पश्चिम बंगाल विधानसभा में यूसीसी और गुंडा दमन समेत चार बड़े बिल पेश करेंगे शुभेंदु अधिकारी

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी सोमवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा में यूसीसी, ओबीसी आरक्षण और गुंडा दमन से जुड़े चार महत्वपूर्ण विधेयक पेश करने जा रहे हैं।

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी सोमवार को विधानसभा में चार अत्यंत महत्वपूर्ण विधेयक पेश करने के लिए तैयार हैं, जो राज्य के कानूनी ढांचे में व्यापक बदलाव ला सकते हैं। इन विधेयकों में पिछड़ा वर्ग आयोग संशोधन बिल, रंगदारी और गुंडों पर लगाम लगाने से जुड़े दो विशेष बिल और ओबीसी आरक्षण संशोधन बिल शामिल हैं। हालांकि, सबसे अधिक चर्चा और राजनीतिक सरगर्मी यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) को लेकर है, जिसे लेकर अटकलें तेज हैं कि मुख्यमंत्री इसे सोमवार को ही सदन के पटल पर रख सकते हैं।

कानूनी ढांचे में बड़े बदलाव की तैयारी

राज्य में टीएमसी के 15 साल के शासन को समाप्त करने के दो महीने से भी कम समय के भीतर, भाजपा सरकार अपने सबसे महत्वपूर्ण और राजनीतिक रूप से संवेदनशील चुनावी वादों को पूरा करने की दिशा में तेजी से बढ़ रही है। प्रस्तावित यूसीसी कानून का उद्देश्य धर्म की परवाह किए बिना विवाह, तलाक, विरासत और गोद लेने जैसे विषयों के लिए एक समान नागरिक ढांचा तैयार करना है। यदि यह बिल सोमवार को पेश और पारित हो जाता है, तो पश्चिम बंगाल देश का चौथा ऐसा राज्य बन जाएगा जहां यूसीसी लागू होगा। इससे पहले उत्तराखंड, गुजरात और असम इस दिशा में कदम उठा चुके हैं।

चुनावी वादों को समय से पहले पूरा करने की कोशिश

भाजपा ने चुनाव प्रचार के दौरान इस बात पर जोर दिया था कि सभी नागरिकों पर एक ही तरह के सिविल कानून लागू होने चाहिए। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने वादा किया था कि सत्ता में आने के 6 महीने के भीतर यूसीसी लागू किया जाएगा, लेकिन सरकार इसे 2 महीने से भी कम समय में पेश करने जा रही है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि जिस प्रक्रिया का पालन गुजरात, उत्तराखंड और असम में किया गया था, उसी तरह इसे पश्चिम बंगाल में भी लागू किया जाएगा और उन्होंने शुक्रवार को ही इसके संकेत दे दिए थे कि वह सोमवार को विधानसभा को इस बारे में जानकारी देंगे।

आदिवासी समाज को मिलेगी संवैधानिक सुरक्षा

बिल पेश होने से पहले उठ रही चिंताओं को दूर करते हुए राज्य भाजपा अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने स्पष्ट किया कि संवैधानिक रूप से सुरक्षित आदिवासी समुदाय इस कानून के दायरे से बाहर रहेंगे। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से बताया कि संविधान के आर्टिकल 366(25) और 342 के तहत मान्यता प्राप्त अनुसूचित जनजातियों के सदस्यों को प्रस्तावित कानून से छूट मिलेगी। उनके रीति-रिवाजों, परंपराओं और विशेष अधिकारों की रक्षा की जाएगी और भट्टाचार्य ने उन आरोपों को भी खारिज किया कि यह कानून परिवार के आकार को नियंत्रित करने से जुड़ा है, उन्होंने कहा कि ऐसे प्रावधान यूसीसी का हिस्सा नहीं हैं।

विपक्ष का कड़ा विरोध और रणनीतिक घेराबंदी

विपक्षी दलों ने इन विधेयकों को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। टीएमसी चेयरपर्सन और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पार्टी विधायकों को विधानसभा के अंदर और बाहर इन बिलों का विरोध करने का निर्देश दिया है। ममता बनर्जी का तर्क है कि यह प्रस्ताव संवैधानिक नैतिकता और भारत के बहुलवादी चरित्र के खिलाफ है। विशेष रूप से रंगदारी और गुंडों पर लगाम लगाने वाले बिलों का विरोध किया जा रहा है, क्योंकि इसके तहत किसी भी व्यक्ति को 1 साल तक हिरासत में रखा जा सकता है। टीएमसी ने इसे यूएपीए और मीसा से भी सख्त करार दिया है। नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में बागी तृणमूल खेमा, हुमायूं कबीर, मुस्तफिजुर रहमान राणा, नौशाद सिद्दीकी और कांग्रेस विधायक भी इस बिल के विरोध में लामबंद हो गए हैं।