आजमगढ़ मतदाता सूची में विकास यादव नाम मिलने पर पांच बीएलओ समेत नौ पर बड़ी कार्रवाई

समाजवादी पार्टी के आरोपों के बाद आजमगढ़ में मतदाता सूची की जांच में बड़ी अनियमितताएं मिली हैं। निर्वाचन विभाग ने पांच बीएलओ और कंप्यूटर सहायक समेत नौ कर्मचारियों और अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों और प्रशासनिक तंत्र में उस समय हड़कंप मच गया जब मतदाता सूची को लेकर समाजवादी पार्टी की ओर से उठाए गए गंभीर सवालों के बाद निर्वाचन विभाग ने बड़ी और सख्त कार्रवाई का ऐलान किया है और राज्य के आजमगढ़ जिले में मतदाता सूची तैयार करने में भारी अनियमितताएं और गंभीर लापरवाही का मामला सामने आने के बाद मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तर प्रदेश ने त्वरित और कड़े कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। इस पूरी घटना की शुरुआत तब हुई जब समाजवादी पार्टी ने राज्य में मतदाता सूची की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करते हुए निर्वाचन आयोग का ध्यान आकर्षित किया था। सपा की इस शिकायत ने प्रशासनिक हलकों में भूचाल ला दिया और निर्वाचन विभाग को मामले की तह तक जाने के लिए मजबूर कर दिया, जिसके बाद एक के बाद एक कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आए।

समाजवादी पार्टी ने 15 अक्टूबर 2026 को एक आधिकारिक प्रेस वार्ता का आयोजन किया था। इस प्रेस वार्ता के दौरान सपा नेताओं ने सरकार और निर्वाचन तंत्र को घेरते हुए यह गंभीर आरोप लगाया था कि आजमगढ़ जिले की विधानसभा क्षेत्र संख्या 347 की मतदाता सूची में एक ही व्यक्ति जिसका नाम विकास यादव है, उसका नाम फर्जी तरीके से या लापरवाही के कारण 10 बार दर्ज किया गया है। इस सनसनीखेज आरोप के सामने आते ही राजनीतिक दलों में प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे और समाजवादी पार्टी द्वारा उठाए गए इस गंभीर मुद्दे का मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तर प्रदेश ने तत्काल संज्ञान लिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने जिला निर्वाचन अधिकारी, आजमगढ़ से इस पूरे प्रकरण पर एक विस्तृत और तथ्यात्मक जांच रिपोर्ट तत्काल प्रस्तुत करने को कहा, ताकि सच्चाई का पता लगाया जा सके और दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जा सके।

जांच रिपोर्ट में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े और तथ्य

जिला निर्वाचन अधिकारी द्वारा सौंपी गई जांच रिपोर्ट में जो खुलासे हुए, उन्होंने प्रशासनिक अमले में चल रही लापरवाही की पोल खोल दी और जांच रिपोर्ट के अनुसार, जब संबंधित विधानसभा क्षेत्र संख्या 347 की मतदाता सूची की गहनता से जांच की गई, तो यह पाया गया कि हिंदी में विकास यादव नाम कुल 13 बार दर्ज था। यह आंकड़ा समाजवादी पार्टी के लगाए गए आरोपों से भी तीन कदम आगे निकला। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया कि इन कुल 13 प्रविष्टियों में से दो प्रविष्टियों को मतदाता सूची के पुनरीक्षण या अन्य प्रक्रियाओं के दौरान पहले ही नियमानुसार हटाने की आवश्यक कार्रवाई की जा चुकी थी। इसके बावजूद शेष बची हुई प्रविष्टियों ने अधिकारियों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि आखिर जमीनी स्तर पर कार्य करने वाले कर्मचारियों ने इतनी बड़ी चूक कैसे की।

