वरुण चक्रवर्ती बनाम रवि बिश्नोई: 35 मैचों के बाद कौन है असली किंग? देखें चौंकाने वाले आंकड़े

भारत और न्यूजीलैंड सीरीज के बीच वरुण चक्रवर्ती और रवि बिश्नोई के टी20 आंकड़ों की तुलना ने फैंस को चौंका दिया है। जानें 35 मैचों के बाद कौन सा स्पिनर टीम इंडिया के लिए अधिक घातक साबित हुआ है।

भारतीय क्रिकेट टीम इस समय न्यूजीलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज में अपना दबदबा बनाए हुए है। पांच मैचों की इस सीरीज में टीम इंडिया ने शुरुआती तीन मैच जीतकर 3-0 की अजेय बढ़त बना ली है। इस सीरीज के दौरान टीम मैनेजमेंट ने रोटेशन पॉलिसी अपनाते हुए तीसरे मैच में मिस्ट्री स्पिनर वरुण चक्रवर्ती को आराम दिया और उनकी जगह लेग स्पिनर रवि बिश्नोई को प्लेइंग इलेवन में शामिल किया। बिश्नोई ने इस मौके का भरपूर फायदा उठाया और चार। ओवर में महज 18 रन देकर दो महत्वपूर्ण विकेट चटकाए। इस प्रदर्शन के बाद एक बार फिर बहस छिड़ गई है कि टी20 इंटरनेशनल में इन दोनों में से कौन बेहतर गेंदबाज है।

35 मैचों के बाद विकेटों का गणित

जब हम वरुण चक्रवर्ती और रवि बिश्नोई के करियर की तुलना 35-35 टी20 मैचों के आधार पर करते हैं, तो आंकड़े बेहद दिलचस्प नजर आते हैं और वरुण चक्रवर्ती ने अब तक अपने करियर में कुल 35 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले हैं। इन 35 मैचों की 33 पारियों में वरुण ने शानदार गेंदबाजी करते हुए 58 विकेट अपने नाम किए हैं। उनका गेंदबाजी औसत 15. 34 का रहा है, जो टी20 प्रारूप में विश्व स्तरीय माना जाता है। दूसरी ओर, रवि बिश्नोई ने अब तक कुल 43 मैच खेले हैं, लेकिन अगर उनके पहले 35 मैचों के रिकॉर्ड को देखें, तो उन्होंने 35 पारियों में 17 और 98 के औसत से 55 विकेट हासिल किए थे। यहां वरुण चक्रवर्ती विकेट लेने के मामले में बिश्नोई से थोड़े आगे नजर आते हैं।

फाइव विकेट हॉल और सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन

गेंदबाजी में मैच जिताऊ प्रदर्शन की बात करें तो वरुण चक्रवर्ती का पलड़ा भारी दिखता है। वरुण ने अपने 35 मैचों के सफर में दो बार पांच विकेट लेने का कारनामा (5-wicket haul) किया है। इसके अलावा उन्होंने एक बार चार विकेट भी झटके हैं। उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ रहा, जहां उन्होंने मात्र 17 रन देकर 5 विकेट लिए थे। वहीं रवि बिश्नोई की बात करें तो 35 मैचों के बाद उनके नाम एक भी फाइव विकेट हॉल नहीं था। उन्होंने दो बार चार विकेट लेने का कारनामा जरूर किया और बिश्नोई का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन जिम्बाब्वे के खिलाफ रहा है, जहां उन्होंने 13 रन देकर 4 विकेट चटकाए थे।

इकॉनमी रेट और मेडन ओवर्स का मुकाबला

टी20 क्रिकेट में रन रोकना उतना ही महत्वपूर्ण है जितना विकेट लेना। इकॉनमी रेट के मामले में दोनों गेंदबाजों के बीच कांटे की टक्कर है। वरुण चक्रवर्ती ने 35 मैचों के दौरान 7. 09 की इकॉनमी रेट से रन खर्च किए हैं, जो उनकी मिस्ट्री स्पिन की प्रभावशीलता को दर्शाता है। वरुण ने इस दौरान एक मेडन ओवर भी फेंका है। वहीं रवि बिश्नोई की बात करें तो 35 मैचों के बाद उनकी इकॉनमी रेट 7. 23 की रही थी और हालांकि, बिश्नोई मेडन ओवर फेंकने के मामले में वरुण से आगे रहे हैं। उन्होंने अपने पहले 35 मैचों में 3 मेडन ओवर डाले थे,। जो दिखाता है कि वह बल्लेबाजों पर दबाव बनाने में माहिर हैं।

किसे मिलना चाहिए नियमित मौका?

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि वरुण चक्रवर्ती विकेट लेने की क्षमता और औसत के मामले में रवि बिश्नोई से थोड़े बेहतर साबित हुए हैं, खासकर बड़े मैचों और मजबूत टीमों के खिलाफ। वरुण की मिस्ट्री स्पिन बल्लेबाजों के लिए आज भी एक पहेली बनी हुई है। हालांकि, रवि बिश्नोई की फील्डिंग और उनकी गुगली उन्हें एक कंपलीट पैकेज बनाती है। भारतीय टीम के लिए यह एक 'हैप्पी सिरदर्द' है कि उनके पास दो ऐसे विश्व स्तरीय स्पिनर मौजूद हैं जो किसी भी समय मैच का पासा पलट सकते हैं। आगामी टी20 वर्ल्ड कप को देखते हुए इन दोनों के बीच की यह प्रतिस्पर्धा भारतीय गेंदबाजी को और मजबूत बनाएगी।

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