दक्षिण अफ्रीका-चीन व्यापार समझौता: ट्रंप की टैरिफ नीति के बीच नई साझेदारी

दक्षिण अफ्रीका और चीन ने एक नए व्यापार समझौते के लिए फ्रेमवर्क एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए हैं। यह कदम अमेरिका द्वारा लगाए गए 30% आयात शुल्क और ट्रंप प्रशासन के साथ बढ़ते राजनयिक तनाव के बीच उठाया गया है, जिससे दक्षिण अफ्रीका को चीनी बाजार में बड़ी राहत मिलेगी।

दक्षिण अफ्रीका और चीन के बीच नए व्यापारिक युग की शुरुआत

केपटाउन में शुक्रवार को दक्षिण अफ्रीका और चीन ने एक ऐतिहासिक फ्रेमवर्क एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए, जो दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को एक नई दिशा देने के लिए तैयार है। यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब दक्षिण अफ्रीका, जो अफ्रीका की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, अमेरिका की ओर से लगाए गए ऊंचे आयात टैरिफ और ट्रंप प्रशासन के साथ बढ़ते राजनयिक गतिरोध के कारण वैकल्पिक बाजारों की तलाश कर रहा है। आधिकारिक रिपोर्टों के अनुसार, इस समझौते का मुख्य उद्देश्य द्विपक्षीय व्यापार को सुगम बनाना और दक्षिण अफ्रीकी उत्पादों के लिए नए अवसर पैदा करना है।

ट्रंप की टैरिफ नीति और राजनयिक तनाव की पृष्ठभूमि

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 'रेसिप्रोकल टैरिफ पॉलिसी' के तहत अमेरिका ने दक्षिण अफ्रीका से आने वाले कुछ विशिष्ट सामानों पर 30% तक की ड्यूटी लगा दी है। यह वैश्विक स्तर पर लागू की गई सबसे ऊंची दरों में से एक मानी जा रही है। इसके अतिरिक्त, राजनयिक संबंधों में तब और कड़वाहट आई जब ट्रंप प्रशासन ने दक्षिण अफ्रीका को इस वर्ष अमेरिका में आयोजित होने वाली जी-20 (G20) देशों की महत्वपूर्ण बैठकों में हिस्सा लेने से रोक दिया। इन परिस्थितियों ने दक्षिण अफ्रीका को अपनी व्यापारिक रणनीति पर पुनर्विचार करने और चीन के साथ अपनी निकटता बढ़ाने के लिए प्रेरित किया है।

मार्च 2025 तक समझौते को अंतिम रूप देने का लक्ष्य

दक्षिण अफ्रीका के व्यापार और उद्योग मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह फ्रेमवर्क एग्रीमेंट एक व्यापक व्यापार सौदे की नींव रखेगा। मंत्रालय को उम्मीद है कि यह डील मार्च 2025 के अंत तक पूरी तरह से फाइनल हो जाएगी। इस समझौते के तहत दक्षिण अफ्रीका के कृषि उत्पादों, विशेष रूप से फलों को चीनी बाजार में 'ड्यूटी-फ्री' यानी शुल्क मुक्त पहुंच प्राप्त होगी। इसके बदले में, चीन को दक्षिण अफ्रीका के भीतर निवेश के अधिक अनुकूल अवसर मिलेंगे। विशेष रूप से दक्षिण अफ्रीकी बाजार में चीनी ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती मांग को देखते हुए यह निवेश महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

प्रमुख क्षेत्रों पर प्रभाव और आर्थिक सहयोग का विस्तार

व्यापार और उद्योग मंत्री पार्क्स टाउ, जिन्होंने समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए चीन का दौरा किया, ने कहा कि इस सौदे से दक्षिण अफ्रीका के माइनिंग, एग्रीकल्चर, रिन्यूएबल एनर्जी और टेक्नोलॉजी सेक्टर को सीधा लाभ होगा। चीन वर्तमान में दक्षिण अफ्रीका का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है, और यह नया समझौता इस स्थिति को और मजबूत करेगा। मंत्रालय के अनुसार, दक्षिण अफ्रीका चीन के साथ 'दोस्ताना, व्यावहारिक और लचीले' तरीके से काम करने के लिए प्रतिबद्ध है ताकि वैश्विक व्यापारिक अनिश्चितताओं के बीच अपनी अर्थव्यवस्था को स्थिरता प्रदान की जा सके।

विशेषज्ञों का विश्लेषण और भविष्य की दिशा

आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार, यह समझौता वैश्विक भू-राजनीति में आ रहे बदलावों का संकेत है। जहां एक ओर अमेरिका संरक्षणवादी नीतियों को अपना रहा है, वहीं दूसरी ओर ब्रिक्स (BRICS) देशों के भीतर आर्थिक सहयोग गहरा होता जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि दक्षिण अफ्रीका का यह कदम न केवल अमेरिकी टैरिफ के प्रभाव को कम करेगा, बल्कि अफ्रीकी महाद्वीप में चीन के बढ़ते आर्थिक प्रभाव को भी नई गति देगा। हालांकि, दक्षिण अफ्रीका ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह बेहतर व्यापारिक शर्तों के लिए अमेरिका के साथ बातचीत के रास्ते अभी भी खुले रखे हुए है।

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