अफगानिस्तान के तालिबान प्रशासन ने पाकिस्तान के खिलाफ एक बड़े सैन्य अभियान की घोषणा करते हुए दावा किया है कि उसने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री कार्यालय के निकटवर्ती क्षेत्रों और कई महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों पर आत्मघाती ड्रोन हमले किए हैं। तालिबान के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह हमले शुक्रवार दोपहर लगभग 11:00 बजे किए गए। तालिबान के उप प्रवक्ता हमदुल्लाह फितरत ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि इन हमलों का मुख्य उद्देश्य पाकिस्तानी सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाना था। यह घटनाक्रम तब सामने आया है जब एक दिन पहले पाकिस्तानी वायुसेना ने अफगानिस्तान के भीतर कथित तौर पर हवाई हमले किए थे।
हमलों का विवरण और लक्षित क्षेत्र
तालिबान रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, उनके आत्मघाती ड्रोनों ने पाकिस्तान के कई रणनीतिक स्थानों को निशाना बनाया और इसमें इस्लामाबाद के निकट फैजाबाद शहर का इलाका शामिल है, जहां प्रधानमंत्री का कार्यालय और अन्य महत्वपूर्ण सरकारी भवन स्थित हैं। इसके अतिरिक्त, खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के नौशेरा में स्थित सेना कैंट, जमरूद की सैन्य कॉलोनी और एबटाबाद में सैन्य प्रतिष्ठानों पर हमले का दावा किया गया है। तालिबान ने इन ऑपरेशनों को 'पूरी तरह सफल' बताया है और कहा है कि उनके ड्रोनों ने सटीक तरीके से निर्धारित लक्ष्यों को भेदा है।
तालिबान रक्षा मंत्रालय का आधिकारिक बयान
रक्षा मंत्रालय के डिप्टी प्रवक्ता हमदुल्लाह फितरत ने कहा कि अफगानिस्तान की वायु सेना ने इन हमलों को अंजाम दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई पाकिस्तानी सैन्य हलकों द्वारा काबुल, कंधार और पक्तिया प्रांतों में किए गए हवाई अतिक्रमणों का सीधा जवाब है। फितरत के अनुसार, तालिबान प्रशासन अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और किसी भी बाहरी हमले का जवाब देने की क्षमता रखता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि इन हमलों में पाकिस्तान के महत्वपूर्ण सैन्य बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है, हालांकि पाकिस्तान की ओर से अभी तक नुकसान का कोई आधिकारिक विवरण साझा नहीं किया गया है।
पाकिस्तानी सैन्य कार्रवाई की पृष्ठभूमि
इस जवाबी हमले से पहले, बृहस्पतिवार की मध्यरात्रि को पाकिस्तानी सेना ने अफगानिस्तान के काबुल और अन्य क्षेत्रों में हवाई हमले किए थे। पाकिस्तानी सूत्रों के अनुसार, उन हमलों का उद्देश्य तालिबान के सैन्य ठिकानों और कमांडरों को निशाना बनाना था और पाकिस्तान ने दावा किया था कि उस ऑपरेशन में 130 लड़ाके और कई शीर्ष कमांडर मारे गए थे। पाकिस्तान का आरोप रहा है कि प्रतिबंधित संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के लड़ाके अफगान धरती का उपयोग पाकिस्तान के खिलाफ हमलों के लिए कर रहे हैं, जिसे तालिबान प्रशासन लगातार नकारता रहा है।
सीमा पर संघर्ष और हताहतों का विवरण
तालिबान और पाकिस्तानी सेना के बीच जमीनी स्तर पर भी भारी संघर्ष की खबरें मिली हैं। तालिबान की ओर से दावा किया गया है कि सीमावर्ती झड़पों में उन्होंने 55 पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया है और 15 से अधिक सैनिकों को बंधक बना लिया है। इसके साथ ही, तालिबान ने सीमा पर स्थित 23 पाकिस्तानी चौकियों पर कब्जा करने का भी दावा किया है। दूसरी ओर, पाकिस्तानी अधिकारियों ने इन दावों की पुष्टि नहीं की है, लेकिन सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को अत्यधिक कड़ा कर दिया गया है। दोनों देशों के बीच डूरंड रेखा पर तनाव लगातार बना हुआ है और भारी हथियारों का उपयोग किया जा रहा है।
सुरक्षा अलर्ट और वर्तमान स्थिति
तालिबान के ड्रोन हमलों के दावों के बाद पाकिस्तान के प्रमुख शहरों और सैन्य छावनियों में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है और इस्लामाबाद, रावलपिंडी और पेशावर जैसे शहरों में सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं। विशेष रूप से एबटाबाद और नौशेरा जैसे संवेदनशील सैन्य क्षेत्रों में हवाई निगरानी बढ़ा दी गई है। तालिबान ने चेतावनी दी है कि यदि पाकिस्तान की ओर से हवाई उल्लंघन जारी रहता है, तो वे अपने हमलों का दायरा और अधिक बढ़ा सकते हैं। वर्तमान में दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संवाद लगभग ठप है और सैन्य गतिविधियां तेज हो गई हैं।
