दुनिया भर में जारी युद्ध और तनाव के बीच चीन को रेयर अर्थ मिनरल्स यानी दुर्लभ खनिज पदार्थों के मामले में एक बड़ी और महत्वपूर्ण सफलता हाथ लगी है और यह खोज ऐसे समय में हुई है जब पूरी दुनिया में रक्षा उपकरणों की मांग चरम पर है। चीन को मिट्टी के नीचे से 17 ऐसे दुर्लभ धातु मिले हैं जिनका सीधा इस्तेमाल फाइटर जेट और मिसाइल बनाने में किया जाता है। वैज्ञानिकों ने इन तत्वों की पहचान मुख्य रूप से सीरियम, नियोडिमियम और डिस्प्रोसियम के रूप में की है और इस खोज के बाद रेयर अर्थ की दुनिया में चीन की बादशाहत और अधिक बढ़ने की संभावना है।
बर्फीले इलाकों में मिली बड़ी कामयाबी
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह खोज चीन के बेहद दुर्गम और बर्फीले इलाकों हेइलोंगजियांग और जिलिन में की गई है। वैज्ञानिकों ने इन इलाकों में हिम के पिघलने के बाद अपना शोध और सर्वे शुरू किया था। यह सफलता मिट्टी के नमूनों और टूटी हुई चट्टानों के गहन अध्ययन के बाद मिली है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इन क्षेत्रों में पहले क्षारीय ग्रेनाइट की चट्टानें मौजूद थीं और सर्दियों की भीषण ठंड और गर्मियों की तपिश के कारण यहां जमने और पिघलने का एक प्राकृतिक चक्र चलता रहा। इस निरंतर प्रक्रिया की वजह से चट्टानें धीरे-धीरे टूटकर बिखर गईं और मिट्टी में मिल गईं। इसी बिखरी हुई मिट्टी के भीतर वैज्ञानिकों को दुर्लभ धातुओं के भंडार मिले हैं।
सैन्य उपकरणों में इन धातुओं की भूमिका
खोजे गए इन 17 दुर्लभ धातुओं में से नियोडिमियम, डिस्प्रोसियम और सीरियम का सामरिक महत्व बहुत अधिक है। नियोडिमियम का उपयोग फाइटर जेट और मिसाइलों में लगने वाले मोटरों में किया जाता है। यह धातु अत्यंत शक्तिशाली चुंबक बनाने की क्षमता रखती है, जिससे जेट और मिसाइलों के मोटर बहुत तेज गति से काम कर पाते हैं और वहीं डिस्प्रोसियम का काम इन मोटरों को अत्यधिक गर्मी वाले माहौल में भी सुरक्षित रखना है ताकि वे खराब न हों। सीरियम का उपयोग बारूद के साथ किया जाता है ताकि आग लगाने या चिंगारी भड़काने की प्रक्रिया शुरू की जा सके। वर्तमान में अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन और रूस जैसे शक्तिशाली देश बड़े पैमाने पर मिसाइलों और लड़ाकू विमानों का निर्माण कर रहे हैं, जिससे इन धातुओं की अहमियत और बढ़ गई है।
वैश्विक बाजार पर चीन का नियंत्रण
पूरी दुनिया में इस्तेमाल होने वाले रेयर अर्थ मिनरल्स का 90 प्रतिशत हिस्सा अकेले चीन से निर्यात होता है। इस नई खोज के साथ चीन अपने इस वैश्विक प्रभाव को और अधिक मजबूत करना चाहता है। चीन के भू-वैज्ञानिकों ने जानकारी दी है कि अब इस खोज के बाद आगे के प्लान पर बहुत तेजी से काम किया जा रहा है। इन चिन्हित इलाकों से जल्द ही दुर्लभ धातुओं को इकट्ठा करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। यह खोज न केवल चीन की घरेलू जरूरतों को पूरा करेगी बल्कि वैश्विक रक्षा बाजार में उसकी स्थिति को और अधिक निर्णायक बना देगी।
