Sheikh Hasina / शेख हसीना दोषी करार: जुलाई विद्रोह में निहत्थे नागरिकों पर गोली चलाने का आरोप

बांग्लादेश की इंटरनेशनल कोर्ट ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को जुलाई विद्रोह में निहत्थे नागरिकों पर गोली चलवाने का दोषी ठहराया है। यूनुस सरकार के वकील ने उन्हें फांसी देने की मांग की है, जिसमें 1400 आरोपों का हवाला दिया गया है। कोर्ट ने हसीना का वायरल ऑडियो और मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट को भी आधार बनाया।

बांग्लादेश की इंटरनेशनल कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को जुलाई विद्रोह के दौरान निहत्थे नागरिकों पर गोली चलाने का दोषी करार दिया है। इस फैसले के बाद हसीना की राजनीतिक और कानूनी मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं। यूनुस सरकार के वकील ने हसीना के खिलाफ 1400 ऐसे आरोप होने। का दावा करते हुए उन्हें मौत की सजा देने की मांग की है। वकील का तर्क है कि यदि हसीना को मौत की सजा नहीं दी जाती है, तो यह उन लोगों के साथ घोर अन्याय होगा, जिनकी जान हसीना के आदेशों के कारण गई है। इंटरनेशनल कोर्ट ने शेख हसीना को जुलाई विद्रोह का मुख्य दोषी माना है। उन पर आरोप है कि उन्होंने जुलाई विद्रोह के दौरान सड़कों पर उतरे निहत्थे नागरिकों पर गोली चलाने का आदेश दिया था और कोर्ट ने इस मामले में गहन जांच के बाद अपना फैसला सुनाया है, जिसमें कई महत्वपूर्ण सबूतों को आधार बनाया गया है। यह फैसला बांग्लादेश के राजनीतिक परिदृश्य में एक बड़ा बदलाव ला सकता है, खासकर ऐसे समय में जब देश में राजनीतिक अस्थिरता का माहौल है। हसीना के खिलाफ यह फैसला उनके लंबे राजनीतिक करियर पर एक बड़ा धब्बा है।

वायरल ऑडियो और मानवाधिकार रिपोर्ट

बांग्लादेशी मीडिया 'प्रथम आलो' के अनुसार, कोर्ट ने फैसला सुनाते समय शेख हसीना का वह ऑडियो भी जारी किया, जो बांग्लादेश में व्यापक रूप से वायरल हुआ था और इस ऑडियो में हसीना कथित तौर पर पुलिस प्रमुख से लोगों पर गोलियां चलाने के लिए कह रही थीं। इस ऑडियो की सत्यता की पुष्टि होने के बाद हसीना के खिलाफ मामले की सुनवाई में तेजी आई। इसके अतिरिक्त, कोर्ट ने अपने फैसले में मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट का भी विशेष रूप से उल्लेख किया, जिसमें जुलाई विद्रोह के दौरान हुई मौतों और मानवाधिकारों के उल्लंघन का विस्तृत विवरण था। इन दोनों सबूतों ने अभियोजन पक्ष के मामले को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

458 पन्नों का विस्तृत फैसला

इंटरनेशनल कोर्ट ने शेख हसीना के खिलाफ 458 पन्नों का एक विस्तृत फैसला सुनाया है। इस फैसले में कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा है कि जुलाई विद्रोह के दौरान हुई मौतों के लिए शेख हसीना ही दोषी थीं। कोर्ट ने उन सभी सबूतों को सार्वजनिक किया, जिन्हें अभियोजक पक्ष ने प्रस्तुत किया था। इस विस्तृत फैसले में यह भी कहा गया है कि हसीना जनवरी। 2024 के बाद से ही तानाशाह बनने की ओर अग्रसर हो गई थीं। जनवरी 2024 के चुनाव में उन्होंने विपक्ष को बुरी तरह कुचला, और इसके बाद जब छात्र सड़कों पर उतरे तो उन पर गोलियां चलवा दीं और यह फैसला हसीना के शासनकाल की आलोचनाओं को और बल देता है।

मामले में हसीना कैसे फंसीं

जुलाई विद्रोह हत्या मामले में बांग्लादेश की सरकार ने अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना के साथ-साथ पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल और पूर्व पुलिस महानिरीक्षक चौधरी अब्दुल्ला अल-मामून को भी आरोपी बनाया था और इंटरनेशनल कोर्ट में जब इन तीनों के खिलाफ ट्रायल शुरू हुआ, तो चौधरी अब्दुल्ला अल-मामून ने अपना रुख बदल लिया। अल-मामून ने हसीना के खिलाफ गवाही देने की बात कही, जिससे अभियोजन पक्ष को एक महत्वपूर्ण बढ़त मिली। इसी बीच, हसीना का वह ऑडियो सामने आया, जिसमें वे पुलिस प्रमुख से बात कर रही थीं और लोगों पर गोली चलाने का आदेश दे रही थीं। इस ऑडियो की सत्यता की पुष्टि होते ही हसीना के खिलाफ केस की सुनवाई और भी तेज हो गई, और अंततः उन्हें दोषी ठहराया गया। यह घटनाक्रम दर्शाता है कि कैसे आंतरिक गवाहों और निर्णायक सबूतों ने इस हाई-प्रोफाइल मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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