केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे का निरीक्षण करने के दौरान राजस्थान के लिए घोषणाओं का पिटारा खोल दिया है। इस यात्रा के दौरान उन्होंने एलिवेटेड रोड और एक्सप्रेसवे सहित कई महत्वपूर्ण विकास कार्यों को मंजूरी दी। सबसे प्रमुख घोषणाओं में से एक कोटा से इटावा (उत्तर प्रदेश) तक बनने वाले चंबल एक्सप्रेसवे का नाम बदलकर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर अटल एक्सप्रेसवे करना और इसके काम को फिर से शुरू करना है। यह एक्सप्रेसवे राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश तीनों राज्यों के विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है और इससे अंतरराज्यीय व्यापार को नई दिशा मिलेगी।
राजस्थान के विकास के लिए केंद्र की प्रतिबद्धता
केंद्रीय मंत्री ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को आश्वस्त करते हुए कहा कि राजस्थान के विकास के लिए राज्य सरकार की हर मांग को पूरा करने के लिए केंद्र सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। " यह बयान राजस्थान के बुनियादी ढांचे के विकास के प्रति केंद्र सरकार की गंभीरता और भविष्य की योजनाओं को दर्शाता है। गडकरी की इस घोषणा से राज्य में सड़क तंत्र को एक नई मजबूती मिलने की उम्मीद है, जिससे दूर-दराज के क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ा जा सकेगा।
अटल एक्सप्रेसवे परियोजना और उसकी लागत
अटल एक्सप्रेसवे न केवल राजस्थान के हाड़ौती क्षेत्र के लिए बल्कि मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के लिए भी एक गेम-चेंजर साबित होगा। इस विशाल परियोजना के लिए लगभग 15000 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित किया गया है। चूंकि यह एक्सप्रेसवे अटल बिहारी वाजपेयी की जन्मभूमि ग्वालियर से होकर गुजरता है, इसलिए इसका नाम उनके नाम पर रखने का निर्णय लिया गया। हालांकि यह परियोजना पहले से ही प्रस्तावित थी, लेकिन कुछ तकनीकी बाधाओं के कारण इसका निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया था। अब इन बाधाओं को दूर कर काम फिर से शुरू किया जा रहा है और इस एक्सप्रेसवे के माध्यम से झालावाड़ और भवानीमंडी को भी जोड़ा जाएगा, जिससे इन क्षेत्रों के किसानों और व्यापारियों को बड़े बाजारों तक पहुंच मिलेगी।
कोटा और आसपास के क्षेत्रों के लिए नई सड़कें
नितिन गडकरी ने कोटा-दिल्ली-मुंबई-बारां-भानपुरा के बीच 51 किलोमीटर लंबी फोर-लेन सड़क विकसित करने की भी घोषणा की है। उन्होंने बताया कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने क्षेत्र के विकास से जुड़े जो भी प्रस्ताव रखे थे, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया गया है। इसी कड़ी में दरा क्षेत्र में 10 किलोमीटर लंबी एलिवेटेड रोड के निर्माण को मंजूरी दी गई है। इस एलिवेटेड रोड की निर्माण लागत लगभग 551 करोड़ रुपये होगी और इसका काम अगले तीन महीनों के भीतर शुरू कर दिया जाएगा। इससे क्षेत्र में यातायात सुगम होगा और दुर्घटनाओं में कमी आएगी।
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे और भविष्य की राह
कोटा के गोपालपुरा में एक जनसभा को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने क्षेत्र के साथ अपनी पुरानी यादें साझा कीं और विकास की गति पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे का निर्माण लगभग 110000 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में दिल्ली से मुंबई के बीच का सफर बेहद आसान हो जाएगा और यात्री लगभग 12 घंटे में दिल्ली से मुंबई के नरीमन पॉइंट तक पहुंच सकेंगे। जहां भी सड़क सुधार की आवश्यकता है, वहां विभाग द्वारा निरंतर कार्य किया जा रहा है ताकि यात्रियों को विश्वस्तरीय अनुभव मिल सके।
औद्योगिक और पर्यटन क्षेत्र में आएगा उछाल
गडकरी ने जोर देकर कहा कि इन परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य केवल सड़कों का जाल बिछाना नहीं है, बल्कि पूरे क्षेत्र का सर्वांगीण आर्थिक विकास करना है। इन एक्सप्रेसवे के निर्माण से व्यापार को गति मिलेगी, नए उद्योगों की स्थापना होगी और पर्यटन के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। उन्होंने उल्लेख किया कि वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास का जो संकल्प लिया था, सरकार उसी दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है। आधुनिक सड़कों से न केवल समय की बचत होगी बल्कि ईंधन की खपत में भी कमी आएगी, जो देश की अर्थव्यवस्था के लिए लाभकारी होगा।
