महाराष्ट्र में बत्तीस हजार पेड़ों की कटाई पर विवाद, सीएम फडणवीस का बड़ा बयान

महाराष्ट्र के रायगढ़ में बिजली प्रोजेक्ट के लिए बत्तीस हजार से अधिक पेड़ों की कटाई पर सियासी घमासान छिड़ गया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इसे स्वच्छ ऊर्जा के लिए आवश्यक बताया है और विपक्ष के आरोपों को खारिज किया है।

महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में एक बड़े बिजली प्रोजेक्ट को लेकर सियासी घमासान और विवाद खड़ा हो गया है। इस विवाद की मुख्य वजह बत्तीस हजार से ज्यादा पेड़ों की कटाई की योजना है, जिसके खिलाफ विपक्षी दलों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस पूरे मामले में सरकार का पक्ष रखते हुए विपक्ष के तमाम आरोपों को खारिज किया है और प्रोजेक्ट को पर्यावरण के अनुकूल तथा स्वच्छ ऊर्जा के लिए बेहद जरूरी बताया है। यह प्रोजेक्ट रायगढ़ जिले के कर्जत के पास जंगल क्षेत्र में प्रस्तावित है, जो पुणे और रायगढ़ के बीच स्थित है। प्रस्तावित प्रोजेक्ट स्थल भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग से लगभग बीस किलोमीटर और भीमाशंकर जंगल से करीब सोलह किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस प्रोजेक्ट के लिए टोरेंट कंपनी को वन विभाग की दो सौ तिरेपन एकड़ जमीन आवंटित की गई है, जिस पर तीन हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन करने का लक्ष्य रखा गया है।

पेड़ों की कटाई और राजनीतिक विरोध

टोरेंट कंपनी के इस तीन हजार मेगावाट क्षमता वाले बिजली प्रोजेक्ट के लिए दो सौ तिरेपन एकड़ जमीन पर हजारों पेड़ों को काटे जाने की तैयारी है। जब यह बात सामने आई कि इस प्रोजेक्ट के निर्माण के लिए बत्तीस हजार से अधिक पेड़ों को काटा जाएगा, तो राजनीतिक गलियारों में विरोध के सुर गूंजने लगे। कांग्रेस, उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना, शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने इस कदम के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया है। विपक्षी दलों का कहना है कि वे किसी भी विकास कार्य के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विकास के नाम पर हरे-भरे जंगलों को नेस्तनाबूद करना और इतने बड़े पैमाने पर पेड़ों की बलि देना किसी भी कीमत पर उचित नहीं है। कांग्रेस पार्टी ने राज्य सरकार से मांग की है कि यदि यह प्रोजेक्ट बनाना अनिवार्य ही है, तो इसके लिए किसी अन्य ऐसे स्थान का चयन किया जाना चाहिए जहां वनों और पेड़ों को कम से कम नुकसान पहुंचे और इसके अलावा, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने इस प्रोजेक्ट के खिलाफ सड़क पर उतरकर आंदोलन करने की कड़ी चेतावनी दी है।

एमएनएस प्रमुख राज ठाकरे का प्रस्तावित दौरा और शिवसेना का रुख

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के नेता संदीप देशपांडे ने भी पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले इस तरह के फैसलों का कड़ा विरोध करते हुए लोगों से इस मुद्दे पर अपनी आवाज बुलंद करने की अपील की है। एमएनएस प्रमुख राज ठाकरे आगामी अट्ठाइस अक्टूबर को खुद इस प्रोजेक्ट साइट का दौरा करने वाले हैं। इस दौरे के दौरान वह स्थानीय ग्रामीणों से प्रत्यक्ष मुलाकात करेंगे और एक जनसभा को भी संबोधित करेंगे। दूसरी ओर, उद्धव ठाकरे की शिवसेना ने भी इस प्रोजेक्ट को लेकर सरकार को आड़े हाथों लिया है। विपक्षी दलों का संयुक्त रूप से यह तीखा सवाल है कि जब देश और दुनिया में पर्यावरण संरक्षण, हरियाली बढ़ाने और पेड़ लगाने पर जोर दिया जा रहा है, तो फिर इस तरह से हजारों पेड़ों की कटाई की अनुमति क्यों दी जा रही है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि सरकार को इस प्रोजेक्ट की वास्तविक जरूरत और इसके पर्यावरण पर पड़ने वाले दूरगामी दुष्प्रभावों की गहन समीक्षा करनी चाहिए, तथा स्थानीय निवासियों की चिंताओं को भी पूरी गंभीरता से ध्यान में रखा जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की सफाई और तर्क

