Constitution Day / 'आज पहली बार JK में यह दिन मनाया गया', संविधान दिवस पर सुप्रीम कोर्ट में बोले पीएम मोदी

संविधान दिवस पर पीएम मोदी ने सुप्रीम कोर्ट में संबोधित किया, संविधान सभा के सदस्यों को नमन करते हुए लोकतंत्र की महत्ता रेखांकित की। उन्होंने मुंबई हमले की बरसी पर शहीदों को श्रद्धांजलि दी और कहा कि संविधान ने देश को हर चुनौती से निपटने का मार्ग दिखाया है।

Constitution Day: संविधान दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज सुप्रीम कोर्ट में आयोजित कार्यक्रम में भाग लिया और देशवासियों को संविधान दिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने संविधान के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हुए संविधान सभा के सदस्यों को नमन किया। इस अवसर पर उन्होंने संविधान की अहमियत और भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं पर चर्चा की। साथ ही, मुंबई हमले की बरसी का भी जिक्र करते हुए आतंकी हमलों के खिलाफ कड़ा संदेश दिया।

मुंबई हमले की बरसी का जिक्र

प्रधानमंत्री ने कहा, “आज मुंबई हमले की बरसी है। इस हमले में जिन लोगों ने अपनी जान गंवाई, मैं उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था को चुनौती देने वाले हर आतंकी संगठन को मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।” उन्होंने स्पष्ट किया कि देश की सुरक्षा और लोकतांत्रिक मूल्यों को बनाए रखना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

संविधान की शक्ति पर बल

प्रधानमंत्री ने संविधान को भारत की विकास यात्रा का आधार बताते हुए कहा, “हमारे संविधान ने 75 वर्षों में देश को हर चुनौती का सामना करने का रास्ता दिखाया है। आपातकाल जैसे कठिन दौर से लेकर समाज में समानता लाने तक, संविधान ने हमें सही दिशा दी है। यह न केवल अधिकारों की बात करता है, बल्कि हमारे कर्तव्यों का भी मार्गदर्शन करता है।”

जम्मू-कश्मीर में पहली बार संविधान दिवस

पीएम मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि जम्मू-कश्मीर में पहली बार संविधान दिवस मनाया गया है। उन्होंने इसे एक ऐतिहासिक क्षण बताते हुए कहा कि यह भारत के संविधान और लोकतंत्र की सफलता का प्रतीक है।

महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों के लिए प्रगतिशील कदम

प्रधानमंत्री ने सरकार की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए बताया कि कैसे महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए नारी शक्ति वंदन अधिनियम लागू किया गया। उन्होंने कहा, “संविधान की मूल प्रति में श्री राम और माता सीता का चित्र है, जो हमारे सांस्कृतिक मूल्यों को दर्शाता है। इसी भावना से हमने महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए ऐतिहासिक कदम उठाए हैं।”

उन्होंने वरिष्ठ नागरिकों के जीवन में आए सुधारों की भी चर्चा की। “एक समय था जब सीनियर सिटीजन को पेंशन लेने के लिए बैंक जाकर जीवित होने का प्रमाण देना पड़ता था। अब यह काम घर बैठे संभव हो गया है। इसके अलावा, 5 लाख रुपये तक का फ्री बीमा देशवासियों को दिया जा रहा है।”

संविधान के दायरे में काम करने की प्रतिबद्धता

पीएम मोदी ने चुटकी लेते हुए कहा, “संविधान ने मुझे जो काम सौंपा है, मैंने उसे पूरी निष्ठा के साथ किया है। मैंने अधिकार की सीमा में रहते हुए अपने दायित्व का निर्वहन किया है और किसी के अधिकार क्षेत्र में अतिक्रमण नहीं किया। ऐसे समय में इशारा ही काफी होता है। मैं इससे ज्यादा कुछ नहीं बोलूंगा।”

संविधान: समस्याओं का समाधान

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि भारत के संविधान में देश की हर समस्या का समाधान छिपा है। उन्होंने इसे समय के साथ बदलती आकांक्षाओं का संरक्षक बताया और कहा कि यह हमें बड़े संकल्पों को सिद्ध करने की प्रेरणा देता है।

निष्कर्ष

संविधान दिवस पर प्रधानमंत्री मोदी का संबोधन न केवल संविधान की महत्ता को रेखांकित करता है, बल्कि यह भी स्पष्ट करता है कि सरकार भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं और नागरिक अधिकारों को सर्वोपरि मानती है। उनका यह भाषण देशवासियों को संविधान के प्रति अपनी जिम्मेदारी और कर्तव्यों को याद दिलाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास था।

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