जियो प्लेटफॉर्म्स आईपीओ लिस्टिंग से भारत की टॉप तीन कंपनियों में होगी शामिल

रिलायंस इंडस्ट्रीज की जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ 10 लाख 30 हजार करोड़ रुपये के वैल्यूएशन के साथ भारत की टॉप तीन लिस्टेड कंपनियों में शामिल होने के लिए तैयार है।

रिलायंस इंडस्ट्रीज की जियो प्लेटफॉर्म्स का इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग यानी आईपीओ इसे मार्केट कैपिटलाइजेशन के हिसाब से भारत की टॉप तीन लिस्टेड कंपनियों में जगह दिलाने के लिए पूरी तरह तैयार है। ऑफर प्राइस के आधार पर इसकी वैल्यूएशन 10 लाख 30 हजार करोड़ रुपये आंकी गई है। लिस्टिंग के बाद, रिलायंस ग्रुप कुल लिस्टेड मार्केट कैपिटलाइजेशन के मामले में भारत का सबसे बड़ा लिस्टेड बिजनेस ग्रुप भी बन जाएगा। यह ऐतिहासिक आईपीओ भारतीय कॉर्पोरेट इतिहास में एक नया मील का पत्थर साबित हो रहा है, जिसने निवेशकों के बीच जबरदस्त उत्साह पैदा किया है।

30 हजार करोड़ रुपये से अधिक का विशाल आकार और रिकॉर्ड सब्सक्रिप्शन

19 गुना बोलियां आईं, जो निवेशकों की अभूतपूर्व और जबरदस्त दिलचस्पी को स्पष्ट रूप से दर्शाती हैं। पब्लिक इश्यू और एंकर इन्वेस्टर प्लेसमेंट को मिलाकर कुल मांग 7 लाख 40 हजार करोड़ रुपये यानी 78 अरब डॉलर को पार कर गई, जबकि आवेदनों की कुल संख्या 1 करोड़ 39 लाख के आंकड़े के करीब पहुंच गई। यह शानदार प्रदर्शन इस बात का गवाह है कि बाजार के तमाम उतार-चढ़ाव के बावजूद निवेशकों का भरोसा इस महारत्न कंपनी पर पूरी तरह से कायम है।

100 मिनट में इतिहास रचते हुए हुआ पूरी तरह सब्सक्राइब

स्टॉक एक्सचेंज के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, केवल पब्लिक ऑफरिंग यानी एंकर बुक को छोड़कर, 4 लाख 90 हजार करोड़ रुपये से अधिक की भारी-भरकम बोलियां प्राप्त हुईं। यह कुल मांग उन शेयरों की वैल्यू को दर्शाती है जिनकी निवेशकों द्वारा मांग की गई थी, न कि उस रकम को जो जियो प्लेटफॉर्म्स इस आईपीओ के जरिए सीधे तौर पर जुटाएगी। यह महत्वपूर्ण इश्यू खुलने के मात्र 100 मिनट के भीतर ही पूरी तरह से सब्सक्राइब हो गया, जो इसे भारतीय इतिहास का अब तक का सबसे तेजी से पूरी तरह सब्सक्राइब होने वाला आईपीओ बनाता है। इसके अलावा, क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स यानी क्यूआईबी के लिए आरक्षित हिस्सा, जिसकी कुल वैल्यू 5 हजार 500 करोड़ रुपये थी, पहले 10 मिनट के भीतर ही पूरी तरह से सब्सक्राइब हो गया था।

सभी निवेशक श्रेणियों से मिला अभूतपूर्व और मजबूत रिस्पॉन्स

इस मेगा आईपीओ में समाज और बाजार के सभी तरह के निवेशकों की ओर से बेहद मजबूत मांग देखने को मिली। एंकर इन्वेस्टर्स को छोड़कर, क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स ने 3 लाख 87 हजार करोड़ रुपये की भारी बोलियां लगाईं, जबकि हाई-नेट-वर्थ इंडिविजुअल यानी एचएनआई कैटेगरी से 57 हजार करोड़ रुपये की बोलियां प्राप्त हुईं। इसके साथ ही, देश के आम रिटेल निवेशकों ने 26 हजार करोड़ रुपये, कंपनी के कर्मचारियों ने 1 हजार 450 करोड़ रुपये और योग्य शेयरधारकों ने 19 हजार करोड़ रुपये की बोलियां इस आईपीओ में लगाईं। 93 गुना सब्सक्राइब दर्ज किया गया।

बड़ी गिरावट और वैश्विक उथल-पुथल के दौर में बाजार में नया इतिहास

यह शानदार आईपीओ रिलायंस ग्रुप के लिए एक और ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित हुआ है। लगभग 1 करोड़ 40 लाख आवेदनों के भारी आंकड़ों के साथ, इसने खुदरा और पहली बार निवेश करने वाले निवेशकों के बीच अपनी पहुंच को और अधिक व्यापक बना लिया है। यह मजबूत मांग ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में देखने को मिली, जब दुनिया भर के वैश्विक इक्विटी बाजारों में भारी उतार-पुढ़ाव का दौर चल रहा था। विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई ने साल की शुरुआत से लेकर अब तक कुल 33 अरब डॉलर की भारी बिकवाली की थी, और ठीक इसी समान अवधि में निफ्टी 50 बेंचमार्क सूचकांक में लगभग 13 फीसदी की बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी।

रुपये को मिला मजबूत सहारा और वैश्विक निवेशकों की भारी भागीदारी

बाजार की इन तमाम प्रतिकूल परिस्थितियों और विपरीत स्थितियों के बावजूद, जियो प्लेटफॉर्म्स को कुल 78 अरब डॉलर की रिकॉर्ड मांग प्राप्त हुई। इस आईपीओ में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने के लिए विदेशी निवेशकों द्वारा अमेरिकी डॉलर को भारतीय रुपये में बदलने की प्रक्रिया के कारण बाजार में डॉलर की अतिरिक्त आपूर्ति पैदा हुई। इस अतिरिक्त आपूर्ति ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की बढ़ती हुई कीमतों के तमाम दबावों के बीच भारतीय रुपये को एक बहुत बड़ा और मजबूत सहारा प्रदान किया। इस प्रकार, जियो प्लेटफॉर्म्स की यह लिस्टिंग न केवल रिलायंस ग्रुप के लिए बल्कि पूरे भारतीय शेयर बाजार और अर्थव्यवस्था के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण और सकारात्मक घटनाक्रम साबित हुई है।