अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और वैश्विक सुरक्षा को लेकर बड़ा दावा किया है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर एक पोस्ट के माध्यम से कहा कि उनके हस्तक्षेप और नीतियों के कारण दुनिया के कई हिस्सों में संभावित परमाणु युद्ध टल गए। उन्होंने विशेष रूप से भारत और पाकिस्तान, ईरान और इजरायल, तथा रूस और यूक्रेन के बीच तनावपूर्ण स्थितियों का उल्लेख किया। हालांकि, राष्ट्रपति ने इन दावों की पुष्टि के लिए कोई विशिष्ट विवरण या साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए हैं।
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव चरम पर है। उन्होंने अपने पहले कार्यकाल की उपलब्धियों को गिनाते हुए अमेरिकी सैन्य शक्ति के आधुनिकीकरण पर जोर दिया। ट्रंप ने न्यू स्टार्ट (New START) परमाणु हथियार नियंत्रण संधि की कड़ी आलोचना की और इसे अमेरिका के लिए एक 'खराब समझौता' करार दिया। उन्होंने तर्क दिया कि मौजूदा संधियां वर्तमान चुनौतियों का सामना करने में सक्षम नहीं हैं और एक नई, अधिक प्रभावी व्यवस्था की आवश्यकता है।
परमाणु युद्ध रोकने के दावों का विवरण
डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी पोस्ट में स्पष्ट रूप से कहा कि उन्होंने पाकिस्तान और भारत के बीच परमाणु संघर्ष को होने से रोका। दक्षिण एशिया के इन दो पड़ोसी देशों के बीच ऐतिहासिक रूप से परमाणु तनाव बना रहा है। इसके साथ ही, उन्होंने पश्चिम एशिया में ईरान और इजरायल के बीच के संघर्ष और यूरोप में जारी रूस-यूक्रेन युद्ध का भी जिक्र किया। ट्रंप के अनुसार, उनके कार्यकाल के दौरान की गई कार्रवाइयों ने इन देशों को परमाणु हथियारों के उपयोग से दूर रखा। विश्लेषकों का कहना है कि ट्रंप अक्सर अपनी 'पीस थ्रू स्ट्रेंथ' (शक्ति के माध्यम से शांति) की नीति को इन सफलताओं का श्रेय देते हैं।
अमेरिकी सैन्य शक्ति और स्पेस फोर्स का विस्तार
राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिकी सेना की वर्तमान स्थिति और भविष्य की योजनाओं पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका दुनिया का सबसे शक्तिशाली देश है और उन्होंने अपने पहले कार्यकाल में सेना को पूरी तरह से पुनर्गठित किया था। इसमें नए और मरम्मत किए गए परमाणु हथियारों का समावेश शामिल था। ट्रंप ने 'स्पेस फोर्स' के गठन को अपनी एक बड़ी उपलब्धि बताया और कहा कि वह अब सेना को ऐसे स्तर पर ले जा रहे हैं जो पहले कभी नहीं देखा गया। उन्होंने नए युद्धपोतों (Battleships) के निर्माण की भी बात की, जिन्हें उन्होंने दूसरे विश्व युद्ध के प्रसिद्ध जहाजों जैसे आयोवा और मिसौरी से 100 गुना अधिक शक्तिशाली बताया।
न्यू स्टार्ट संधि की आलोचना और नई मांग
परमाणु हथियारों के नियंत्रण के संदर्भ में, ट्रंप ने 'न्यू स्टार्ट' संधि पर निशाना साधा। उन्होंने इसे 'बुरी तरह से बातचीत की गई डील' बताया और आरोप लगाया कि इस संधि का उल्लंघन किया जा रहा है। ट्रंप ने सुझाव दिया कि इस पुरानी संधि को आगे बढ़ाने के बजाय, अमेरिकी परमाणु विशेषज्ञों को एक नई और आधुनिक संधि पर काम करना चाहिए। उनके अनुसार, भविष्य की सुरक्षा के लिए एक ऐसा समझौता आवश्यक है जो लंबे समय तक प्रभावी रह सके और जिसमें आधुनिक तकनीक और वर्तमान वैश्विक समीकरणों का ध्यान रखा गया हो।
विशेषज्ञों का विश्लेषण और कूटनीतिक निहितार्थ
राजनयिक विशेषज्ञों के अनुसार, ट्रंप के ये दावे उनकी 'अमेरिका फर्स्ट' नीति का हिस्सा हैं। विश्लेषकों का मानना है कि भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम करने में अमेरिका की भूमिका हमेशा से महत्वपूर्ण रही है, लेकिन परमाणु युद्ध रोकने का दावा एक बड़ा बयान है। अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का कहना है कि न्यू स्टार्ट संधि से हटने या उसमें बदलाव करने की मांग वैश्विक परमाणु निशस्त्रीकरण प्रयासों को प्रभावित कर सकती है। ट्रंप का यह रुख दर्शाता है कि वह आने वाले समय में रक्षा और परमाणु नीति में बड़े बदलावों के पक्षधर हैं।
निष्कर्ष के तौर पर, डोनाल्ड ट्रंप के इन बयानों ने वैश्विक सुरक्षा चर्चाओं को फिर से गरमा दिया है। जहां एक ओर वह अपनी पिछली सफलताओं का दावा कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर वह भविष्य के लिए एक अधिक आक्रामक और आधुनिक सैन्य ढांचे की वकालत कर रहे हैं। इन दावों का अंतरराष्ट्रीय संबंधों और आगामी रक्षा समझौतों पर क्या प्रभाव पड़ेगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।