विपक्ष के इन सभी तीखे हमलों और आरोपों पर पलटवार करते हुए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्थिति स्पष्ट की और विपक्ष पर जनता के बीच गलत और भ्रामक जानकारी फैलाने का गंभीर आरोप लगाया। मुख्यमंत्री का दृढ़ता से यह कहना है कि यह प्रोजेक्ट पर्यावरण को किसी भी प्रकार का नुकसान पहुंचाने के लिए नहीं, बल्कि भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए तैयार किया जा रहा है। सरकार के आधिकारिक दावों के अनुसार, इस प्रोजेक्ट से तीन हजार मेगावाट बिजली का बंपर उत्पादन होगा, जिससे राज्य के उद्योगों और आम नागरिकों को निर्बाध बिजली उपलब्ध कराने में बड़ी मदद मिलेगी और साथ ही बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। मुख्यमंत्री फडणवीस ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि इतनी ही मात्रा में बिजली का उत्पादन पारंपरिक कोयले के माध्यम से किया जाए, तो उससे होने वाला पर्यावरण प्रदूषण बेहद खतरनाक स्तर पर पहुंच जाएगा। सरकार का यह मुख्य तर्क है कि पंप्ड हाइड्रो स्टोरेज प्रोजेक्ट के माध्यम से न केवल राज्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा किया जा सकता है, बल्कि प्रदूषण को नियंत्रित करने में भी उल्लेखनीय सहायता मिल सकती है।

मुख्यमंत्री द्वारा गिनाए गए प्रोजेक्ट के तीन बड़े फायदे

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने प्रेस के सामने तीन प्रमुख बिंदुओं के माध्यम से इस प्रोजेक्ट के दूरगामी और महत्वपूर्ण फायदों को विस्तार से समझाया है। उन्होंने सबसे पहले इस बात पर जोर दिया कि यह तीन हजार मेगावाट बिजली, जो हमें पूरी तरह से क्लीन एनर्जी के रूप में प्राप्त हो रही है, यदि यह हमें इस प्रोजेक्ट से नहीं मिली, तो फिर हमें थर्मल पावर यानी कोयले से बनने वाली बिजली का सहारा लेना पड़ेगा और अब यदि हम तीन हजार मेगावाट थर्मल पावर से पैदा होने वाले प्रदूषण की कल्पना करें, तो उस प्रदूषण के स्तर को पूरी तरह से कम करने के लिए सत्ताइस करोड़ पेड़ों की आवश्यकता पड़ती। पूरी तरह विकसित सत्ताइस करोड़ पेड़ लगाने पड़ेंगे, यदि हमें उस भारी प्रदूषण के स्तर को कम करना है। यानी सीधे शब्दों में कहें तो, सत्ताजित करोड़ पेड़ जितना प्रदूषण कम करेंगे, उतनी ही शुद्ध क्लीन एनर्जी हम इस प्रोजेक्ट के जरिए तैयार करने जा रहे हैं।

