Modi-Trump Friendship / H-1B वीजा और टैरिफ विवाद के बावजूद ट्रंप के जिगरी दोस्त हैं PM मोदी

अमेरिका ने भारत से आयातित सामान पर 50% तक टैरिफ और H-1B वीजा फीस बढ़ा दी है, जिससे रिश्तों में तनाव दिखा है। बावजूद इसके, ट्रंप-मोदी संबंध सकारात्मक बताए जा रहे हैं। क्वाड समिट और दोनों नेताओं की मुलाकात की तैयारी जारी है। रूस से तेल खरीद पर अमेरिका सख्त रुख बनाए हुए है।

Modi-Trump Friendship: अमेरिका और भारत के बीच व्यापारिक रिश्ते इन दिनों तनावपूर्ण दौर से गुजर रहे हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत से आयातित सामान पर 50 प्रतिशत तक का टैरिफ लगा दिया है, जो दुनिया में सबसे ऊंचा दर है। यह कदम खासतौर पर भारत की रूस से तेल खरीद को लेकर उठाया गया है, जिसे अमेरिका यूक्रेन युद्ध में मॉस्को को आर्थिक सहायता मानता है। इसके अलावा, H-1B वीजा की फीस में भारी बढ़ोतरी ने भारतीय आईटी पेशेवरों को परेशान कर दिया है। फिर भी, व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने साफ कहा है कि ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच निजी रिश्ते मजबूत हैं, और दोनों नेताओं की जल्द मुलाकात की उम्मीद है। यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत 2025 में क्वाड शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने जा रहा है, जिसमें अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के नेता शामिल होंगे।

टैरिफ और वीजा फीस: व्यापारिक रिश्तों पर साया

ट्रंप प्रशासन ने अगस्त 2025 में भारत पर दो चरणों में 25-25 प्रतिशत का अतिरिक्त टैरिफ लगाया, जिससे कुल दर 50 प्रतिशत हो गई। इसका मुख्य कारण भारत का रूस से कच्चा तेल आयात है, जो 2025 में भारत की तेल जरूरतों का लगभग एक तिहाई हिस्सा पूरा करता है। अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, यह आयात रूस को यूक्रेन युद्ध के लिए फंडिंग प्रदान करता है। भारत ने इसे "अनुचित और अविवेकपूर्ण" बताते हुए खारिज किया है, क्योंकि यूरोपीय देश भी रूस के साथ व्यापार जारी रखे हुए हैं।

इस टैरिफ से भारतीय निर्यात पर गहरा असर पड़ेगा। टेक्सटाइल, चमड़ा, ज्वेलरी, दवाएं और सीफूड जैसे क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे, जहां अमेरिका भारत का प्रमुख बाजार है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इंस्टीट्यूट (GTRI) की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी बाजार में भारतीय झींगा निर्यात पर कुल टैरिफ 60 प्रतिशत तक पहुंच सकता है, जो 2025 में 20 अरब डॉलर के निर्यात को प्रभावित करेगा।

H-1B वीजा पर भी विवाद गहरा गया है। सितंबर 2025 में ट्रंप ने नई आवेदनों के लिए 1 लाख डॉलर (लगभग 84 लाख रुपये) की फीस लगाई, जो पहले की तुलना में 60 गुना ज्यादा है। भारत को 2024 में H-1B वीजा का 71 प्रतिशत हिस्सा मिला था, मुख्य रूप से आईटी क्षेत्र में। नासकॉम ने इसे "व्यापारिक निरंतरता के लिए खतरा" बताया है, जबकि भारत सरकार ने "मानवीय परिणामों" की चेतावनी दी है। व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया कि यह फीस केवल नए आवेदनों पर लागू होगी, न कि नवीनीकरण पर।

