BRICS में डॉलर पर प्रहार: स्थानीय करेंसी में व्यापार के लिए नया पेमेंट सिस्टम तैयार?

ब्रिक्स देश अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और डिजिटल भुगतान प्रणालियों जैसे यूपीआई और सीबीडीसी को जोड़ने पर विचार कर रहे हैं।

ब्रिक्स देशों के बीच अमेरिकी डॉलर पर अपनी निर्भरता को कम करने के लिए एक बड़ी तैयारी चल रही है और ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान इस बात पर गहन मंथन हो रहा है कि कैसे सदस्य देश अपनी स्थानीय मुद्राओं में आपसी व्यापार को बढ़ावा दे सकें और एक नया डिजिटल पेमेंट सिस्टम विकसित कर सकें। इस पहल का मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय व्यापार में डॉलर के वर्चस्व को चुनौती देना और सदस्य देशों की आर्थिक संप्रभुता को मजबूत करना है। ब्रिक्स समूह, जिसमें भारत, चीन, रूस, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका के साथ अब नए सदस्य भी शामिल हैं, लंबे समय से एक ऐसे तंत्र की तलाश में है जो उन्हें वैश्विक व्यापार के लिए अमेरिकी मुद्रा के दबाव से मुक्त कर सके।

पीयूष गोयल ने पेमेंट सिस्टम को जोड़ने पर दिया जोर

भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने ब्रिक्स के सदस्य देशों से अपने पेमेंट सिस्टम को आपस में जोड़ने की पुरजोर वकालत की है। उन्होंने कहा कि स्थानीय करेंसी में व्यापार को बढ़ावा देने के लिए यह एक आवश्यक कदम है। ब्रिक्स का एजेंडा हमेशा से यह रहा है कि आपसी लेनदेन के लिए अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता को कम किया जाए और गोयल के अनुसार, यदि सदस्य देश अपने भुगतान तंत्र को एकीकृत करते हैं, तो इससे व्यापारिक प्रक्रिया काफी सरल और प्रभावी हो जाएगी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सदस्य देशों को अपने-अपने पेमेंट सिस्टम को एक-दूसरे के साथ जोड़ने की दिशा में तेजी से काम करना चाहिए ताकि आपसी व्यापार में डॉलर की भूमिका को न्यूनतम किया जा सके।

यूपीआई और फास्ट पेमेंट सिस्टम का एकीकरण

जिस तरह भारत में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी यूपीआई ने डिजिटल भुगतान की दुनिया में क्रांति ला दी है, उसी तरह ब्रिक्स देशों के अलग-अलग फास्ट पेमेंट सिस्टम को आपस में जोड़ने पर विचार किया जा रहा है। इस योजना का उद्देश्य यह है कि सदस्य देशों के बीच होने वाले भुगतान को उतना ही आसान और त्वरित बनाया जा सके जितना कि एक देश के भीतर होता है और यदि यह सिस्टम लागू होता है, तो व्यापारियों को अपनी स्थानीय मुद्रा को पहले डॉलर में और फिर दूसरी स्थानीय मुद्रा में बदलने की जरूरत नहीं होगी। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि ट्रांजैक्शन कॉस्ट में भी भारी कमी आएगी। हालांकि, अभी किसी एक निश्चित मॉडल को अंतिम रूप नहीं दिया गया है, लेकिन चर्चा का मुख्य केंद्र डिजिटल भुगतान को सुगम बनाना ही है।