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री ने दूसरी महत्वपूर्ण बात यह बताई कि यदि हम तीन हजार मेगावाट थर्मल पावर से होने वाले हानिकारक उत्सर्जन की बात करें, तो उससे उतना खतरनाक उत्सर्जन होता है, जितना कि सड़क पर एक साथ चालीस लाख गाड़ियों के चलने से पैदा होता है और इस प्रोजेक्ट के माध्यम से उस विशाल उत्सर्जन को सफलतापूर्वक कम किया जा रहा है। तीसरी और आखिरी बात यह है कि यदि हम यही आवश्यक बिजली पारंपरिक थर्मल पावर प्लांट से प्राप्त करते हैं, तो उसमें भारी मात्रा में पानी की खपत होती, जो कि लगभग उन्नीस अरब घनफुट पानी होता है। यह इतना अधिक पानी है, जो लगभग चार लाख लोगों की पूरे सालभर की पानी की जरूरत को आसानी से पूरा कर सकता है। यह बेशकीमती पानी हमें हर साल बिजली उत्पादन के लिए लगातार इस्तेमाल करना पड़ता, जो कि इस नए प्रोजेक्ट के संचालन से पूरी तरह से बच जाएगा।

तीन गुना जमीन पर तीन गुना पेड़ लगाने का वादा

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए यह भी स्पष्ट किया कि कुल मिलाकर देखा जाए तो यह प्रोजेक्ट पूरी तरह से पर्यावरण-अनुकूल और राज्य के हित में है। यह प्रस्तावित स्थल भीमाशंकर के जंगल से सोलह किलोमीटर दूर स्थित है और भीमाशंकर मंदिर से इसकी दूरी बीस किलोमीटर है। इसके अलावा, इस प्रोजेक्ट में होने वाला पूरा निवेश महाराष्ट्र के भीतर ही हो रहा है, इससे राज्य में ही रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं, और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस उत्पादित ऊर्जा पर सबसे पहला अधिकार महाराष्ट्र की जनता का ही होगा। इसलिए समग्र रूप से महाराष्ट्र राज्य के लिए यह प्रोजेक्ट अत्यंत आवश्यक और सामयिक है। आज के समय में हमारे राज्य में बड़े पैमाने पर उद्योगों का विस्तार हो रहा है और उनके सुचारू संचालन के लिए हमें भविष्य में भारी मात्रा में ऊर्जा की आवश्यकता पड़ने वाली है। इसके लिए हमें पूरी तरह से क्लीन एनर्जी चाहिए, यानी ऐसी ऊर्जा जिससे किसी भी प्रकार का प्रदूषण न फैले। लेकिन इसके बावजूद विपक्ष जानबूझकर एक झूठा नैरेटिव तैयार करके इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट का लगातार विरोध कर रहा है।

मुख्यमंत्री ने अंत में यह भी महत्वपूर्ण घोषणा की है कि टोरेंट कंपनी जितनी जमीन का प्रत्यक्ष इस्तेमाल करेगी, उसके एवज में सरकार को तीन गुना जमीन उपलब्ध कराई जाएगी और उस पर नियमों के अनुसार तीन गुना पेड़ लगाए जाएंगे। सरकार के आधिकारिक आंकड़ों और दावों के मुताबिक, इसके तहत लगभग नब्बे हजार नए पेड़ लगाए जाने की व्यापक योजना तैयार की गई है। हालांकि, इतने बड़े पैमाने पर नए पेड़ लगाने और मौजूदा प्राकृतिक जंगल को संरक्षित करने के दावों के बीच अब भी कई सवाल उठाए जा रहे हैं। रायगढ़ के इस बहुचर्चित प्रोजेक्ट को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति में घमासान और गर्माहट लगातार बढ़ती जा रही है। सरकार इसे स्वच्छ ऊर्जा और भविष्य के विकास के लिए अपरिहार्य बता रही है, जबकि विपक्ष बत्तीस हजार से अधिक पेड़ों की अंधाधुंध कटाई के खिलाफ पूरी ताकत से डटा हुआ है। आगामी अट्ठाइस अक्टूबर को राज ठाकरे के प्रस्तावित दौरे के बाद इस ज्वलंत मुद्दे पर सियासी हलचल और अधिक तीव्र होने की पूरी संभावना है। अब संपूर्ण राजनीतिक गलियारों और आम जनता की निगाहें इस बात पर टिकी हुई हैं कि राज्य सरकार विकास और पर्यावरण के बीच एक सुदृढ़ और न्यायसंगत संतुलन स्थापित करने के लिए आगे क्या ठोस कदम उठाती है।