ईरान जंग में अमेरिका को भारी नुकसान: 17 फाइटर जेट तबाह और 29 अरब डॉलर खर्च

अमेरिकी कांग्रेस की रिपोर्ट के अनुसार ईरान के साथ 40 दिनों की जंग में अमेरिका के 17 लड़ाकू विमान और 24 ड्रोन तबाह हो गए हैं। पेंटागन ने इस युद्ध पर 29 अरब डॉलर खर्च किए हैं, जबकि कुल नुकसान 100 अरब डॉलर से अधिक होने का अनुमान है।

संयुक्त राज्य अमेरिका ने ईरान के साथ चले 40 दिनों के भीषण संघर्ष के दौरान हुए अपने सैन्य और वित्तीय नुकसान की एक विस्तृत और आधिकारिक सूची जारी की है। अमेरिकी कांग्रेस को सौंपी गई एक रिपोर्ट के अनुसार, इस युद्ध में पेंटागन को भारी क्षति का सामना करना पड़ा है, जिसमें 17 महत्वपूर्ण लड़ाकू विमान और हेलीकॉप्टर या तो पूरी तरह से नष्ट हो गए या फिर गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गए। यह संघर्ष, जिसमें अमेरिका और इजराइल ने मिलकर ईरान के सर्वोच्च नेता की हत्या कर दी थी, ईरानी सेना की जवाबी कार्रवाई के कारण अमेरिकी संपत्तियों के लिए बेहद महंगा साबित हुआ है।

विमानों और ड्रोनों के नुकसान का विवरण

रिपोर्ट में उन विमानों की विस्तृत सूची दी गई है जो इस हवाई युद्ध के दौरान तबाह हुए। नष्ट हुए 17 विमानों में 4 एफ-15ई स्ट्राइक ईगल लड़ाकू विमान शामिल हैं, जो अपनी लंबी दूरी की मारक क्षमता के लिए जाने जाते हैं। इसके अलावा, दुनिया के सबसे उन्नत पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ विमानों में से एक, 1 एफ-35ए लाइटनिंग द्वितीय भी इस जंग में बर्बाद हो गया। नुकसान की इस सूची में 1 ए-10 थंडरबोल्ट विमान, 7 केसी-135 स्ट्रैटोटैंकर ईंधन भरने वाले विमान और 1 ई-3 सेंट्री एडब्ल्यूएसीएस विमान भी शामिल है, जो युद्ध क्षेत्र की निगरानी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

विशेष अभियानों के लिए उपयोग किए जाने वाले बेड़े को भी झटका लगा है, जिसमें 2 एमसी-130जे कमांडो द्वितीय विमान और 1 एचएच-60डब्ल्यू जॉली ग्रीन द्वितीय हेलीकॉप्टर का नुकसान हुआ है। रिपोर्ट में एक चौंकाने वाला तथ्य यह भी सामने आया है कि 3 अमेरिकी विमानों को कुवैत की सेना ने गलती से मार गिराया था। ड्रोन बेड़े की बात करें तो, ईरान की रक्षा प्रणालियों ने 24 एमक्यू-9 रीपर ड्रोन और 1 एमक्यू-4सी ट्राइटन ड्रोन को मार गिराने में सफलता हासिल की है।

सैन्य ठिकानों की तबाही और बचाव अभियान

विमानों के नुकसान के अलावा, खाड़ी क्षेत्र में स्थित कई अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भी ईरान ने अपने हमलों में ध्वस्त कर दिया है। इन रणनीतिक ठिकानों को हुए नुकसान की भरपाई और उनके पुनर्निर्माण के लिए अमेरिका को 2 से 3 बिलियन डॉलर का खर्च करना पड़ सकता है। ये ठिकाने युद्ध के दौरान संचालन और रसद बनाए रखने के लिए मुख्य केंद्र के रूप में कार्य कर रहे थे।

रिपोर्ट में ईरान की धरती पर फंसे 2 अमेरिकी एयरमैन के बचाव के लिए चलाए गए एक उच्च-जोखिम वाले मिशन का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि अमेरिका इन सैनिकों को सुरक्षित निकालने में सफल रहा, लेकिन इस रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान उसके 2 हेलीकॉप्टर नष्ट हो गए। यह घटना युद्ध के दौरान जमीनी और हवाई अभियानों की तीव्रता और खतरों को दर्शाती है।

वित्तीय बोझ और राजनीतिक प्रतिक्रिया

युद्ध के वित्तीय खर्च को लेकर अमेरिकी सरकार के भीतर बहस तेज हो गई है। पेंटागन ने हाल ही में अमेरिकी सीनेट के समक्ष दिए गए अपने बयान में कहा कि ईरान जंग में सीधे तौर पर 29 अरब डॉलर का खर्च आया है। हालांकि, सीएनएन और अन्य अमेरिकी मीडिया संस्थानों के अनुसार, इस आंकड़े में नष्ट हुए हथियारों और उपकरणों की कीमत शामिल नहीं है। यदि विमानों, ड्रोनों और बुनियादी ढांचे के नुकसान को जोड़ दिया जाए, तो कुल खर्च 100 अरब डॉलर से अधिक होने का अनुमान है।

इतने भारी नुकसान के बावजूद, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने फॉक्स न्यूज को दिए एक साक्षात्कार में सैन्य कार्रवाई का बचाव किया है। रुबियो ने जोर देकर कहा कि खर्च पर बहस करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि यदि ईरान परमाणु हथियार विकसित कर लेता है, तो उसे रोकना असंभव होगा। उन्होंने तर्क दिया कि भविष्य के खतरों को रोकने के लिए यह निवेश और नुकसान आवश्यक था।