अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी तनाव के बीच एक कड़ा रुख अपनाते हुए उनके द्वारा भेजे गए शांति प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है। ट्रंप ने इस प्रस्ताव को "पूरी तरह से अस्वीकार्य" करार दिया है, जिससे दोनों देशों के बीच युद्ध समाप्त होने की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है। राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट किया कि ईरान पिछले 50 वर्षों से अमेरिका के साथ "खेल खेल रहा है," लेकिन अब यह सिलसिला और अधिक समय तक नहीं चलेगा। ट्रंप के इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल पैदा कर दी है, क्योंकि यह संघर्ष न केवल दो देशों के बीच है, बल्कि इसने वैश्विक तेल आपूर्ति और आर्थिक स्थिरता को भी गंभीर रूप से प्रभावित किया है। अमेरिका और ईरान के बीच पिछले कई महीनों से जारी तनाव कम होने के संकेत नहीं मिल रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने युद्ध समाप्त करने के लिए ईरान द्वारा भेजे गए प्रस्ताव को पूरी तरह अस्वीकार्य बताते हुए खारिज कर दिया है और हालांकि, प्रस्ताव के बारे में उन्होंने कोई और जानकारी नहीं दी। ट्रंप के इस रुख के बाद एक प्रमुख रिपब्लिकन नेता ने अब ईरान के खिलाफ सैन्य विकल्प पर विचार करने का आग्रह किया।
"वे अब और नहीं हंस पाएंगे" - ट्रंप की चेतावनी
ईरान का यह प्रस्ताव रविवार को राष्ट्रपति ट्रंप के पास पहुंचा था। इस प्रस्ताव से यह उम्मीद लगाई जा रही थी कि 28 फरवरी को शुरू हुए इस भीषण युद्ध को समाप्त करने की दिशा में कोई ठोस सफलता मिल सकती है। गौरतलब है कि इस युद्ध ने वैश्विक तेल आपूर्ति के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को बाधित कर दिया है, जिसके कारण दुनिया के कई देशों में ईंधन का भारी संकट पैदा हो गया है और रविवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म "ट्रुथ सोशल" पर ट्रंप ने इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया साझा की। उन्होंने लिखा, "मैंने अभी ईरान के तथाकथित 'प्रतिनिधियों' का जवाब पढ़ा है। मुझे यह बिल्कुल पसंद नहीं आया—यह पूरी तरह से अस्वीकार्य है! " ट्रंप की यह टिप्पणी ईरान के प्रति उनके सख्त रवैये को दर्शाती है और यह स्पष्ट करती है कि वे किसी भी ऐसे समझौते के पक्ष में नहीं हैं जो अमेरिका के हितों के अनुकूल न हो।
नेतन्याहू से चर्चा और मीडिया को दी गई जानकारी
मीडिया आउटलेट 'एक्सियोस' के साथ बातचीत के दौरान, डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के प्रस्ताव की विस्तृत जानकारी देने से साफ इनकार कर दिया। हालांकि, उन्होंने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, "मुझे उनका पत्र पसंद नहीं आया। यह पूरी तरह से अनुचित है। " ट्रंप ने यह भी साझा किया कि इस गंभीर मुद्दे पर उनकी इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ लंबी और विस्तृत बातचीत हुई है। इस बातचीत से यह संकेत मिलता है कि अमेरिका इस मामले में अपने क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर रणनीति तैयार कर रहा है और ट्रंप का मानना है कि ईरान का वर्तमान रुख बातचीत के जरिए समाधान निकालने के लिए पर्याप्त नहीं है और वे इस मामले में किसी भी प्रकार का समझौता करने के मूड में नहीं दिख रहे हैं।
सैन्य कार्रवाई की मांग और 'प्रोजेक्ट फ्रीडम प्लस'
ईरान के इस अड़ियल रुख को देखते हुए अमेरिका के भीतर से भी अब सख्त कार्रवाई की मांग उठने लगी है। प्रमुख रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने राष्ट्रपति ट्रंप को सलाह दी है कि अब ईरान के खिलाफ सैन्य विकल्प पर विचार करने का समय आ गया है। ग्राहम ने तर्क दिया कि अंतरराष्ट्रीय शिपिंग पर लगातार हो रहे हमलों और अमेरिकी सहयोगियों को निशाना बनाए जाने के बाद अब "रास्ता बदलने" की जरूरत है। उन्होंने 'प्रोजेक्ट फ्रीडम प्लस' को फिर से शुरू करने का संकेत दिया, जो कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में एक महत्वपूर्ण नौसैनिक ऑपरेशन है। ग्राहम का मानना है कि ईरान को उसकी हरकतों के लिए कड़ा सबक सिखाना आवश्यक हो गया है।
28 फरवरी से शुरू हुए इस युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर तेल की आपूर्ति ठप पड़ी है, जिससे कई देशों की अर्थव्यवस्थाएं प्रभावित हुई हैं। हालांकि, 8 अप्रैल से युद्धविराम लागू है, लेकिन यह केवल एक अस्थायी राहत साबित हो रही है। स्थायी शांति के लिए अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच पा रही है। ट्रंप के हालिया बयान और सैन्य कार्रवाई की बढ़ती मांग के बीच, यह स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में तनाव और बढ़ सकता है। 8 अप्रैल के युद्धविराम के बावजूद, दोनों पक्षों के बीच अविश्वास की खाई गहरी बनी हुई है और वैश्विक समुदाय इस संकट के समाधान की प्रतीक्षा कर रहा है।
