राम मंदिर चंदा चोरी: 14 कोसी मार्ग पर बंटते थे पैसे, अविनाश का बड़ा खुलासा

अयोध्या के राम मंदिर चंदा चोरी मामले में मास्टरमाइंड अविनाश शुक्ला ने बड़ा खुलासा किया है। चोरी के पैसों का बंटवारा 14 कोसी परिक्रमा मार्ग के पास होता था। जांच में टिन्नू यादव के रसूख और वीआईपी दर्शन के नाम पर चल रही अवैध वसूली का भी पर्दाफाश हुआ है।

अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चंदा चोरी के मामले की जांच जैसे-जैसे गहराई से आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे बेहद हैरान करने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। इस मामले में पुलिस की जांच में एक बड़ा खुलासा हुआ है कि मंदिर से चोरी किए गए पैसों का बंटवारा 14 कोसी परिक्रमा मार्ग के पास एक गुप्त स्थान पर किया जाता था। इस राज से पर्दा तब उठा जब पुलिस ने मामले के मास्टरमाइंड अविनाश शुक्ला को रिमांड पर लिया और उससे कड़ी पूछताछ की। अविनाश शुक्ला ने स्वयं पुलिस को उस स्थान पर ले जाकर शिनाख्त कराई जहां चोरी की रकम का हिस्सा तय किया जाता था।

बंटवारे वाली जगह से बरामदगी

पुलिस की जांच में यह बात पुख्ता हुई है कि चोरी की वारदात को अंजाम देने के बाद गैंग के सदस्य 14 कोसी परिक्रमा मार्ग के पास इकट्ठा होते थे। इस गैंग में अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, कमलेश पांडेय और टिन्नू यादव समेत अब तक गिरफ्तार किए गए 8 लोग शामिल थे। अविनाश शुक्ला की निशानदेही पर पुलिस ने उस स्थान से न केवल चोरी के पैसे बरामद किए हैं, बल्कि कुछ अन्य कीमती वस्तुएं भी रिकवर की हैं जिन्हें वहां छुपाकर रखा गया था और यह बरामदगी रामभक्तों और मंदिर प्रशासन के लिए काफी चौंकाने वाली है क्योंकि यह स्थान मंदिर के काफी करीब है।

टिन्नू यादव का मंदिर में समानांतर साम्राज्य

इस पूरे प्रकरण में टिन्नू यादव की भूमिका सबसे अधिक प्रभावशाली और संदिग्ध पाई गई है। जांच के दौरान यह जानकारी सामने आई है कि टिन्नू यादव के भाई के पास मंदिर के काउंटिंग रूम (दान पात्र गणना कक्ष) की चाबी रहती थी। टिन्नू ने मंदिर परिसर के भीतर अपना एक अलग ही सिस्टम बना रखा था और मंदिर के लगभग सभी कर्मचारी टिन्नू के आदेशों का पालन करते थे। इतना ही नहीं, टिन्नू के 5 रिश्तेदार भी मंदिर परिसर में ही कार्यरत थे, जिससे उसका नियंत्रण और भी मजबूत हो गया था। वह वॉकी-टॉकी के जरिए निर्देश देता था और उसके आदेश के बिना गाड़ियों तक को प्रवेश की अनुमति नहीं मिलती थी। बताया जा रहा है कि स्थानीय पुलिस महकमा भी उसके रसूख के आगे बेबस नजर आता था।

वीआईपी दर्शन के नाम पर वसूली का खेल

चंदा चोरी के अलावा यह गैंग वीआईपी दर्शन के नाम पर भी बड़ा खेल खेल रहा था। राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से विशिष्ट अतिथियों के लिए वीआईपी पास पूरी तरह से निशुल्क होते हैं, लेकिन टिन्नू यादव ने इसे कमाई का जरिया बना लिया था। उसने अयोध्या के आसपास के होटलों और होमस्टे के साथ मिलकर एक नेटवर्क तैयार किया था। श्रद्धालुओं को वीआईपी दर्शन का लालच देकर उनसे 500 से 1000 रुपये वसूले जाते थे। वहीं, संपन्न और अमीर श्रद्धालुओं से यह वसूली 2000 रुपये तक पहुंच जाती थी। श्रद्धालुओं का विवरण टिन्नू को भेजा जाता था और फिर उसका गैंग उन्हें वीआईपी प्रवेश दिलाता था।

छोटू का किरदार और लाखों की दैनिक कमाई

वीआईपी प्रवेश मार्ग पर छोटू नाम के एक व्यक्ति की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। जो श्रद्धालु होटलों के जरिए नहीं आते थे, उन्हें छोटू के माध्यम से दर्शन कराए जाते थे। छोटू ही टिन्नू के जरिए वीआईपी पास का इंतजाम करता था। इस अवैध वसूली से होने वाली मोटी कमाई को गैंग के सदस्यों और मंदिर से जुड़े कुछ अन्य लोगों के बीच बांटा जाता था। जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि प्राण प्रतिष्ठा समारोह के बाद से यह गैंग रोजाना लाखों रुपये की वसूली कर रहा था और इस खेल में मंदिर के कुछ अंदरूनी कर्मचारियों के साथ-साथ बाहरी लोग भी सक्रिय रूप से शामिल थे। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी है।