जांच को आगे बढ़ाते हुए जब शेष प्रविष्टियों का भौतिक सत्यापन किया गया, तो यह सामने आया कि शेष 11 प्रविष्टियां असल में आजमगढ़ जिले के 11 अलग-अलग व्यक्तियों से संबंधित थीं। ये सभी 11 व्यक्ति अपने-अपने संबंधित गांवों में वास्तविक रूप से निवास कर रहे थे। जांच में यह भी एक महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया कि इन 11 व्यक्तियों में से जो वास्तविक विकास यादव थे, उनको छोड़कर अन्य 10 लोगों के नाम, पते और दूसरे विवरणों में जो विसंगतियां थीं, उन्हें सुधारने के लिए फॉर्म-8 भरवाया जा चुका था। इसके अलावा, एक ऐसा मतदाता भी जांच में सामने आया जिसका नाम और जिसके पिता का नाम बिल्कुल समान था, लेकिन वह मतदाता आजमगढ़ का नहीं बल्कि गोरखपुर जिले के चौरीचौरा विधानसभा क्षेत्र का निवासी पाया गया। इस मतदाता की प्रविष्टि आजमगढ़ की अन्य प्रविष्टियों से पूरी तरह अलग और स्वतंत्र थी, जिससे यह साबित हुआ कि कई बार नामों की समानता के कारण प्रशासनिक स्तर पर भ्रम की स्थिति पैदा हो जाती है, जिसे समय रहते ठीक किया जाना आवश्यक होता है।

कंप्यूटर सहायक और पांच बीएलओ के खिलाफ सख्त एक्शन

जांच रिपोर्ट में नाम दर्ज करने की प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही और प्रशासनिक शिथिलता पाए जाने के बाद निर्वाचन विभाग ने फौरी तौर पर जमीनी स्तर के कर्मचारियों के खिलाफ कड़े कदम उठाए हैं। इस पूरे मामले में दोषी पाए गए मतदाता पंजीकरण केंद्र के कंप्यूटर सहायक और पांच बूथ लेवल अधिकारियों यानी बीएलओ को मतदाता सूची से जुड़े सभी प्रकार के आगामी और वर्तमान कार्यों से तत्काल प्रभाव से हटाने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं। निर्वाचन विभाग ने केवल इन्हें कार्य से हटाने पर ही विराम नहीं लगाया है, बल्कि इन सभी छह कर्मचारियों को उनकी सेवा से बर्खास्त करने के संबंध में औपचारिक नोटिस जारी करने के भी सख्त निर्देश दिए हैं, ताकि भविष्य में इस तरह की गैर-जिम्मेदाराना हरकतें दोबारा न दोहराई जा सकें।

इतना ही नहीं, संबंधित कंप्यूटर सहायक और पांचों बूथ लेवल अधिकारियों के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसते हुए लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 32 के तहत औपचारिक कार्रवाई शुरू करने से पहले नोटिस जारी करने को कहा गया है। यह धारा चुनाव से संबंधित दस्तावेजों और सूचियों को तैयार करने में लापरवाही या नियमों के उल्लंघन के मामलों में लागू होती है, जिसके तहत दोषियों को विधिवत दंडित किए जाने का प्रावधान है। निर्वाचन विभाग के इस कड़े रुख से महकमे में हड़कंप मच गया है और निचले स्तर के कर्मचारियों में इस बात का डर बैठ गया है कि चुनावी कार्यों में कोताही अब बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

तीन वरिष्ठ निर्वाचन अधिकारियों पर भी गिरी गाज

केवल निचले स्तर के कर्मचारियों को ही नहीं, बल्कि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान अपनी देखरेख में गंभीर लापरवाही बरतने वाले वरिष्ठ अधिकारियों पर भी निर्वाचन विभाग का डंडा चला है। मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया में भारी लापरवाही और अपने पर्यवेक्षण में पूर्ण शिथिलता बरतने के मामले में तत्कालीन निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी और दो सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों के खिलाफ भी विभागीय कार्यवाही शुरू करने के पुख्ता निर्देश दिए गए हैं। इन तीनों जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच बैठाने के लिए औपचारिक रूप से आरोप पत्र जारी करने के निर्देश दे दिए गए हैं, जिससे उनकी प्रशासनिक सेवा पर भी इसका गंभीर प्रभाव पड़ सकता है.

