नक्सलवाद के बाद अब घुसपैठ पर प्रहार अमित शाह तय करेंगे डेडलाइन

नक्सलवाद के खात्मे के बाद गृह मंत्री अमित शाह अब अवैध घुसपैठ को रोकने के लिए मिशन मोड में काम कर रहे हैं। इसके लिए जल्द ही एक समय सीमा तय की जा सकती है ताकि सभी एजेंसियां घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें वापस भेजने का काम तेजी से पूरा कर सकें।

देश से नक्सलवाद के लगभग पूरी तरह खात्मे के बाद अब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का पूरा ध्यान अवैध घुसपैठ को रोकने पर केंद्रित हो गया है। आंतरिक सुरक्षा के मोर्चे को और अधिक मजबूत और अभेद्य बनाने के लिए गृह मंत्रालय जल्द ही घुसपैठ के खात्मे के लिए एक निश्चित समय सीमा यानी डेडलाइन तय कर सकता है। यह रणनीति ठीक वैसी ही होगी जैसी नक्सलवाद को खत्म करने के लिए अपनाई गई थी। अमित शाह ने देश से नक्सलवाद को जड़ से मिटाने के लिए 31 मार्च 2026 की समय सीमा निर्धारित की थी। इस निर्धारित अवधि के बीतने के बाद उन्होंने संसद को सूचित किया था कि देश से नक्सलवाद को लगभग समाप्त किया जा चुका है और सुरक्षा एजेंसियों ने भी इस तथ्य की पुष्टि की है।

मिशन मोड में काम और समन्वय

सरकार का मानना है कि यदि घुसपैठ रोकने के लिए एक स्पष्ट डेडलाइन तय की जाती है तो सभी राज्य सरकारें और सुरक्षा एजेंसियां एक साथ मिलकर बेहतर समन्वय के साथ काम करेंगी। इससे पूरे अभियान को एक मिशन मोड मिलेगा जिससे घुसपैठियों की पहचान करने और उन्हें वापस भेजने की प्रक्रिया में तेजी आएगी। वर्तमान में देश में अवैध घुसपैठ को पूरी तरह खत्म करने और अवैध रूप से रह रहे लोगों की पहचान कर उन्हें उनके मूल देश वापस भेजने के लिए एक व्यापक अभियान पहले से ही चल रहा है।

डिटेक्ट डिटेन और डिपोर्ट मॉडल

देश में घुसपैठ और अवैध रूप से रह रहे लोगों की स्थिति का जायजा लेने के लिए गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में गुजरात, राजस्थान और त्रिपुरा जैसे सीमावर्ती राज्यों का दौरा किया था। वह जल्द ही पश्चिम बंगाल का भी दौरा करेंगे और वहां की सुरक्षा स्थिति की समीक्षा करेंगे। इस पूरे अभियान को डिटेक्ट, डिटेन और डिपोर्ट यानी पहचान करना, हिरासत में लेना और वापस भेजना के तीन चरणों वाले मॉडल पर चलाया जा रहा है। इसकी जमीनी स्तर पर लगातार मॉनीटिरिंग की जा रही है। केंद्र सरकार घुसपैठ को पूरी तरह खत्म करने के लिए जीरो इनफिल्ट्रेशन की नीति पर काम कर रही है और इसके लिए सीमा सुरक्षा बल को कड़े निर्देश दिए गए हैं।

सीमा पर अवैध निर्माण और डेमोग्राफी मिशन

घुसपैठ रोकने के साथ-साथ सरकार सीमावर्ती इलाकों में हो रहे अवैध निर्माणों पर भी सख्त रुख अपना रही है। अंतरराष्ट्रीय सीमा के 15 किलोमीटर के दायरे में होने वाले सभी अवैध निर्माणों और अतिक्रमणों की पहचान कर उन्हें ध्वस्त करने के आदेश दिए गए हैं। इसके अलावा सीमावर्ती क्षेत्रों में हो रहे जनसांख्यिकीय बदलावों यानी डेमोग्राफी चेंज की जांच के लिए एक उच्च-स्तरीय डेमोग्राफी मिशन का गठन किया गया है जिसने अपना काम शुरू कर दिया है। यह मिशन इस बात की जांच करेगा कि सीमा के पास आबादी के स्वरूप में किस तरह के बदलाव आ रहे हैं।

आधुनिक तकनीक और डिजिटल जनगणना का उपयोग

पाकिस्तान और बांग्लादेश से लगी सीमाओं को पूरी तरह सुरक्षित बनाने के लिए अत्याधुनिक तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। इसमें अंधेरे में भी देख सकने वाले थर्मल कैमरे, सेंसर, रडार और ड्रोन का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है। बांग्लादेश सीमा पर फेंसिंग यानी बाड़ लगाने का काम भी मिशन मोड में चल रहा है। अमित शाह ने स्पष्ट किया है कि अवैध घुसपैठियों को हर हाल में देश से बाहर किया जाएगा। इस कार्य में देश में चल रही डिजिटल जनगणना के डेटा से भी बड़ी मदद मिलेगी जिससे अवैध रूप से रह रहे लोगों की सटीक पहचान करना आसान हो जाएगा।