GST Reforms 2025 / GST में आपको ऐसे ही नहीं मिल गई बड़ी राहत, ये है अंदर की पूरी कहानी

जीएसटी परिषद की लंबी बैठकों के बाद आखिरकार सहमति बन गई। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राज्यों को भरोसा दिलाया कि उनके हितों से समझौता नहीं होगा। पीएम मोदी के निर्देश पर मिडिल क्लास और गरीबों को राहत देने के लिए दरों में सुधार किया गया। इससे उपभोग बढ़ेगा और भविष्य में राजस्व भी मजबूत होगा।

GST Reforms 2025: सरकार ने जीएसटी की दरों में सुधार के लिए पहले से ही व्यापक तैयारी कर ली थी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने छह महीने तक विभिन्न समूहों के साथ लगातार बैठकें कीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि मध्यम वर्ग और गरीब जनता को अधिकतम राहत दी जाए। इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए कई स्तरों पर चर्चाएँ हुईं। गृह मंत्री अमित शाह ने भी इस मुद्दे पर कई बैठकें कीं, ताकि राजनीतिक रूप से संवेदनशील वस्तुओं पर टैक्स को लेकर कोई विवाद न हो। पीएम मोदी ने यह भी जोर दिया कि राजस्व की स्थिति स्पष्ट हो, जिससे राज्य सरकारें संतुष्ट रहें और संघीय ढांचा मजबूत बना रहे।

जीएसटी परिषद की बैठक: लंबी चर्चा, कठिन फैसला

जीएसटी परिषद की दो दिवसीय बैठक 3 सितंबर, 2025 को आयोजित की गई थी। पीएम मोदी ने लाल किले से अपने संबोधन में जीएसटी में राहत देने का ऐलान किया था। हालाँकि, विपक्षी राज्यों, खासकर पश्चिम बंगाल, पंजाब, केरल और कर्नाटक ने राजस्व की कमी को लेकर चिंता जताई। इस वजह से बैठक, जो शाम 7 बजे तक समाप्त होनी थी, रात 9:30 बजे तक चली।

विपक्षी राज्यों ने बैठक को अगले दिन तक टालने की मांग की, लेकिन वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अंतिम निर्णय लेने के लिए रात भर चर्चा को तैयार थीं। पंजाब और पश्चिम बंगाल बाद में सहमत हो गए, लेकिन कर्नाटक और केरल राजस्व हानि की भरपाई के लिए केंद्र से लिखित आश्वासन चाहते थे।

सहमति कैसे बनी?

बैठक में गतिरोध के दौरान छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री ओ पी चौधरी ने सुझाव दिया कि यदि कर्नाटक और केरल सहमत नहीं हैं, तो वोटिंग कराई जाए। जीएसटी परिषद में आमतौर पर सहमति से निर्णय लिए जाते हैं, और वोटिंग दुर्लभ होती है। चौधरी ने अपनी बात को बार-बार दोहराया, जिसके बाद निर्मला सीतारमण ने भी स्पष्ट किया कि जो वोटिंग चाहते हैं, वे खुलकर कहें। इससे विपक्षी राज्यों को यह डर सताने लगा कि वोटिंग में विरोध करने से जनता में गलत संदेश जाएगा। अंत में, पश्चिम बंगाल ने मध्यस्थता की और कर्नाटक व केरल को मनाया। इस तरह देर रात सभी राज्यों की सहमति बन गई, और वित्त मंत्री ने सुधारों की घोषणा की।

वित्त मंत्री का भरोसा: कोई अन्याय नहीं होगा

निर्मला सीतारमण ने बैठक में स्पष्ट किया कि किसी भी राज्य के साथ अन्याय नहीं होगा। उन्होंने टेबल की ओर इशारा करते हुए कहा, "यहाँ रखा पैसा केंद्र और राज्यों दोनों का है। अगर राज्यों को नुकसान हो रहा है, तो केंद्र को भी हो रहा है।" उनका कहना था कि इस समय प्राथमिकता आम जनता को राहत देना है। उन्होंने राज्यों को भरोसा दिलाया कि उनके हितों का पूरा ध्यान रखा जाएगा और केंद्र व राज्य मिलकर इस चुनौती का सामना करेंगे।

जीएसटी सुधार का असर

सूत्रों के अनुसार, जीएसटी दरों में सुधार के कारण शुरुआती छह महीनों में राजस्व संग्रह पर असर पड़ सकता है। इस वित्तीय वर्ष की शेष अवधि में कलेक्शन में कमी देखी जा सकती है। हालांकि, अगले वित्तीय वर्ष से सकारात्मक परिणाम दिखने की उम्मीद है। जीएसटी दरों में कटौती से लोगों के पास अधिक पैसा होगा, जिससे उनकी खरीदारी की क्षमता बढ़ेगी। इससे दीर्घकाल में राजस्व में वृद्धि होगी, और अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।

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