इन अधिकारियों के खिलाफ भी कानून का शिकंजा कसते हुए लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 32 के तहत कानूनी और विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया को विधिवत रूप से शुरू करने से पहले नोटिस देने का निर्देश दिया गया है। वरिष्ठ अधिकारियों पर इस तरह की कार्रवाई होना इस बात का प्रमाण है कि निर्वाचन आयोग मतदाता सूची की पवित्रता और शुद्धता के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। चुनाव आयोग का यह संदेश बिल्कुल स्पष्ट है कि चाहे कर्मचारी छोटा हो या फिर अधिकारी बड़ा, यदि चुनावी सूचियों में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी पाई जाती है, तो कानून अपना काम पूरी सख्ती के साथ करेगा और किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।

आजमगढ़ की सभी विधानसभा सीटों की होगी व्यापक जांच

मामले की गंभीरता और बड़े स्तर पर सामने आई अनियमितताओं को देखते हुए मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने आजमगढ़ जिले के जिला निर्वाचन अधिकारी को एक और बड़ा और व्यापक निर्देश जारी किया है। निर्देश के तहत अब केवल विधानसभा क्षेत्र संख्या 347 ही नहीं, बल्कि आजमगढ़ जिले के अंतर्गत आने वाले सभी विधानसभा क्षेत्रों की मतदाता सूचियों की इसी विशेष बिंदु पर गहन और बारीकी से जांच करने को कहा गया है। निर्वाचन आयोग यह सुनिश्चित करना चाहता है कि कहीं जिले के अन्य हिस्सों में भी इसी तरह की डुप्लीकेट प्रविष्टियां या तकनीकी और मानवीय त्रुटियां तो मौजूद नहीं हैं, जो आने वाले चुनावों की निष्पक्षता को प्रभावित कर सकती हैं।

इस पूरे निर्देश के तहत जिला निर्वाचन अधिकारी को आदेश दिया गया है कि वह जिले के सभी विधानसभा क्षेत्रों की सूचियों की समीक्षा कर अपनी एक विस्तृत और समग्र रिपोर्ट आगामी एक सप्ताह के भीतर प्रस्तुत करें। इस रिपोर्ट के आने के बाद यह स्पष्ट हो पाएगा कि क्या जिले के अन्य हिस्सों में भी इस तरह की कोई बड़ी प्रशासनिक चूक हुई है या नहीं। जैसे ही यह कार्रवाई और जांच आगे बढ़ी है, मतदाता सूची में नामों की इस तरह की पुनरावृत्ति और इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों तथा कर्मचारियों की जवाबदेही तय होने का मुद्दा एक बार फिर से राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर सुर्खियों में आ गया है।

राजनीतिक विश्लेषकों और जानकारों का मानना है कि निर्वाचन विभाग द्वारा की गई यह त्वरित कार्रवाई और जांच इस बात का एक बड़ा उदाहरण है कि राजनीतिक दलों द्वारा उठाए जाने वाले तकनीकी और तथ्यात्मक सवालों को अब प्रशासनिक तंत्र नजरअंदाज नहीं कर सकता। निर्वाचन विभाग की इस जांच में अनियमितताएं खुलकर सामने आ चुकी हैं और अब यह देखना बेहद अहम और दिलचस्प होगा कि जारी किए गए इन तमाम नोटिसों, विभागीय कार्रवाइयों और जांच रिपोर्ट के बाद आगे क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं और क्या इससे मतदाता सूचियों की शुद्धता हमेशा के लिए सुनिश्चित हो पाती है या नहीं।