डोटासरा का दावा: राजस्थान निकाय चुनाव में भाजपा का वोट शेयर 50 से गिरकर 35 प्रतिशत हुआ

राजस्थान पीसीसी अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने निकाय चुनाव परिणामों को भाजपा सरकार के खिलाफ जनादेश बताया है। उन्होंने कहा कि भाजपा का वोट शेयर भारी गिरावट के साथ 35.35 प्रतिशत पर आ गया है, जबकि अलवर में प्रशासन के दुरुपयोग के आरोप लगे हैं।

राजस्थान में नगरीय निकाय चुनाव के परिणाम आने के बाद प्रदेश की राजनीति में जुबानी जंग तेज हो गई है। जहां एक ओर भारतीय जनता पार्टी इन परिणामों को अपनी सरकार के ढाई साल के कार्यकाल की सफलता बता रही है, वहीं कांग्रेस ने इसे भाजपा की नैतिक हार करार दिया है और राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने जयपुर में मीडिया से मुखातिब होते हुए कहा कि प्रदेश की जनता ने भजनलाल सरकार को आईना दिखा दिया है। सोमवार शाम प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में डोटासरा ने कहा कि आमतौर पर स्थानीय निकाय चुनावों में सत्ताधारी दल को बढ़त मिलती है, लेकिन इस बार राजस्थान में यह परंपरा पूरी तरह उलट गई है और जनता ने सरकार के खिलाफ मतदान किया है।

वोट शेयर में भारी गिरावट का दावा

पीसीसी अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि प्रदेश भर के 10000 से अधिक वार्डों में भाजपा का वोट शेयर 35 दशमलव 35 प्रतिशत रहा है, जबकि कांग्रेस का वोट शेयर 34 दशमलव 35 प्रतिशत दर्ज किया गया है। दोनों दलों के बीच अब केवल 1 प्रतिशत का अंतर रह गया है। डोटासरा ने इसे भाजपा के लिए एक बड़ा राजनीतिक संकेत बताया। उन्होंने तुलना करते हुए कहा कि 2014 में जब वसुंधरा राजे की सरकार थी, तब भाजपा और कांग्रेस के वोट प्रतिशत में 8 दशमलव 12 प्रतिशत का बड़ा अंतर था। पिछली कांग्रेस सरकार के समय कांग्रेस लगभग 2 दशमलव 2 प्रतिशत आगे थी। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव में भाजपा का वोट शेयर 41 दशमलव 7 प्रतिशत और लोकसभा चुनाव में 50 दशमलव 14 प्रतिशत था, जो अब गिरकर 35 दशमलव 35 प्रतिशत रह गया है।

परिसीमन और मतगणना में धांधली के आरोप

डोटासरा ने चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए परिसीमन में गड़बड़ी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कई निकायों में वार्डों की जनसंख्या और सीमाओं को इस तरह बदला गया कि उसका सीधा फायदा भाजपा को मिले। डोटासरा का दावा है कि यदि परिसीमन निष्पक्ष होता तो कांग्रेस भाजपा से 1000 वार्ड अधिक जीतती। उन्होंने यह भी कहा कि केवल वार्डों की संख्या से जीत का आकलन करना गलत है क्योंकि कई जगह कांग्रेस का वोट शेयर ज्यादा होने के बावजूद सीटों का गणित भाजपा के पक्ष में बैठाया गया। इसके अलावा, उन्होंने मतगणना प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि कांग्रेस ने 1316 वार्डों में रिकाउंटिंग की मांग की थी, जिसे चुनाव आयोग ने अनसुना कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि कई जगह जीत रहे कांग्रेस प्रत्याशियों के परिणाम रोके गए।

आरक्षित वार्डों में कांग्रेस का प्रदर्शन और मुख्यमंत्री पर तंज

कांग्रेस अध्यक्ष ने दावा किया कि अनुसूचित जाति और जनजाति के वार्डों में कांग्रेस ने बड़ी बढ़त हासिल की है। आंकड़ों के अनुसार, एससी और एसटी वार्डों में कांग्रेस ने 542 और भाजपा ने 350 वार्ड जीते हैं। एससी महिला वर्ग में कांग्रेस ने 261 और भाजपा ने 186 वार्ड जीते, जबकि एसटी वर्ग में कांग्रेस को 53 और भाजपा को 39 वार्ड मिले। डोटासरा ने कहा कि दलित वर्ग में भाजपा के प्रति भारी रोष है, विशेषकर राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के अपमान के बाद। उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पर तंज कसते हुए कहा कि जयपुर के जिन तीन वार्डों में मुख्यमंत्री ने रोड शो किया था, वहां भाजपा को हार का सामना करना पड़ा और वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के जिले झालावाड़ की 8 में से 5 निकायों में भाजपा बहुमत से दूर रही है।

अलवर में लोकतंत्र के अपमान का आरोप और जूली का हमला

दूसरी ओर, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने अलवर में गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्री भूपेन्द्र यादव और राज्य मंत्री संजय शर्मा के इशारे पर पुलिस और प्रशासन भाजपा के एजेंट के रूप में काम कर रहे हैं और जूली ने आरोप लगाया कि निर्वाचित पार्षदों को पुलिस द्वारा जबरन उठाया जा रहा है। उन्होंने मालाखेड़ा और नौगावां थाना प्रभारियों पर एक महिला प्रत्याशी को जबरन गाड़ी में बैठाने का आरोप लगाया और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। जूली ने कहा कि भाजपा बहुमत न होने के कारण बौखला गई है और सत्ता के दम पर बोर्ड बनाने की कोशिश कर रही है। इस मामले में अलवर एसपी सुधीर चौधरी ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष की मौखिक शिकायतों पर जांच शुरू कर दी गई है और लिखित शिकायत मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।