ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा तनाव अब एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है, जिससे पूरी दुनिया की चिंताएं बढ़ गई हैं। हालिया घटनाक्रम में रेडियोलॉजिकल हथियारों को लेकर एक नई और गंभीर चिंता सामने आई है, जिसने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में हलचल मचा दी है। ईरान की ओर से आधिकारिक तौर पर यह चेतावनी दी गई है कि यदि उस पर कोई बड़ा सैन्य हमला किया जाता है, तो वह अपनी रक्षा के लिए 'एनरिच्ड यूरेनियम' (Enriched Uranium) का उपयोग कर सकता है। तेहरान ने स्पष्ट किया है कि वह ऐसी स्थिति में ‘डर्टी बम’ जैसे घातक हथियारों का उपयोग करने से पीछे नहीं हटेगा। इस धमकी के बाद न केवल मध्य-पूर्व बल्कि वैश्विक स्तर पर सुरक्षा को लेकर तनाव की स्थिति पैदा हो गई है।
डर्टी बम का स्वरूप और रेडियोलॉजिकल प्रदूषण का खतरा
ईरान द्वारा दी गई इस धमकी के केंद्र में 'डर्टी बम' है, जिसे तकनीकी भाषा में रेडियोलॉजिकल डिस्पर्सल डिवाइस भी कहा जाता है। जानकारी के मुताबिक, एक डर्टी बम के निर्माण में पारंपरिक विस्फोटकों, जैसे कि टीएनटी (TNT), के साथ रेडियोधर्मी सामग्री यानी एनरिच्ड यूरेनियम को मिलाया जाता है। हालांकि, यह हथियार एक पारंपरिक परमाणु बम की तरह विशाल परमाणु विस्फोट या मशरूम क्लाउड पैदा नहीं करता और न ही यह उतना विनाशकारी होता है, लेकिन इसका प्रभाव बेहद घातक होता है। इसके फटने से एक बहुत बड़े भौगोलिक इलाके में रेडियोलॉजिकल प्रदूषण (Contamination) फैल जाता है। इस प्रदूषण का असर इतना गहरा होता है कि वह प्रभावित क्षेत्र दशकों तक इंसानी बसावट या रहने लायक नहीं बचता। यह न केवल तात्कालिक स्वास्थ्य संकट पैदा करता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी पर्यावरणीय खतरा बना रहता है।
IAEA की रिपोर्ट: ईरान के पास 60% एनरिच्ड यूरेनियम का भंडार
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की हालिया रिपोर्ट ने ईरान की इस धमकी को और अधिक गंभीर बना दिया है। IAEA के आंकड़ों के अनुसार, ईरान के पास वर्तमान में 60% एनरिच्ड यूरेनियम का एक विशाल भंडार मौजूद है। यह स्तर परमाणु हथियारों के निर्माण के लिए आवश्यक 90% एनरिचमेंट के बेहद करीब माना जाता है। आंकड़ों की गहराई में जाएं तो पता चलता है कि ईरान ने इस्फहान (Isfahan) की पहाड़ियों के नीचे अत्यंत सुरक्षित और अभेद्य सुरंगों का निर्माण किया है, जहां लगभग 440 किलो 60% एनरिच्ड यूरेनियम का स्टॉक रखा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इतने बड़े भंडार का उपयोग करके कई डर्टी बम तैयार किए जा सकते हैं, जो लंबे समय तक गंभीर स्वास्थ्य और पर्यावरणीय तबाही मचाने में सक्षम हैं।
अमेरिका की प्रतिक्रिया और सैन्य विकल्पों की तैयारी
ईरान की इस चेतावनी पर अमेरिका के ट्रंप प्रशासन ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। वाशिंगटन ने ईरान की इस धमकी को एक “डेस्परेट ब्लफ” यानी हताशा में दिया गया खोखला बयान करार दिया है। हालांकि, सार्वजनिक रूप से इसे नजरअंदाज करने के बावजूद, पर्दे के पीछे अमेरिकी रक्षा विभाग और सेना ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। अमेरिकी सेना अब उन सैन्य विकल्पों पर गंभीरता से विचार कर रही है जिनके जरिए ईरान के यूरेनियम स्टॉकपाइल को या तो पूरी तरह जब्त किया जा सके या उसे नष्ट कर दिया जाए। अमेरिका की यह सक्रियता दर्शाती है कि वह इस खतरे को हल्के में नहीं ले रहा है और किसी भी संभावित रेडियोलॉजिकल हमले को रोकने के लिए रणनीतिक योजनाएं बना रहा है।
ईरान के रक्षा तंत्र के चार घातक हथियार
ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे इस संघर्ष का स्वरूप अब पूरी तरह बदल चुका है और यह पारंपरिक युद्ध से कहीं आगे निकल गया है।
वर्तमान में ईरान और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष को समाप्त करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका है। स्थिति यह है कि सीजफायर की कोशिशें केवल कागजों तक ही सीमित रह गई हैं और इसे ‘लाइफ सपोर्ट’ पर माना जा रहा है और इस ‘परमाणु साये’ के बीच क्षेत्र में भारी तनाव व्याप्त है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस नाजुक मोड़ पर कोई भी छोटी सी गलती या गलतफहमी पूरे मध्य-पूर्व को एक ऐसे महायुद्ध की आग में झोंक सकती है, जिसके विनाशकारी परिणाम न केवल वर्तमान बल्कि आने वाली कई पीढ़ियों को भुगतने पड़ सकते हैं।
