लैंड फॉर जॉब केस: लालू यादव की याचिका खारिज, व्यक्तिगत पेशी से मिली राहत

सुप्रीम कोर्ट ने लैंड फॉर जॉब मामले में लालू प्रसाद यादव की FIR रद्द करने की याचिका खारिज कर दी है। हालांकि, कोर्ट ने उनकी सेहत और उम्र को देखते हुए उन्हें ट्रायल के दौरान व्यक्तिगत पेशी से छूट दे दी है। अब उनकी जगह वकील पेश हो सकेंगे।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला और कानूनी कार्यवाही

उच्चतम न्यायालय ने लैंड फॉर जॉब मामले में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रमुख लालू प्रसाद यादव को राहत देने से इनकार कर दिया है। न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने सीबीआई द्वारा दर्ज प्राथमिकी (FIR) और आरोप पत्र को रद्द करने की याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस मामले में कानूनी प्रक्रिया और ट्रायल अपने निर्धारित क्रम में जारी रहेगा।

व्यक्तिगत पेशी से मिली विशेष छूट

भले ही अदालत ने मामले को रद्द नहीं किया, लेकिन लालू यादव की उम्र और उनके स्वास्थ्य की स्थिति को देखते हुए उन्हें एक महत्वपूर्ण राहत प्रदान की है। कोर्ट ने आदेश दिया कि ट्रायल के दौरान लालू यादव को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने की आवश्यकता नहीं होगी। उनके स्थान पर उनके कानूनी प्रतिनिधि या वकील कार्यवाही में शामिल हो सकते हैं। यह निर्णय उनके हालिया किडनी ट्रांसप्लांट और अन्य स्वास्थ्य जटिलताओं को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

सीबीआई और बचाव पक्ष की दलीलें

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने लालू यादव का पक्ष रखते हुए तर्क दिया कि 25 फरवरी 2025 को दायर की गई अंतिम चार्जशीट में कानूनी प्रक्रियाओं का उल्लंघन किया गया है। उन्होंने इसे राजनीति से प्रेरित बताते हुए रद्द करने की मांग की। दूसरी ओर, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) एसवी राजू ने सीबीआई का पक्ष लेते हुए कहा कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17A इस मामले में लागू नहीं होती, क्योंकि आरोपी ने अपने आधिकारिक पद के बजाय निजी प्रभाव का उपयोग किया था।

क्या है लैंड फॉर जॉब घोटाला?

यह मामला उस समय का है जब लालू प्रसाद यादव 2004 से 2009 के बीच केंद्रीय रेल मंत्री थे। सीबीआई के आरोपों के अनुसार, रेलवे के ग्रुप-डी पदों पर नियुक्तियों के बदले में लालू यादव के परिवार के सदस्यों और करीबियों को बाजार दर से काफी कम कीमतों पर जमीनें हस्तांतरित की गई थीं और जांच एजेंसी का दावा है कि कई मामलों में जमीनें उपहार के रूप में भी दी गई थीं।

जांच की वर्तमान स्थिति

सीबीआई इस मामले में अब तक कई पूरक आरोप पत्र (Supplementary Chargesheets) दाखिल कर चुकी है। जांच एजेंसी ने अदालत को सूचित किया है कि उनके पास पर्याप्त साक्ष्य हैं जो नियुक्तियों और भूमि सौदों के बीच सीधा संबंध स्थापित करते हैं। सुप्रीम कोर्ट के ताजा रुख के बाद अब निचली अदालत में इस मामले का ट्रायल बिना किसी रोक के आगे बढ़ेगा।