ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने अमेरिका और इजरायल के साथ जारी तनाव के बीच एक कड़ा संदेश जारी किया है। इजरायल और अमेरिका के साथ सैन्य संघर्ष के एक महीने पूरे होने के अवसर पर राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि ईरान की नीति आक्रामक नहीं है, लेकिन अपनी संप्रभुता और संसाधनों की रक्षा के लिए वह किसी भी हद तक जा सकता है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी एक आधिकारिक बयान में पेजेश्कियन ने कहा कि ईरान ने कभी भी युद्ध की शुरुआत नहीं की है, लेकिन यदि उसके आर्थिक केंद्रों या बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया, तो इसका परिणाम गंभीर होगा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व में सुरक्षा स्थिति अत्यंत संवेदनशील बनी हुई है और विभिन्न मोर्चों पर सैन्य गतिविधियां तेज हो गई हैं।
मसूद पेजेश्कियन का आधिकारिक बयान और जवाबी कार्रवाई का संकल्प
राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने अपने संबोधन में ईरान की सैन्य नीति को रक्षात्मक करार दिया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि ईरान की ओर से पहले कोई हमला नहीं किया जाएगा, लेकिन इसे ईरान की कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए। राष्ट्रपति के अनुसार, यदि दुश्मन देश ईरान के ऊर्जा क्षेत्रों, आर्थिक केंद्रों या राष्ट्रीय बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करते हैं, तो ईरान की प्रतिक्रिया अत्यंत कठोर और निर्णायक होगी। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ईरान अपनी रक्षा क्षमताओं को पूरी तरह से सक्रिय रखने के लिए प्रतिबद्ध है और अधिकारियों के अनुसार, यह बयान हाल के हफ्तों में ईरान के खिलाफ की गई धमकियों और संभावित सैन्य कार्रवाइयों के जवाब में दिया गया है।
क्षेत्रीय देशों के लिए सुरक्षा संबंधी निर्देश और चेतावनी
ईरान के राष्ट्रपति ने अपने बयान में केवल अमेरिका और इजरायल को ही नहीं, बल्कि मध्य पूर्व के अन्य देशों को भी संबोधित किया। उन्होंने क्षेत्रीय देशों से अपील की कि वे अपनी भूमि का उपयोग ईरान के खिलाफ सैन्य अभियानों के लिए न होने दें। पेजेश्कियन ने तर्क दिया कि क्षेत्रीय विकास और सुरक्षा तभी संभव है जब पड़ोसी देश बाहरी शक्तियों को अपने क्षेत्र में युद्ध चलाने की अनुमति न दें। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि किसी देश की भूमि का उपयोग ईरान पर हमला करने के लिए किया जाता है, तो इससे पूरे क्षेत्र की स्थिरता खतरे में पड़ सकती है और यह संदेश विशेष रूप से उन देशों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है जहां विदेशी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं।
अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमलों की रिपोर्ट और प्रभाव
रिपोर्टों के अनुसार, 28 फरवरी को तेहरान पर हुए हमलों के बाद से ईरान और उसके समर्थित समूहों ने क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों पर दबाव बढ़ा दिया है। न्यूयॉर्क टाइम्स की एक हालिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया गया है कि मध्य पूर्व में स्थित अमेरिका के लगभग 13 सैन्य बेस ईरान और उसके सहयोगियों द्वारा किए गए मिसाइल और ड्रोन हमलों के कारण गंभीर रूप से प्रभावित हुए हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इन हमलों के बाद कई ठिकाने वर्तमान में परिचालन की स्थिति में नहीं हैं और ईरान लगातार सऊदी अरब, यूएई, बहरीन, ओमान और कतर जैसे देशों में स्थित रणनीतिक ठिकानों को अपनी निगरानी में रखे हुए है। इन हमलों ने क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति के लिए एक बड़ी चुनौती पेश की है।
तेहरान और वाशिंगटन के बीच बढ़ता सैन्य गतिरोध
पिछले एक महीने के दौरान ईरान और अमेरिका के बीच सैन्य गतिरोध में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। 28 फरवरी की घटना के बाद से दोनों पक्षों के बीच सीधे और परोक्ष संघर्ष की घटनाएं बढ़ी हैं। तेहरान का आरोप है कि अमेरिका और इजरायल क्षेत्र में अस्थिरता पैदा कर रहे हैं, जबकि वाशिंगटन का दावा है कि वह अपने हितों और सहयोगियों की रक्षा कर रहा है। सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान ने अपनी मिसाइल तकनीक और ड्रोन क्षमताओं का प्रदर्शन करके यह संदेश देने की कोशिश की है कि वह लंबी दूरी तक सटीक हमले करने में सक्षम है। इस गतिरोध ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों को पूरी तरह से बदल दिया है।
मध्य पूर्व में सुरक्षा और आर्थिक बुनियादी ढांचे की स्थिति
वर्तमान संघर्ष का प्रभाव केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आर्थिक और ऊर्जा बुनियादी ढांचे के लिए भी खतरा बन गया है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि उसके तेल और गैस क्षेत्र उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा के अभिन्न अंग हैं। राष्ट्रपति पेजेश्कियन के बयान से यह संकेत मिलता है कि ईरान किसी भी आर्थिक घेराबंदी या बुनियादी ढांचे पर हमले को युद्ध की घोषणा के रूप में देखेगा। क्षेत्र के अन्य देश भी इस तनाव के कारण अपनी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत कर रहे हैं। ऊर्जा बाजारों पर इस तनाव का सीधा असर देखा जा रहा है, क्योंकि मध्य पूर्व वैश्विक तेल आपूर्ति का एक प्रमुख केंद्र है और सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले समय में यह तनाव और अधिक जटिल हो सकता है यदि कूटनीतिक स्तर पर कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया।
We have said many times that Iran doesn't carry out preemptive attacks, but we will retaliate strongly if our infrastructure or economic centers are targeted.
— Masoud Pezeshkian (@drpezeshkian) March 28, 2026
To the countries of the region:
If you want development and security, don't let our enemies run the war from your lands.
