भारत सरकार ने ब्यूटी और वेलनेस इंडस्ट्री में स्किन ग्लो के नाम पर दिए जा रहे इंजेक्शनों पर कड़ा रुख अपनाते हुए नए निर्देश जारी किए हैं। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने यह स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी कॉस्मेटिक उत्पाद को इंजेक्शन के रूप में इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी गई है। सरकार ने चेतावनी दी है कि यदि कोई कंपनी, ब्यूटी क्लीनिक या विक्रेता कॉस्मेटिक उत्पादों को इंजेक्शन के माध्यम से इस्तेमाल करने का दावा करता है या इसका प्रचार-प्रसार करता है, तो उसके विरुद्ध कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह कदम उन क्लीनिकों पर लगाम लगाने के लिए उठाया गया है जो सुंदरता बढ़ाने के नाम पर असुरक्षित प्रक्रियाओं का सहारा ले रहे हैं।
भ्रामक विज्ञापनों और दावों पर रोक
भारत के औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) डॉ. राजीव सिंह रघुवंशी द्वारा जारी किए गए आधिकारिक नोटिस में कहा गया है कि कॉस्मेटिक कंपनियां ऐसे किसी भी दावे का उपयोग नहीं कर सकतीं जो आम जनता को गुमराह करने वाले हों और सरकार ने साफ किया है कि किसी भी उत्पाद के लेबल, उसकी पैकेजिंग या विज्ञापन में झूठे, बढ़ा-चढ़ाकर किए गए या किसी बीमारी के इलाज जैसे दावे करना नियमों का गंभीर उल्लंघन माना जाएगा। औषधि महानियंत्रक ने स्पष्ट किया है कि उपभोक्ताओं की सुरक्षा सर्वोपरि है और भ्रामक जानकारी फैलाकर उन्हें जोखिम में डालने वाली संस्थाओं को बख्शा नहीं जाएगा।
ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट 1940 के तहत परिभाषा
सरकार ने इस मामले में कानूनी स्थिति को स्पष्ट करते हुए ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट 1940 का हवाला दिया है। इस कानून के अनुसार, कॉस्मेटिक वे उत्पाद हैं जो मानव शरीर पर लगाने, छिड़कने या बाहरी इस्तेमाल के लिए तैयार किए गए हैं और इन उत्पादों का एकमात्र उद्देश्य शरीर की सफाई करना, सुंदरता को बढ़ाना और व्यक्ति को अधिक आकर्षक दिखाना है। सीडीएससीओ ने जोर देकर कहा है कि इन उत्पादों को किसी भी प्रकार के इलाज या इंजेक्शन के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। कानून के तहत कॉस्मेटिक्स की श्रेणी में आने वाली वस्तुएं केवल बाहरी त्वचा या अंगों के लिए होती हैं, उन्हें शरीर के भीतर इंजेक्ट करना नियमों के विरुद्ध है।
जनता से अपील और रिपोर्टिंग की व्यवस्था
सीडीएससीओ के नोटिस में यह भी उल्लेख किया गया है कि असुरक्षित या प्रतिबंधित सामग्रियों वाले कॉस्मेटिक उत्पादों का उपयोग करना और कॉस्मेटिक्स को एक चिकित्सा उपचार के रूप में पेश करना एक कानूनी अपराध है। नियामक संस्था ने आम जनता से भी इस दिशा में सतर्क रहने की अपील की है। सीडीएससीओ ने कहा है कि यदि किसी व्यक्ति को कहीं भी कॉस्मेटिक उत्पादों का गलत इस्तेमाल, भ्रामक प्रचार या इंजेक्शन के जरिए इनका उपयोग होता दिखाई देता है, तो इसकी जानकारी तुरंत नियामक एजेंसियों या राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरण को दी जानी चाहिए और इससे अवैध रूप से चल रहे इन ब्यूटी क्लीनिकों पर समय रहते कार्रवाई की जा सकेगी।
एस्थेटिक और वेलनेस क्लीनिकों पर विशेष नजर
अधिकारियों के अनुसार, यह चेतावनी विशेष रूप से उन एस्थेटिक, ब्यूटी और वेलनेस क्लीनिकों के लिए जारी की गई है, जहां स्किन ग्लो, एंटी-एजिंग और अन्य ब्यूटी ट्रीटमेंट के नाम पर इंजेक्शन आधारित प्रक्रियाएं धड़ल्ले से की जा रही हैं और हाल के दिनों में सीडीएससीओ के सामने ऐसे कई मामले आए थे जिनमें कॉस्मेटिक उत्पादों को इंजेक्शन के रूप में इस्तेमाल कर लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा था। इन शिकायतों और मामलों की गंभीरता को देखते हुए ही सरकार ने यह सख्त कदम उठाया है ताकि सौंदर्य प्रसाधनों के नाम पर चल रहे इस खतरनाक खेल को रोका जा सके।