ट्रंप की खुली राय: दोस्त लेकिन सख्त

ट्रंप अपनी राय खुलकर रखने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर भारत को "एकतरफा व्यापार आपदा" कहा, लेकिन मोदी को "मेरा बहुत अच्छा दोस्त" भी बताया। व्हाइट हाउस के व्यापार सलाहकार पीटर नवारो ने कहा, "भारत को रूसी तेल खरीद बंद करनी होगी, तभी 25 प्रतिशत टैरिफ हटेगा।" अमेरिकी अधिकारी मानते हैं कि इन मुद्दों पर मतभेद हैं, लेकिन बातचीत जारी है। ट्रंप ने हाल ही में मोदी के 75वें जन्मदिन पर बधाई दी, जो रिश्तों की गर्मजोशी दिखाता है।

भारत ने जवाब में आत्मनिर्भरता पर जोर दिया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, "हम वहां से तेल खरीदेंगे जहां कीमत और लॉजिस्टिक्स फायदेमंद हो।" विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद भारत को वैकल्पिक बाजारों की ओर धकेल सकता है, लेकिन अमेरिका के साथ रणनीतिक साझेदारी बरकरार रहेगी।

क्वाड शिखर सम्मेलन: नई उम्मीद की किरण

तनाव के बीच क्वाड एक सकारात्मक मोड़ ला सकता है। भारत 2025 में पहली बार क्वाड लीडर्स समिट की मेजबानी करेगा, संभवतः नवंबर में। पिछला सम्मेलन 2024 में अमेरिका के डेलावेयर में हुआ था। क्वाड विदेश मंत्रियों की जुलाई 2025 की वाशिंगटन बैठक में चारों देशों ने इंडो-पैसिफिक में रणनीतिक और आर्थिक मुद्दों पर चर्चा की, जिसमें स्वास्थ्य सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और समुद्री क्षमता निर्माण शामिल हैं।

अमेरिकी राज्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "ट्रंप और मोदी के रिश्ते बहुत सकारात्मक हैं। दोनों की मुलाकात इस साल के अंत या 2026 की शुरुआत में हो सकती है।" ट्रंप के भारत दौरे की चर्चा चल रही है, जो क्वाड के दौरान संभव है। क्वाड के तहत 'पोर्ट्स ऑफ द फ्यूचर' पार्टनरशिप और 'क्वाड कैंसर मूनशॉट' जैसी पहलें जारी रहेंगी। भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा, "क्वाड एक मंच है जहां हम साझा चुनौतियों का सामना करेंगे।"

रूसी तेल पर अमेरिकी सख्ती बरकरार

रूस से तेल आयात पर अमेरिका की नीति कठोर है। ट्रंप ने भारत समेत यूरोपीय देशों से कहा है कि रूस को वित्तीय सहायता न दें। एक अधिकारी ने बताया, "ट्रंप इस मुद्दे पर बहुत सख्त हैं। हम हर मंच पर इसे उठाते हैं ताकि पुतिन तक पैसा न पहुंचे।" भारत ने स्पष्ट किया कि यह आयात ऊर्जा सुरक्षा के लिए है, और रूस से डिस्काउंटेड तेल वैश्विक बाजार को स्थिर रखता है। चीन के साथ अमेरिका की रणनीति अलग है, जहां व्यापार युद्ध जारी है।

आगे की राह: संतुलन और साझेदारी

ट्रंप-मोदी की संभावित मुलाकात क्वाड के इर्द-गिर्द घूम रही है। न्यूयॉर्क में हालिया व्यापार वार्ता "उत्साहजनक" रही, जहां टैरिफ कम करने और H-1B मुद्दे सुलझाने पर सहमति बनी। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत को गैर-संरेखण की पुरानी नीति पर लौटना पड़ सकता है, लेकिन क्वाड जैसे मंच रिश्तों को मजबूत करेंगे। जैसे ट्रंप ने कहा, "मोदी के साथ मेरा रिश्ता खास है," वैसे ही आने वाले महीनों में सकारात्मक खबरें मिल सकती हैं।

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