मारवाड़ की धरती जोधपुर की जानी-मानी स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ सोनल परिहार ने फ्रांस में आयोजित प्रतिष्ठित कान्स फिल्म फेस्टिवल के रेड कार्पेट पर अपनी शानदार उपस्थिति से पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। डॉ सोनल ने इस वैश्विक मंच पर राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को बेहद खूबसूरती और गर्व के साथ पेश किया। उनकी ड्रेसिंग थीम विशेष रूप से राजस्थान की पारंपरिक कला और आधुनिक ग्लोबल फैशन के अनूठे मिश्रण पर आधारित थी। चिकित्सा क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने वाली डॉ सोनल इससे पहले मिसेज इंडिया और कई अंतरराष्ट्रीय ब्यूटी कान्टेस्ट में भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुकी हैं। अब कान्स में भारत और राजस्थान का प्रतिनिधित्व कर उन्होंने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है।
तीन अलग-अलग लुक्स में दिखी राजस्थानी संस्कृति
कान्स के दौरान डॉ सोनल परिहार तीन अलग-अलग लुक्स में नजर आईं, जिनमें से प्रत्येक लुक में भारतीय संस्कृति और राजस्थानी शिल्पकला की गहरी झलक देखने को मिली।
- उनके पहले लुक में पारंपरिक भारतीय कढ़ाई फ्रेम वाली ड्रेस शामिल थी, जो भारत की बारीक कारीगरी को दर्शाती थी।
- उनके दूसरे लुक में बारीक हस्तकला के माध्यम से खिलते हुए बगीचों और बहती हुई नदियों के दृश्यों को उकेरा गया था, जो प्रकृति और कला के जुड़ाव को प्रदर्शित करता था।
- उनका तीसरा लुक पूरी तरह से राजस्थानी था, जिसमें डंका वर्क कला को आधुनिक फैशन के साथ जोड़ा गया था।
400 वर्ष पुरानी डंका वर्क कला का वैश्विक प्रदर्शन
डॉ सोनल का तीसरा लुक सबसे अधिक चर्चा में रहा, जो पूरी तरह से राजस्थानी परंपरा को समर्पित था। इसमें उन्होंने 400 वर्ष पुरानी दुर्लभ डंका वर्क कला को आधुनिक फैशन के साथ जोड़कर पेश किया। पारंपरिक राजस्थानी साड़ी और आभूषणों में सजी सोनल ने इस प्राचीन कला को वैश्विक पटल पर जीवंत कर दिया। इस विशेष परिधान को डिजाइनर नीतू सिंह ने तैयार किया था और इस कलाकृति में सोने की परत चढ़ी चांदी, तांबा और जर्मन सिल्वर का अत्यंत सुंदर और कलात्मक उपयोग किया गया था। इतनी पुरानी और दुर्लभ कला को कान्स जैसे बड़े मंच पर लाना राजस्थान के हस्तशिल्प के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत
मारवाड़ से निकलकर कान्स के रेड कार्पेट तक का सफर तय करने वाली डॉ सोनल परिहार आज जोधपुर की एक नई ग्लोबल पहचान बन चुकी हैं और अपनी इस उपलब्धि पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि यह सफर केवल उनकी व्यक्तिगत सफलता नहीं है, बल्कि उन सभी महिलाओं के लिए एक प्रेरणा है जो अपनी प्रोफेशनल जिंदगी की जिम्मेदारियों के साथ-साथ अपने सपनों को भी पूरा करने का साहस रखती हैं। एक डॉक्टर के रूप में अपनी सेवाएं देने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राजस्थान की संस्कृति को पहचान दिलाकर उन्होंने यह साबित कर दिया है कि दृढ़ संकल्प से किसी भी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। उनके इस प्रयास ने शहर को एक नई अंतरराष्ट्रीय पहचान दी है।
