Gold Price Today / चांदी ₹2.83 लाख/किग्रा के रिकॉर्ड स्तर पर, सोना ₹1.42 लाख/10 ग्राम पर

चांदी ₹2.83 लाख/किग्रा के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गई है, जिसमें चार दिनों में ₹40,000 की वृद्धि हुई है। सोना ₹1.42 लाख/10 ग्राम पर कारोबार कर रहा है, जिसमें हाल ही में मामूली गिरावट आई है। कमजोर डॉलर, भू-राजनीतिक तनाव और औद्योगिक मांग जैसी वैश्विक स्थितियां इन कीमती धातुओं की कीमतों में वृद्धि कर रही हैं।

आज, 16 जनवरी को, भारतीय बुलियन बाजार में चांदी ने एक नया सर्वकालिक उच्च स्तर छू लिया है, जबकि सोने की कीमतों में तीन दिनों की तेजी के बाद मामूली गिरावट दर्ज की गई है। यह स्थिति वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक कारकों के जटिल मिश्रण को दर्शाती है जो कीमती धातुओं के बाजार को प्रभावित कर रहे हैं और निवेशकों और उपभोक्ताओं दोनों के लिए इन रुझानों को समझना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये न केवल निवेश रणनीतियों को प्रभावित करते हैं बल्कि आभूषणों और औद्योगिक उपयोग के लिए भी महत्वपूर्ण हैं।

चांदी की अभूतपूर्व वृद्धि

चांदी की कीमत आज ₹5,208 की प्रभावशाली वृद्धि के साथ ₹2,82,720 प्रति किलोग्राम के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गई है, जैसा कि इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) ने बताया है। यह लगातार चौथा दिन है जब चांदी की कीमतों में तेजी देखी गई है और इससे पहले, 14 जनवरी को चांदी की कीमत ₹2,77,512 थी। पिछले चार दिनों में चांदी ₹40,000 महंगी हो चुकी है, जो इसकी मांग में अचानक और तीव्र उछाल को दर्शाता है। पिछले साल, यानी 2025 में, चांदी का भाव ₹1,44,403 (167%) बढ़ा था। 31 दिसंबर 2024 को एक किलो चांदी की कीमत ₹86,017 थी, जो 31 दिसंबर 2025 को ₹2,30,420 प्रति किलो हो गई थी और यह वृद्धि चांदी के बाजार में एक मजबूत और निरंतर तेजी की प्रवृत्ति को उजागर करती है, जो इसे निवेशकों के लिए एक आकर्षक विकल्प बनाती है।

सोने का उतार-चढ़ाव भरा सफर

जहां चांदी रिकॉर्ड तोड़ रही है, वहीं सोने के दाम में तीन दिन की तेजी के बाद आज गिरावट आई है। 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का भाव आज ₹298 गिरकर ₹1,41,717 पर खुला था। इससे पहले, 14 जनवरी को सोने ने ₹1,42,015 पर अपना सर्वकालिक उच्च स्तर बनाया था। हालांकि आज गिरावट दर्ज की गई है, सोने ने पिछले साल भी मजबूत प्रदर्शन किया था। 2025 में सोने की कीमत ₹57,033 (75%) बढ़ी थी। 31 दिसंबर 2024 को 10 ग्राम 24 कैरेट सोना ₹76,162। का था, जो 31 दिसंबर 2025 को ₹1,33,195 हो गया। यह दर्शाता है कि सोने में दीर्घकालिक निवेश अभी भी मजबूत बना हुआ है, भले ही अल्पकालिक उतार-चढ़ाव आते रहें।

शहरों में दरों में अंतर क्यों होता है?

