प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में देशवासियों से एक विशेष अपील की है कि वे डीजल और पेट्रोल की खपत को कम करने का प्रयास करें। उन्होंने सुझाव दिया है कि जहां भी संभव हो, वर्क फ्रॉम होम (घर से काम) को बढ़ावा दिया जाए और लोग सार्वजनिक परिवहन जैसे मेट्रो की सेवाओं का अधिक उपयोग करें और प्रधानमंत्री की यह अपील मुख्य रूप से मिडिल-ईस्ट (मध्य पूर्व) में चल रहे मौजूदा संकट और वैश्विक अस्थिरता के मद्देनजर की गई है। यदि देश के नागरिक प्रधानमंत्री के इस आह्वान पर अमल करते हुए ईंधन की खपत कम करते हैं और सरकारी एवं निजी संस्थान वर्क फ्रॉम होम को प्रोत्साहित करते हैं, तो इससे न केवल आम जनता की व्यक्तिगत बचत होगी, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी। ऊर्जा आयात में कमी आने से सीधे तौर पर डॉलर की बचत होगी, जो भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने में मदद करेगी। विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी राष्ट्र की आर्थिक शक्ति का मुख्य आधार होता है और भारत जैसे विशाल विकासशील देश के लिए इसका महत्व अत्यंत अधिक है और जब देश के पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा होती है, तो वह वैश्विक बाजार से कच्चा तेल, आधुनिक मशीनें, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, जीवन रक्षक दवाएं और उन्नत तकनीक आसानी से खरीद सकता है। विदेशी मुद्रा केवल डॉलर का संचय नहीं है, बल्कि यह देश की आर्थिक सुरक्षा का एक अभेद्य कवच है।
विदेशी मुद्रा का अर्थ और इसकी आवश्यकता
विदेशी मुद्रा का सरल अर्थ है दूसरे देशों की करेंसी, जैसे कि अमेरिकी डॉलर, यूरो, ब्रिटिश पाउंड और जापानी येन और जब भारत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापार करता है, तो अधिकांश भुगतान विदेशी मुद्रा में ही करने होते हैं। उदाहरण के लिए, यदि भारत को अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए कच्चा तेल खरीदना है, तो उसका भुगतान डॉलर में करना अनिवार्य होता है और इसी तरह, औद्योगिक विकास के लिए आवश्यक मशीनरी या इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के आयात के लिए भी विदेशी मुद्रा की आवश्यकता होती है। भारत एक बड़ा आयातक देश है जो अपनी जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा विदेशों से मंगवाता है और इसमें कच्चा तेल, गैस, सोना, सेमीकंडक्टर चिप्स और विभिन्न तकनीकी उत्पाद शामिल हैं। यदि देश के पास विदेशी मुद्रा की कमी हो जाए, तो इन वस्तुओं का आयात कठिन हो जाता है, जिससे घरेलू बाजार में महंगाई बढ़ सकती है और रुपये की कीमत गिर सकती है। इसलिए, विदेशी मुद्रा भंडार या 'फॉरेक्स रिजर्व' भारत की आर्थिक सेहत के लिए अनिवार्य है।
विदेशी मुद्रा भंडार के 5 सबसे बड़े फायदे
विदेशी मुद्रा के स्रोत और पीएम मोदी की अपील का उद्देश्य
भारत के पास विदेशी मुद्रा मुख्य रूप से निर्यात, विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI), अनिवासी भारतीयों (NRI) द्वारा भेजे गए धन, आईटी सेवाओं और पर्यटन के माध्यम से आती है। भारत की आईटी कंपनियां वैश्विक स्तर पर सेवाएं देकर डॉलर कमाती हैं, जबकि विदेशों में रहने वाले भारतीय अपने परिवारों को पैसा भेजकर भंडार बढ़ाने में योगदान देते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'लोकल के लिए वोकल' और 'आत्मनिर्भर भारत' जैसी अपीलों का सीधा उद्देश्य आयात पर निर्भरता कम करना और निर्यात बढ़ाना है। यदि नागरिक स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देते हैं, तो विदेशी मुद्रा की बचत होती है। पीएम मोदी का संदेश स्पष्ट है कि भारत को केवल एक उपभोक्ता देश के बजाय एक उत्पादक राष्ट्र बनना चाहिए। इससे देश का पैसा देश में ही रहेगा, रोजगार बढ़ेगा और भारत आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनेगा। अंततः, विदेशी मुद्रा का सीधा संबंध आम आदमी की जेब, उसकी नौकरी और देश के सुरक्षित भविष्य से है।
