जयपाल मर्डर केस / चौथे दिन भी नहीं हुआ पोस्टमार्टम, सांसद हनुमान बेनीवाल ने आज बुलाई बड़ी सभा

Zoom News : May 18, 2022, 08:19 AM
नागौर। नागौर की नावां सिटी में नमक कारोबारी जयपाल पूनिया हत्याकांड (Jaipal Poonia Murder Case) में बना हुआ गतिरोध आज चौथे मंगलवार को भी खत्म नहीं हुआ है। जयपाल की शनिवार को दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उसके बाद से अभी तक उसका शव मोर्चरी में रखा हुआ है। जयपाल के परिजन और उसके समर्थक अपनी मांगों को लेकर अड़े हुये हैं। वहीं नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल (Nagaur MP Hanuman Beniwal) ने इस मामले को लेकर आज भीड़ जुटाने का आह्वान किया है। मांगे नहीं माने के विरोध में आज बड़ी सभा का आयोजन किया जायेगा। दूसरी तरफ बीजेपी के 79 वर्षीय पूर्व विधायक हरीश कुमावत अनशन पर बैठ गये हैं। उन्होंने ऐलान किया है कि मांगें नहीं मानें जाने तक वे अन्न ग्रहण नहीं करेंगे।

नमक करोबारी एवं नावां थाने के हिस्ट्रीशीटर रहे जयपाल पूनिया की हत्या का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। इस मामले को लेकर सियासत भी लगातार गरमाती जा रही है। जयपाल की हत्या के बाद उसकी पत्नी ने नावां विधायक एवं राजस्थान सरकार के मुख्य उप सचेतक महेन्द्र चौधरी समेत आठ लोगों के खिलाफ हत्या का षड़यंत्र रचने और हत्या का आरोप लगाते हुये मामला दर्ज करा रखा है।

जयपाल के परिजनों की ये हैं तीन प्रमुख मांगें

जयपाल के परिजनों और समर्थकों की मांग है कि केस की सीबीआई से जांच कराई जाये। मृतक के आश्रित को सरकारी नौकरी दी जाये। मृतक के परिवार को 50 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाये। परिजन और समर्थक अपनी मांगों पर अड़े हुये हैं। उनका कहना है कि मांगें पूरी नहीं होने तक वे शव को नहीं उठायेंगे। उन्होंने अपनी मांगों को लेकर नावां में धरना दे रखा है। इसके चलते चौथे दिन भी जयपाल के शव का पोस्टमार्टम नहीं हो पाया है। जयपाल का शव नावां सिटी के सरकारी अस्पताल की मोर्चरी में रखा हुआ है।

धरना स्थल पर भीड़ लगातार बढ़ती जा रही है

इस बीच धरना स्थल पर लगातार भीड़ बढ़ती जा रही है। जयपाल बीजेपी का स्थानीय नेता भी था। लिहाजा बीजेपी के कई नेता और कार्यकर्ता भी वहां मौजूद हैं। आरएलपी के नेता और कार्यकर्ता भी वहां डटे हैं। बीजेपी के पूर्व विधायक हरिश कुमावत परिजनों की मांगों के समर्थन में सोमवार रात को अनशन पर बैठ गये। हरीश कुमावत चार बार विधायक और 9 बार नागौर बीजेपी के जिलाध्यक्ष रह चुके हैं। इससे अब पुलिस प्रशासन की परेशानियां और बढ़ गई हैं।

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