ईरान-मिडिल ईस्ट जंग से बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था पस्त, जीडीपी ग्रोथ में भारी गिरावट

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का असर बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा है। ईंधन संकट और बढ़ती महंगाई के कारण वर्ल्ड बैंक ने विकास दर का अनुमान घटाकर 3.9% कर दिया है। रेडीमेड गारमेंट सेक्टर में उत्पादन 40% तक गिर गया है, जिससे पड़ोसी देश के सामने बड़ा आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध की आग अब बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था तक पहुंच गई है, जहां ईंधन की गंभीर समस्या और बढ़ती महंगाई ने आम जनता से लेकर बड़े उद्योगों तक पर भारी दबाव बना दिया है। ईरान और मिडिल ईस्ट के अन्य हिस्सों में जारी तनाव का प्रभाव बांग्लादेश की आर्थिक स्थिति पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। ऊर्जा आयात पर अत्यधिक निर्भरता के कारण देश में औद्योगिक गतिविधियां धीमी हो गई हैं और उत्पादन लागत में भारी वृद्धि हुई है, जिससे बांग्लादेश को अपनी आर्थिक विकास दर कम होने का डर सता रहा है।

सब्सिडी और ऊर्जा संकट का बढ़ता बोझ

बांग्लादेश सरकार पर इस वैश्विक संकट के कारण आर्थिक दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। 07 अरब अमेरिकी डॉलर खर्च करने पड़ सकते हैं। भारतीय मुद्रा में यह राशि 10 हजार करोड़ रुपये से भी अधिक बैठती है। इस स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने बिजली की बचत और ईंधन राशनिंग जैसे कड़े कदम उठाए हैं और खाद फैक्ट्रियों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है ताकि गैस की आपूर्ति बिजली संयंत्रों की ओर मोड़ी जा सके। इसके अलावा, शॉपिंग मॉल्स के खुलने के समय में भी कटौती की गई है।

वर्ल्ड बैंक का विकास दर पर नकारात्मक अनुमान

विश्व बैंक (World Bank) ने भी बांग्लादेश की आर्थिक स्थिति को लेकर चिंता जताई है। 9 प्रतिशत रह सकती है। 8 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया था। ऊर्जा सब्सिडी पर बढ़ता खर्च और अनियंत्रित महंगाई सरकार की वित्तीय स्थिति को और अधिक कमजोर कर सकती है, जिससे भविष्य की विकास योजनाओं पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।

गारमेंट इंडस्ट्री और निर्यात में भारी गिरावट

इस आर्थिक संकट का सबसे बड़ा प्रहार बांग्लादेश की रेडीमेड गारमेंट इंडस्ट्री पर पड़ा है, जिसे देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। उद्योग संगठनों के आंकड़ों के मुताबिक, ईंधन की कमी और बढ़ती लागत के कारण फैक्ट्रियों का उत्पादन 30 से 40 प्रतिशत तक घट गया है। इसके साथ ही, अमेरिका और यूरोप जैसे प्रमुख बाजारों को होने वाले निर्यात में भी 5 से 13 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। बांग्लादेशी कारोबारियों को यह डर सता रहा है कि यदि युद्ध की स्थिति लंबे समय तक बनी रही, तो भारत, कंबोडिया और वियतनाम जैसे प्रतिस्पर्धी देश अंतरराष्ट्रीय बाजार में उनकी हिस्सेदारी छीन सकते हैं।

आम जनता पर ईंधन संकट का सीधा असर

ईंधन की कमी ने आम नागरिकों के जीवन को भी बुरी तरह प्रभावित किया है। राजधानी ढाका के निवासी 53 वर्षीय तारिकुल इस्लाम की कहानी इस संकट की गंभीरता को दर्शाती है। तारिकुल पहले कपड़ों का व्यवसाय करते थे, लेकिन अब परिवार का भरण-पोषण करने के लिए बाइक राइड-शेयरिंग का काम करने को मजबूर हैं और हालांकि, पेट्रोल की भारी किल्लत के कारण उन्हें घंटों तक लंबी लाइनों में खड़ा रहना पड़ता है। उनके अनुसार, अब उनका एक पूरा दिन सिर्फ पेट्रोल खरीदने में बीत जाता है, जिसके बाद वह केवल दो दिन ही बाइक चला पाते हैं। इस समस्या ने उनकी दैनिक आमदनी पर बहुत बुरा असर डाला है और उनके जैसे हजारों लोग अब इसी तरह के संकट से जूझ रहे हैं।