अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चीन यात्रा के दौरान वैश्विक कूटनीति के लिहाज से कई महत्वपूर्ण और दूरगामी घटनाक्रम सामने आए हैं। एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि चीनी नेता शी जिनपिंग के साथ उनकी बातचीत बेहद सकारात्मक और सार्थक रही है। इस उच्च स्तरीय बैठक के बाद एसोसिएटेड प्रेस ने जानकारी दी कि डोनाल्ड ट्रंप ने चीनी नेता शी जिनपिंग को आगामी 24 सितंबर को व्हाइट हाउस की आधिकारिक यात्रा के लिए आमंत्रित किया है। यह निमंत्रण दोनों देशों के बीच संबंधों को एक नई दिशा देने और द्विपक्षीय मुद्दों पर निरंतर संवाद बनाए रखने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। ट्रंप ने अपनी बातचीत के दौरान इस बात पर विशेष जोर दिया कि आज सुबह चीनी प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई बैठकें न केवल सकारात्मक थीं, बल्कि भविष्य के लिए बहुत उपयोगी भी साबित होंगी।
होर्मुज जलमार्ग और चीन की रणनीतिक भूमिका
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने इस यात्रा के दौरान एक अत्यंत महत्वपूर्ण बयान दिया है, जो वैश्विक व्यापार और सुरक्षा से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि होर्मुज जलमार्ग को फिर से खोलना पूरी तरह से चीन के आर्थिक और रणनीतिक हित में होगा। बेसेंट के अनुसार, उन्हें पूरा विश्वास है कि चीन इस जलमार्ग को खुलवाना सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास करेगा। उन्होंने संकेत दिया कि चीन पर्दे के पीछे से उन सभी पक्षों और प्रभावशाली लोगों के साथ मिलकर काम करेगा जिनका ईरानी नेतृत्व पर गहरा प्रभाव है और व्हाइट हाउस की ओर से भी इस बात की आधिकारिक पुष्टि की गई है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी नेता शी जिनपिंग दोनों ही इस बात पर पूरी तरह सहमत हैं कि होर्मुज जलमार्ग को फिर से खोलना अनिवार्य है। यह सहमति वैश्विक तेल आपूर्ति और समुद्री व्यापार के लिए एक बड़ी राहत के रूप में देखी जा रही है।
ईरान की आंतरिक स्थिति और अमेरिकी वित्त मंत्री का दावा
ईरान के मौजूदा हालातों और वहां के शासन पर चर्चा करते हुए अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने बेहद कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने दावा किया कि ईरान अब पतन की कगार पर खड़ा है। बेसेंट ने मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इस साल अब तक ईरान में तीस से चालीस हज़ार लोगों को फांसी दी जा चुकी है, जिनमें से कई लोग शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारी थे। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने यह सवाल उठाया कि ऐसे शासन से कैसे निपटा जाना चाहिए। बेसेंट ने सुझाव दिया कि ईरान को आर्थिक रूप से पूरी तरह जकड़ कर रखना चाहिए ताकि उसकी आक्रामक गतिविधियों पर लगाम लगाई जा सके और उन्होंने यह भी बताया कि वर्तमान में ईरान की आर्थिक स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि वहां सैनिकों को वेतन तक नहीं मिल पा रहा है और वे विदेशों से अपने हथियारों का भंडार भरने में भी पूरी तरह असमर्थ हैं।
ट्रंप और जिनपिंग के बीच संवाद की मुख्य बातें
द्विपक्षीय संबंधों का भविष्य और 'महान जहाज' का रूपक
चीनी नेता शी जिनपिंग ने अपने संबोधन के दौरान अमेरिका और चीन के संबंधों की तुलना एक "महान जहाज" से की और उन्होंने इस जहाज को सही राह पर संयुक्त रूप से आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया ताकि वैश्विक स्थिरता बनी रहे। जिनपिंग का मानना है कि दोनों महाशक्तियों को एक-दूसरे का प्रतिद्वंद्वी बनने के बजाय सहयोग की भावना के साथ काम करना चाहिए और इसी बीच, अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी फ़ार्स ने एक विश्वसनीय सूत्र के हवाले से खबर दी है कि ईरान ने होर्मुज जलमार्ग से कुछ चीनी जहाजों को गुजरने की अनुमति देना शुरू कर दिया है। यह कदम तब उठाया गया है जब होर्मुज के प्रबंधन प्रोटोकॉल पर एक प्रारंभिक सहमति बन गई है। राष्ट्रपति ट्रंप ने अंत में कहा कि शी जिनपिंग के साथ होना उनके लिए बहुत सम्मान की बात है और उन्होंने दोहराया कि आज हुई चर्चाएं दोनों देशों के लिए लाभकारी हैं और वे इस सकारात्मक संवाद को आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।
