ओमान की खाड़ी के पास समुद्री सुरक्षा की स्थिति अत्यंत गंभीर हो गई है, जहां भारत के एक मालवाहक जहाज 'हाजी अली' पर ड्रोन हमला होने के बाद वह समुद्र में समा गया। इस घटना के तुरंत बाद, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के एक जहाज को भी अनाधिकृत व्यक्तियों द्वारा जब्त किए जाने की खबर सामने आई है, जो ईरान के जलक्षेत्र की ओर बढ़ रहा है। इन घटनाओं ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। भारतीय अधिकारियों और अंतरराष्ट्रीय निगरानी संस्थाओं ने इन घटनाओं की पुष्टि की है, जिससे क्षेत्र में तनाव की स्थिति और भी गहरा गई है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब वैश्विक शक्तियां समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर पहले से ही चिंतित हैं।
भारतीय जहाज 'हाजी अली' पर हमला और बचाव कार्य
भारत के जहाजरानी मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी मुकेश मंगल ने इस दुखद घटना की विस्तृत जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि बुधवार को भारतीय ध्वज वाला मालवाहक जहाज 'हाजी अली' सोमालिया से शारजाह की ओर अपनी यात्रा पर था। इसी दौरान ओमान के तट के पास इस पर एक घातक ड्रोन हमला हुआ, जिसके परिणामस्वरूप जहाज में भीषण आग लग गई और आग इतनी भयावह थी कि जहाज को बचाया नहीं जा सका और वह ओमान की खाड़ी में डूब गया। हालांकि, राहत की बात यह रही कि ओमान के तटरक्षक बल ने त्वरित कार्रवाई करते हुए जहाज पर सवार सभी 14 भारतीय चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित बचा लिया। भारत के विदेश मंत्रालय ने इस घटना को 'अस्वीकार्य' करार दिया है और वाणिज्यिक जहाजों तथा नागरिक नाविकों पर हो रहे इन हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की है। मंत्रालय ने फिलहाल हमलावरों की पहचान उजागर नहीं की है।
UAE के जहाज की जब्ती और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
ब्रिटिश सेना और यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) सेंटर ने गुरुवार को एक और चिंताजनक घटना की जानकारी दी। रिपोर्ट के अनुसार, संयुक्त अरब अमीरात के पूर्वी तट पर लंगर डाले एक जहाज को अनाधिकृत व्यक्तियों ने अपने नियंत्रण में ले लिया है और यह घटना होर्मुज जलडमरूमध्य के पास, फुजैरा बंदरगाह से लगभग 38 समुद्री मील (70 किलोमीटर या 44 मील) उत्तर-पूर्व में हुई। बताया गया है कि जब्त किया गया यह जहाज अब ईरान के जलक्षेत्र की ओर बढ़ रहा है। हालांकि, यूके एमटीओ ने अभी तक इस जहाज के नाम का आधिकारिक खुलासा नहीं किया है और मामले की गहन जांच जारी है। फिलहाल इस जब्ती की जिम्मेदारी तत्काल किसी भी समूह या देश ने नहीं ली है, जिससे अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।
ईरान का रुख और कानूनी बचाव
ईरान ने इन समुद्री कार्रवाइयों के बीच अपने रुख को स्पष्ट किया है। ईरान के न्यायिक प्रवक्ता असगर जहांगीर ने सरकारी समाचार पत्र 'ईरान डेली' से बात करते हुए कहा कि ईरान के पास होर्मुज में अमेरिका से जुड़े तेल टैंकरों को जब्त करने का पूर्ण कानूनी और न्यायिक अधिकार है। उन्होंने तर्क दिया कि अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों का उल्लंघन किया है और समुद्री डकैती जैसी गतिविधियों में संलिप्त रहा है। आधिकारिक समाचार एजेंसी IRNA के अनुसार, ईरान ने पिछले सप्ताह 'ओशन कोई' (Ocean Koi) नामक एक टैंकर सहित कई जहाजों को जब्त किया था और ईरान का दावा है कि ये टैंकर उसके तेल निर्यात और राष्ट्रीय हितों को बाधित करने का प्रयास कर रहे थे। गौरतलब है कि अमेरिका ने फरवरी में 'ओशन कोई' पर प्रतिबंध लगाया था, क्योंकि इसे ईरानी तेल का परिवहन करने वाले एक 'गुप्त बेड़े' का हिस्सा माना गया था।
महत्वपूर्ण घटनाक्रम और मुख्य बिंदु
भू-राजनीतिक संदर्भ और ट्रंप की चीन यात्रा
यह पूरा घटनाक्रम उस समय हो रहा है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीन की यात्रा पर हैं और चीनी नेता शी जिनपिंग से मुलाकात कर रहे हैं। इन दोनों वैश्विक नेताओं के बीच होने वाली बातचीत में ईरान के साथ बढ़ते तनाव और युद्ध की संभावनाओं पर ध्यान केंद्रित होने की उम्मीद जताई गई है। इसी बीच, ईरानी अर्ध-सरकारी एजेंसियों ने बताया कि नए ईरानी प्रोटोकॉल के तहत चीनी जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की सुविधा दी गई है। यह निर्णय चीन के विदेश मंत्री और ईरान में बीजिंग के राजदूत के अनुरोध के बाद लिया गया। जैसे ही ट्रंप बुधवार शाम को चीन पहुंचे, चीनी जहाजों ने होर्मुज को पार करना शुरू कर दिया, जो इस क्षेत्र में बदलती कूटनीतिक समीकरणों की ओर इशारा करता है। भारत ने स्पष्ट किया है कि वह अपने नागरिकों और व्यापारिक हितों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और इन हमलों की निंदा करता है।
