भारत में AI और मशीन लर्निंग प्रोफेशनल्स की भारी कमी, रैंडस्टैड की रिपोर्ट में खुलासा

रैंडस्टैड डिजिटल की रिपोर्ट के अनुसार भारत में AI और मशीन लर्निंग विशेषज्ञों की भारी कमी है। AI सॉल्यूशंस लीड और ML इंजीनियर के 10% से अधिक पद खाली हैं। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा AI जॉब मार्केट होने के बावजूद टैलेंट की कमी से जूझ रहा है।

भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग जिस तेजी से बढ़ रहा है, उसने तकनीकी क्षेत्र में एक नई क्रांति ला दी है। हालांकि, इस प्रगति के साथ एक बड़ी चुनौती भी उभरकर सामने आई है। कंपनियों को AI और मशीन लर्निंग (ML) से जुड़े महत्वपूर्ण पदों के लिए योग्य और कुशल प्रोफेशनल्स नहीं मिल रहे हैं। मानव संसाधन (HR) कंसल्टिंग क्षेत्र की दिग्गज कंपनी रैंडस्टैड डिजिटल की हालिया रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है कि भारत में AI और मशीन लर्निंग प्रोफेशनल्स की भारी कमी बनी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, AI सॉल्यूशंस लीड और मशीन लर्निंग इंजीनियर जैसे प्रमुख पदों पर 10% से अधिक नौकरियां अभी भी खाली पड़ी हैं, जो उद्योग के लिए एक चिंता का विषय है।

भारत में खाली पदों के आंकड़े

2% पद अभी तक भरे नहीं जा सके हैं। रैंडस्टैड के विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी भी विशेष क्षेत्र में नौकरी के खाली पदों की दर 10% की सीमा को पार कर जाती है, तो उसे टैलेंट की गंभीर कमी माना जाता है। यह स्थिति दर्शाती है कि भारतीय बाजार में मांग और आपूर्ति के बीच एक बड़ा अंतर पैदा हो गया है। कंपनियां इन पदों को भरने के लिए उत्सुक हैं, लेकिन उन्हें ऐसे उम्मीदवार नहीं मिल रहे हैं जिनके पास इन जटिल तकनीकों पर काम करने का आवश्यक अनुभव और कौशल हो।

दुनियाभर में AI विशेषज्ञों की किल्लत

रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि AI विशेषज्ञों की यह कमी केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया के कई विकसित देश भी इसी समस्या से जूझ रहे हैं और अमेरिका में AI सॉल्यूशंस लीड के 27% पद और ब्रिटेन में 18% पद खाली हैं। 2% पदों पर भर्ती होना अभी बाकी है। 8% और जनरेटिव AI इंजीनियरों के 25% पद खाली पड़े हैं। इससे यह साफ होता है कि वैश्विक स्तर पर कंपनियां AI टैलेंट को खोजने और उन्हें अपने साथ जोड़ने के लिए कड़ा संघर्ष कर रही हैं।

AI नौकरियों का दूसरा सबसे बड़ा केंद्र बना भारत

भले ही टैलेंट की कमी हो, लेकिन भारत दुनिया में AI टेक्नोलॉजी से जुड़ी नौकरियों के लिए एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभरा है और रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर में निकलने वाली AI से जुड़ी लगभग आधी नौकरियां केवल अमेरिका और भारत में ही केंद्रित हैं। 5% AI जॉब ओपनिंग्स के साथ दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बाजार बन चुका है। रैंडस्टैड डिजिटल इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर मिलिंद शाह का कहना है कि भारत के पास प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, लेकिन जब बात एडवांस AI स्किल्स की आती है, तो प्रोफेशनल्स की संख्या जरूरत के मुकाबले काफी कम है। यही मुख्य कारण है कि कंपनियों को सही टैलेंट की तलाश में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

भर्ती प्रक्रिया में देरी और मांग में भारी उछाल

विशेषज्ञों की कमी का सीधा असर कंपनियों की भर्ती प्रक्रिया पर भी पड़ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, 2026 की पहली तिमाही में एक AI मैनेजर की भर्ती करने में औसतन 53 दिन का समय लगा, जबकि चार साल पहले यही काम केवल 25 दिनों में पूरा हो जाता था। यानी अब कंपनियों को सही उम्मीदवार ढूंढने में पहले से दोगुना समय लग रहा है और इसके अलावा, AI स्किल्स वाले डेवलपर्स की मांग में भी जबरदस्त उछाल देखा गया है। रिपोर्ट बताती है कि 2021 की तुलना में 2026 की शुरुआत तक भारत में AI-सक्षम डेवलपर्स की मांग 660% से ज्यादा बढ़ चुकी है। इसके विपरीत, पारंपरिक सॉफ्टवेयर डेवलपर्स की मांग में बढ़ोतरी काफी सीमित रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में यह मांग और बढ़ेगी, जिससे युवाओं के लिए इस क्षेत्र में करियर बनाने के बेहतरीन अवसर पैदा होंगे।