यह समझना महत्वपूर्ण है कि IBJA द्वारा जारी सोने और चांदी की कीमतों। में 3% GST, मेकिंग चार्ज और ज्वेलर्स का मार्जिन शामिल नहीं होता है। यही कारण है कि अलग-अलग शहरों में खुदरा कीमतें BJA की दरों से भिन्न होती हैं और iBJA की ये दरें हालांकि, महत्वपूर्ण हैं क्योंकि इनका उपयोग भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड के रेट तय करने के लिए करता है। इसके अलावा, कई बैंक गोल्ड लोन के रेट तय करने के लिए भी इन्हीं दरों का इस्तेमाल करते हैं, जिससे इनकी प्रासंगिकता और बढ़ जाती है।

डॉलर का कमजोर होना

और अमेरिका के ब्याज दर घटाने से डॉलर कमजोर हुआ है। जब डॉलर कमजोर होता है, तो सोने को खरीदने की लागत अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के। लिए कम हो जाती है, जिससे इसकी मांग बढ़ती है और कीमतें ऊपर जाती हैं। दूसरा,

भू-राजनीतिक तनाव

रूस-यूक्रेन युद्ध और दुनिया भर में बढ़ते तनाव ने निवेशकों को सोने को सबसे सुरक्षित निवेश मानकर खरीदने के लिए प्रेरित किया है। अनिश्चितता के समय में, निवेशक अपनी पूंजी को सुरक्षित रखने के लिए सोने की ओर रुख करते हैं। तीसरा,

रिजर्व बैंकों द्वारा खरीदारी

चीन जैसे देश अपने केंद्रीय बैंकों में सोना भर रहे हैं। ये देश सालभर में 900 टन से ज्यादा सोने की खरीदारी कर रहे हैं, जिससे वैश्विक मांग बढ़ रही है और दाम ऊपर जा रहे हैं।

औद्योगिक मांग में वृद्धि

चांदी अब केवल आभूषणों तक सीमित नहीं है; यह सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) जैसे उद्योगों में भारी मात्रा में इस्तेमाल होने वाला एक महत्वपूर्ण कच्चा माल बन गई है। इन क्षेत्रों में तेजी से विकास ने चांदी की औद्योगिक मांग को आसमान छू लिया है। दूसरा,

ट्रंप के टैरिफ का डर

पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ के डर से अमेरिकी कंपनियां चांदी का भारी स्टॉक जमा कर रही हैं और भविष्य में आपूर्ति में कमी या लागत में वृद्धि की आशंका से यह पूर्व-खाली खरीद वैश्विक आपूर्ति में कमी ला रही है और कीमतों को ऊपर चढ़ा रही है। तीसरा,

निर्माताओं की होड़

। उत्पादन रुकने के डर से सभी निर्माता पहले से ही चांदी खरीद रहे हैं। यह प्रतिस्पर्धी खरीद और कच्चे माल को सुरक्षित करने की होड़ आने वाले। महीनों में भी चांदी की कीमतों में तेजी बनाए रखने की उम्मीद है।

असली चांदी की पहचान करने के 4 तरीके

बाजार में नकली चांदी की संभावना को देखते हुए, असली चांदी की पहचान करना महत्वपूर्ण है और इसके लिए कुछ सरल तरीके हैं: पहला,

मैग्नेट टेस्ट

असली सिल्वर चुंबक से नहीं चिपकती है। यदि कोई वस्तु चुंबक से चिपक जाए, तो वह नकली हो सकती है और दूसरा,

आइस टेस्ट

सिल्वर पर बर्फ रखें। असली सिल्वर एक उत्कृष्ट ऊष्मा चालक होती है, इसलिए उस पर बर्फ बहुत तेजी से पिघलेगी। तीसरा,

स्मेल टेस्ट

असली सिल्वर में कोई गंध नहीं होती है। यदि उसमें तांबे जैसी कोई धात्विक गंध आती है, तो उसमें अशुद्धियां हो सकती हैं। चौथा,

क्लॉथ टेस्ट

चांदी को एक सफेद कपड़े से रगड़ें। यदि कपड़े पर काला निशान आता है, तो यह असली चांदी होने का संकेत है, क्योंकि यह ऑक्सीकरण के कारण होता है। कुल मिलाकर, कीमती धातुओं का बाजार वर्तमान में मजबूत वृद्धि और कुछ उतार-चढ़ाव का अनुभव कर रहा है। चांदी की रिकॉर्ड तोड़ रैली और सोने की स्थिर वृद्धि,। दोनों ही वैश्विक आर्थिक और औद्योगिक रुझानों से प्रेरित हैं। निवेशकों और उपभोक्ताओं को इन परिवर्तनों पर ध्यान देना चाहिए ताकि वे सूचित निर्णय ले सकें।