डोनाल्ड ट्रंप का फोन नहीं उठा रहे किम जोंग उन, क्या उत्तर कोरिया ने फेरा मुंह?

डोनाल्ड ट्रंप उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन से संपर्क साधने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन प्योंगयांग की ओर से कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिल रही है। ट्रंप ने सद्भावना के तौर पर सैन्य अभ्यास भी कम किया है, फिर भी किम की बहन ने किसी भी बातचीत से साफ इनकार किया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन की दोस्ती और दुश्मनी की कहानी विश्व राजनीति में हमेशा से एक चर्चा का विषय रही है। इन दोनों नेताओं के बीच हुई मुलाकातें, आदान-प्रदान की गई चिट्ठियां और बातचीत कभी परमाणु हथियारों पर तनाव कम करने की उम्मीद जगाती रही हैं, तो कभी दोनों देशों के बीच टकराव बढ़ता हुआ दिखाई दिया है। अब एक बार फिर ट्रंप और किम की यह जोड़ी सुर्खियों में है, लेकिन इस बार वजह दोनों के बीच बातचीत होना नहीं, बल्कि बातचीत का पूरी तरह से बंद होना है। खबरों के मुताबिक, ट्रंप किम से संपर्क करना चाहते हैं, लेकिन उत्तर कोरियाई नेता उनकी कॉल का कोई जवाब नहीं दे रहे हैं।

ट्रंप की बातचीत की कोशिश और सैन्य अभ्यास में कटौती

डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में किम जोंग उन के साथ अपने पुराने व्यक्तिगत रिश्तों का हवाला देते हुए उत्तर कोरिया के साथ फिर से बातचीत शुरू करने की इच्छा जाहिर की है। इसी कोशिश के तहत उन्होंने अमेरिका और दक्षिण कोरिया के बीच होने वाली संयुक्त सैन्य एक्सरसाइज को भी कम करने का आदेश दिया। ट्रंप का तर्क है कि किम के साथ उनके संबंध अच्छे हैं और इस तरह के सैन्य अभ्यास उत्तर कोरिया को गलत या शत्रुतापूर्ण संकेत देते हैं। पहले यह सैन्य अभ्यास 27 अगस्त तक चलना प्रस्तावित था, लेकिन ट्रंप के हस्तक्षेप के बाद इसे सिर्फ 5 दिन में ही खत्म करने का फैसला लिया गया। ट्रंप ने इन अभ्यासों को काफी महंगा और उत्तर कोरिया के लिए उकसावे वाला करार दिया है।

किम यो-जोंग का इनकार और ट्रंप का दावा

उत्तर कोरिया की तरफ से ट्रंप की इन कोशिशों को लेकर वैसी गर्मजोशी नहीं दिखाई गई है जैसी ट्रंप उम्मीद कर रहे थे। किम जोंग उन की बहन किम यो-जोंग ने हाल ही में एक बयान जारी कर ट्रंप के साथ किसी भी मौजूदा बातचीत की जानकारी होने से साफ इनकार किया है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि अमेरिका अभी भी उत्तर कोरिया का विरोधी बना हुआ है। दूसरी ओर, ट्रंप ने खुद यह दावा किया कि किम ने उनकी हालिया कोशिश का जवाब दिया है और उन्होंने इस बातचीत को बहुत सकारात्मक बताया। हालांकि, ट्रंप ने यह स्पष्ट नहीं किया कि किम से उनकी सीधी बातचीत हुई है या यह जवाब किसी अन्य माध्यम से आया है। किम यो-जोंग के बयान ने ट्रंप के दावों पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।

पुराने रिश्तों का हवाला और हनोई शिखर सम्मेलन की कड़वाहट

ट्रंप का मानना है कि किम जोंग उन के साथ उनके व्यक्तिगत रिश्ते एक बार फिर बातचीत की मेज पर लौटने में मदद कर सकते हैं। अपने पहले कार्यकाल के दौरान ट्रंप और किम 3 बार आमने-सामने मिले थे, जिससे दुनिया भर में तनाव कम होने की उम्मीद जगी थी। लेकिन 2019 में हनोई शिखर सम्मेलन के दौरान बातचीत बिना किसी समझौते के टूट गई थी और ट्रंप वहां से खाली हाथ लौट आए थे। इसके बाद से ही दोनों देशों के बीच दूरियां बढ़ती चली गईं और ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों की सख्त टिप्पणियों और गोल्डन डोम मिसाइल डिफेंस सिस्टम की योजना ने प्योंगयांग को और अधिक नाराज कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि किम अब अमेरिका के साथ बातचीत में किसी भी तरह की जल्दबाजी दिखाने के मूड में नहीं हैं।

परमाणु हथियार और उत्तर कोरिया की नई रणनीति

उत्तर कोरिया अब खुद को एक परमाणु हथियार संपन्न देश के रूप में अंतरराष्ट्रीय मान्यता दिलाना चाहता है और वह अपने परमाणु कार्यक्रम को छोड़ने के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं है। एक अनुमान के मुताबिक, उत्तर कोरिया के पास वर्तमान में करीब 60 परमाणु हथियार मौजूद हैं। किम जोंग उन अब अमेरिका से बातचीत में तभी दिलचस्पी दिखा सकते हैं जब उन्हें उनकी शर्तों पर रियायतें मिलें। फिलहाल, ट्रंप की ओर से सैन्य अभ्यास कम करने जैसे कदमों का उत्तर कोरिया पर कोई खास असर होता नहीं दिख रहा है। किम का फोन न उठाना या बातचीत से दूरी बनाए रखना यह संकेत देता है कि उत्तर कोरिया अब ट्रंप की कूटनीति पर पूरी तरह भरोसा करने को तैयार नहीं है और अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।