राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में प्रदूषण का स्तर एक बार फिर खतरनाक स्थिति में पहुंच गया है और दिवाली से ठीक पहले दिल्ली के लोगों के लिए हवा में सांस लेना बेहद मुश्किल हो गया है। राजधानी में प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए ग्रेप-2 की पाबंदियां लागू की गई हैं, लेकिन इसके बावजूद कई प्रमुख इलाकों में एयर क्वालिटी इंडेक्स यानी एक्यूआई गंभीर श्रेणी में दर्ज किया गया है। समीर ऐप से प्राप्त ताजा आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में वायु गुणवत्ता की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है और प्रशासनिक कदमों के बावजूद धरातल पर कोई सकारात्मक परिणाम देखने को नहीं मिल रहा है।
राजधानी के जहांगीरपुरी इलाके में स्थिति सबसे ज्यादा भयानक है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी एक्यूआई 459 के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। इसके अलावा आईआईटी दिल्ली में एक्यूआई 450 और पंजाबी बाग में 448 दर्ज किया गया है। नरेला में प्रदूषण का स्तर 434, रोहिणी में 432, अलीपुर में 433, सोनिया विहार में 423 और मुद्रिका में भी एक्यूआई 423 दर्ज किया गया है। बवाना में हवा की गुणवत्ता 413, पूसा में 410, नॉर्थ कैंपस डीयू में 410, आरके पुरम में 418 और पड़पड़गंज में 407 रिकॉर्ड की गई है। इसके साथ ही ओखला फेज-2 में एक्यूआई 401 और सिरीफोर्ट में 403 दर्ज किया गया है, जिससे साफ है कि इन 12 से अधिक इलाकों में हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं।
दिल्ली के अन्य हिस्सों की बात करें तो वहां भी हवा की सेहत काफी खराब बनी हुई है और जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में एक्यूआई 393, आरटीओ में 399, द्वारका सेक्टर-8 में 395, जेएनयू में 387, मथुरा रोड पर 381, तालकटोरा गार्डन में 376 और कॉमनवेल्थ स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में भी एक्यूआई 376 दर्ज किया गया है। आया नगर में वायु गुणवत्ता सूचकांक 370, बुराड़ी में 361, चांदनी चौक में 357, आईजीआई एयरपोर्ट में 353 और अशोक विहार में 345 रिकॉर्ड किया गया है। इसके अलावा टिकरी कलां और बदरपुर में एक्यूआई 329, उत्तम नगर में 327, श्री अरबिंदो मार्ग पर 309, एनएसआईटी द्वारका में 303, शादीपुर में 301, आनंद विहार में 296 और लोधी रोड पर 286 दर्ज किया गया है।
प्रदूषण के इस खतरनाक स्तर के कारण दिल्ली के आम नागरिकों का दम घुट रहा है और लोगों को सांस लेने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सुबह और शाम के समय जहरीली हवा के कारण लोगों को आंखों में जलन, खांसी और गले में संक्रमण जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। लगातार बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए सरकार और प्रशासन की ओर से कई प्रकार के प्रयास और कदम उठाए जा चुके हैं, लेकिन मैदानी स्तर पर इनका कोई भी सकारात्मक नतीजा दिखाई नहीं दे रहा है। लोग जहरीली हवा में जीने को मजबूर हैं और वायु गुणवत्ता में सुधार के कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड यानी सीपीसीबी के मानकों के अनुसार, वायु गुणवत्ता सूचकांक का वर्गीकरण किया गया है। इसके तहत शून्य से 50 के बीच के एक्यूआई को अच्छा, 51 से 100 के बीच को संतोषजनक, 101 से 200 के बीच को मध्यम, 201 से 301 को खराब, 301 से 400 के बीच को बहुत खराब और 401 से 500 के बीच की वायु गुणवत्ता को गंभीर श्रेणी में माना जाता है। वर्तमान में दिल्ली के कई इलाके गंभीर श्रेणी की ऊपरी सीमा के करीब पहुंच चुके हैं, जो जनस्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा बन गया है।