सीबीडीसी और क्रॉस-बॉर्डर डिजिटल पेमेंट्स

पेमेंट सिस्टम को आधुनिक बनाने के लिए सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी यानी सीबीडीसी को आपस में जोड़ने के विकल्पों पर भी काम चल रहा है। ब्रिक्स देश क्रॉस-बॉर्डर डिजिटल पेमेंट्स के लिए सीबीडीसी के इस्तेमाल की संभावनाओं को तलाश रहे हैं। यह तकनीक सदस्य देशों को सीधे एक-दूसरे के साथ डिजिटल मुद्रा में लेनदेन करने की सुविधा देगी और यहां यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है कि ब्रिक्स का वर्तमान फोकस किसी नई साझा मुद्रा को बनाने पर नहीं है, बल्कि अपनी-अपनी मौजूदा स्थानीय मुद्राओं में डिजिटल भुगतान को संभव बनाने पर है। सीबीडीसी के माध्यम से होने वाले लेनदेन अधिक सुरक्षित और पारदर्शी होंगे, जिससे डॉलर पर निर्भरता कम करने के लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद मिलेगी।

नेट-सेटलमेंट मॉडल की कार्यप्रणाली

ब्रिक्स देशों के बीच भुगतान को आसान बनाने के लिए एक और बड़े प्लान 'नेट-सेटलमेंट' पर विचार हो रहा है और इस मॉडल के तहत, दो देशों के बीच होने वाले हर एक लेनदेन का अलग-अलग भुगतान करने के बजाय, एक निश्चित अवधि के दौरान पूरे व्यापार का हिसाब एक साथ देखा जाएगा। उदाहरण के तौर पर, एक तय समय सीमा में दो देशों ने एक-दूसरे से कितना सामान खरीदा और कितना बेचा, इसका पूरा हिसाब जोड़ा जाएगा। अंत में, जो अंतर या बैलेंस बचेगा, केवल उसी का भुगतान किया जाएगा। इस प्रक्रिया से विदेशी मुद्रा में होने वाले लेनदेन की संख्या में भारी कमी आएगी और डॉलर की आवश्यकता भी कम हो जाएगी और यह मॉडल व्यापारिक संतुलन बनाए रखने और स्थानीय मुद्राओं के उपयोग को बढ़ाने में सहायक सिद्ध हो सकता है।

ईरानी राष्ट्रपति पेजेश्कियान का समर्थन

डॉलर पर निर्भरता कम करने की इस कवायद को ब्रिक्स के अन्य नेताओं का भी भरपूर समर्थन मिल रहा है और ईरान के राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने भी इस बात पर विशेष जोर दिया है कि डॉलर के वर्चस्व को कम किया जाना चाहिए। उन्होंने ब्रिक्स देशों से आह्वान किया कि वे अपनी-अपनी स्थानीय करेंसी में आपसी व्यापार को बढ़ाएं। उनका मानना है कि वैश्विक वित्तीय प्रणाली में विविधता लाने और अमेरिकी डॉलर से जुड़े भू-राजनीतिक जोखिमों से बचने के लिए यह एक अनिवार्य कदम है। ईरानी राष्ट्रपति के इस बयान से स्पष्ट होता है कि ब्रिक्स के भीतर डॉलर के विकल्प को लेकर एक मजबूत सहमति बन रही है।

निष्कर्ष और वर्तमान स्थिति

हालांकि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में इन सभी प्रस्तावों पर गंभीरता से चर्चा हो रही है, लेकिन अभी तक किसी भी योजना को अंतिम रूप नहीं दिया गया है। सदस्य देश वर्तमान में विभिन्न तकनीकी और आर्थिक पहलुओं का विश्लेषण कर रहे हैं। ब्रिक्स का मुख्य उद्देश्य एक ऐसा लचीला और स्वतंत्र भुगतान तंत्र बनाना है जो भविष्य में किसी भी बाहरी आर्थिक दबाव से सदस्य देशों की रक्षा कर सके। आने वाले समय में, यदि यूपीआई जैसे सिस्टम और सीबीडीसी का एकीकरण सफल होता है, तो यह वैश्विक व्यापार की दिशा और दशा को पूरी तरह से बदल सकता है। फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें ब्रिक्स के इन फैसलों पर टिकी हैं कि वे डॉलर के मुकाबले अपनी मुद्राओं को कितना मजबूत कर पाते हैं।