कई सांसदों को अब यह डर सता रहा है कि अगर स्टारमर के नेतृत्व में अलोकप्रियता का यह सिलसिला इसी तरह जारी रहा, तो इससे भविष्य में किसी भी लेबर सरकार के बनने की संभावनाएं पूरी तरह खत्म हो सकती हैं। सांसदों को इस बात की भी चिंता है कि देश की राजनीति का रुख Reform UK के नेता नाइजेल फराज के नेतृत्व वाले धुर-दक्षिणपंथी खेमे की ओर मुड़ सकता है। उन्हें डर है कि सत्ता उनके हाथ से निकलकर दक्षिणपंथी ताकतों के पास जा सकती है, जो लेबर पार्टी के लिए एक अस्तित्वगत संकट पैदा कर देगा।