0 को मंजूरी दिए जाने के बाद मंगलवार को भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर और शेयर बाजार में जबरदस्त हलचल देखी गई। इस नई नीति के ऐलान ने निवेशकों के बीच उत्साह और चिंता दोनों का माहौल पैदा कर दिया है। जहां एक तरफ इलेक्ट्रिक स्कूटर बनाने वाली कंपनियों के शेयरों में जोरदार खरीदारी देखने को मिली, वहीं पारंपरिक पेट्रोल और डीजल इंजन वाले वाहनों का निर्माण करने वाली कंपनियों के शेयरों पर बिकवाली का भारी दबाव नजर आया। यह नीति राजधानी में प्रदूषण कम करने और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम मानी जा रही है। यह नई नीति 1 जुलाई 2026 से प्रभावी होगी और 31 मार्च 2030 तक लागू रहेगी।
शेयर बाजार पर नीति का असर
दिल्ली सरकार के इस फैसले का सबसे सकारात्मक असर इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता कंपनियों पर पड़ा है। एथर एनर्जी के शेयरों में करीब 4 प्रतिशत की तेजी आई और कंपनी का शेयर पहली बार 1131 रुपये के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। आपको बता दें कि साल 2026 में अब तक एथर के शेयरों में करीब 49 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की जा चुकी है। इसी तरह ओला इलेक्ट्रिक के शेयरों में भी करीब 9 दशमलव 3 प्रतिशत का बड़ा उछाल देखा गया। निवेशकों को उम्मीद है कि दिल्ली जैसे बड़े बाजार में पेट्रोल वाहनों पर पाबंदी से इन कंपनियों की बिक्री में भारी इजाफा होगा।
दूसरी ओर, रॉयल एनफील्ड मोटरसाइकिल बनाने वाली कंपनी आयशर मोटर्स के शेयरों को तगड़ा झटका लगा है। शुरुआती कारोबार में आयशर मोटर्स का शेयर करीब 7 प्रतिशत तक टूट गया था। हालांकि बाद में इसमें कुछ सुधार हुआ और दोपहर करीब 1 बजे तक यह 3 दशमलव 5 प्रतिशत की गिरावट के साथ कारोबार कर रहा था। इसी तरह भारत फोर्ज के शेयरों में भी करीब 5 प्रतिशत की गिरावट आई, जो बाद में संभलकर 1 प्रतिशत के नुकसान पर आ गया। हीरो मोटोकॉर्प, सोना बीएलडब्ल्यू प्रिसिजन फोर्जिंग्स और संवर्धन मदरसन इंटरनेशनल जैसी कंपनियों के शेयरों पर भी दबाव साफ देखा गया।
पॉलिसी के कड़े नियम और समयसीमा
0 के तहत सरकार ने वाहनों के पंजीकरण को लेकर बहुत स्पष्ट और कड़े नियम बनाए हैं। नीति के अनुसार, 1 जनवरी 2027 से दिल्ली में केवल इलेक्ट्रिक ऑटो-रिक्शा का ही नया रजिस्ट्रेशन किया जाएगा। इसके बाद 1 अप्रैल 2028 से दिल्ली में केवल इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों के पंजीकरण की अनुमति होगी। इसका मतलब है कि इन तारीखों के बाद दिल्ली में पेट्रोल से चलने वाले नए ऑटो और दोपहिया वाहनों की बिक्री और रजिस्ट्रेशन पूरी तरह बंद हो जाएगा। सरकार का लक्ष्य अगले कुछ वर्षों में दिल्ली की सड़कों पर चलने वाले वाहनों के बड़े हिस्से को इलेक्ट्रिक में बदलना है।
सब्सिडी और वित्तीय प्रोत्साहन
आम जनता को इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से सरकार ने भारी सब्सिडी का प्रावधान किया है। इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन खरीदने पर पहले साल में 30000 रुपये तक की सब्सिडी दी जाएगी। दूसरे साल में यह राशि घटकर 20000 रुपये और तीसरे साल में 10000 रुपये रह जाएगी। वहीं, इलेक्ट्रिक ऑटो खरीदने वालों को पहले साल 50000 रुपये, दूसरे साल 40000 रुपये और तीसरे साल 30000 रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।
इसके अलावा, पुराने वाहनों को हटाने के लिए सरकार ने स्क्रैपिंग इंसेंटिव की भी घोषणा की है। यदि कोई व्यक्ति अपने बीएस-4 या उससे पुराने पेट्रोल और डीजल वाहनों को स्क्रैप करता है, तो उसे 1 लाख रुपये तक का इंसेंटिव मिल सकता है। हालांकि, इस नीति में हाइब्रिड वाहनों के लिए किसी विशेष प्रोत्साहन का जिक्र नहीं किया गया है। दिल्ली सरकार अगले चार वर्षों में इस पूरी योजना पर करीब 15000 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना बना रही है, जिसमें चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार भी शामिल है।
विशेषज्ञों की राय और भविष्य की राह
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि दिल्ली की यह नीति भविष्य में अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल बन सकती है और यदि मुंबई, बेंगलुरु और चेन्नई जैसे शहर भी इसी तरह की नीति अपनाते हैं, तो भारत में ईवी क्रांति की रफ्तार बहुत तेज हो जाएगी। इससे टाटा मोटर्स, महिंद्रा, ओला इलेक्ट्रिक और एथर एनर्जी जैसी कंपनियों को लंबी अवधि में बड़ा फायदा होने की उम्मीद है। हालांकि, रॉयल एनफील्ड, बजाज ऑटो और टीवीएस मोटर जैसी कंपनियों के लिए यह एक चुनौती है, लेकिन अगर ये कंपनियां समय रहते अपने इलेक्ट्रिक पोर्टफोलियो को मजबूत करती हैं, तो वे इस बदलाव का लाभ उठा सकती हैं।
