अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने को लेकर बातचीत चल रही है, लेकिन अभी तक कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ है। अमेरिका ने ईरान को 6 मई को 14 पॉइंट वाला एक प्रस्ताव भेजा था। 1 पेज के इस प्रस्ताव में युद्ध रोकने और आगे की बातचीत का रास्ता तय करने की बात कही गई है। हालांकि ईरान ने अभी तक इसका जवाब नहीं दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और विदेश मंत्री मार्को रुबियो को यह उम्मीद थी कि ईरान 8 मई तक जवाब दे देगा। लेकिन ईरान ने कहा कि वह अभी अमेरिकी प्रस्ताव को ध्यान से पढ़ रहा है और कोई भी समझौता तभी होगा, जब वह न्यायपूर्ण और पूरी तरह संतुलित होगा।
अमेरिकी प्रस्ताव की अहम शर्तें और परमाणु कार्यक्रम
अमेरिका के प्रस्ताव में कई बड़ी शर्तें रखी गई हैं। इसमें कहा गया है कि ईरान कम से कम 12 साल तक यूरेनियम संवर्धन बंद करे। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने पास मौजूद करीब 440 किलो 60% संवर्धित यूरेनियम भी दूसरे देश को सौंप दे। अमेरिका का कहना है कि अगर ईरान 90% तक संवर्धन कर लेता है तो वह परमाणु हथियार बना सकता है। इसके अलावा अमेरिका चाहता है कि ईरान 30 दिनों के भीतर होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह खोल दे। यह समुद्री रास्ता दुनिया के करीब 20% तेल और गैस सप्लाई के लिए बहुत अहम है। बदले में अमेरिका कुछ पुराने प्रतिबंध हटाने और ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियां वापस देने को तैयार है।
ईरान की देरी के कारण और आंतरिक प्रक्रिया
अल जजीरा के मुताबिक, इस प्रस्ताव के शब्द काफी टेक्निकल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी अधिकारी दस्तावेज के हर शब्द और तारीख को ध्यान से देख रहे हैं। ईरान में सत्ता के अलग-अलग केंद्र हैं। जब तक सभी की मंजूरी नहीं मिल जाती, अमेरिका को जवाब नहीं भेजा जाएगा। अंतिम फैसला सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई को करना है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि ईरान यह भी दिखाना चाहता है कि वह दबाव में आकर फैसला नहीं करेगा और बातचीत में उसकी स्थिति भी मजबूत है। दूसरी तरफ अमेरिका को ऐसी डिप्लोमैटिक वार्ताओं का अनुभव नहीं है, वह तुरंत डील करना चाहता है और इस बात की पुष्टि ट्रंप की ओर से लगातार आ रहे बयानों की वजह से भी होती है।
ईरान का 3-चरणीय दृष्टिकोण और सुरक्षा गारंटी
अलजजीरा के मुताबिक, ईरान के अधिकारी 3 फेज के अप्रोच पर काम कर रहे हैं। पहला फेज 30 दिन तक चलेगा। इस दौरान ईरान हर मोर्चे पर हमेशा के लिए युद्ध खत्म करने को लेकर बातचीत करेगा। यानी इसमें लेबनान में हिज्बुल्लाह पर हमले रोकना भी शामिल है। अमेरिका के लिए यह गारंटी देना मुश्किल है। ईरान चाहता है कि युद्ध पूरी तरह खत्म हो और भविष्य में दोबारा हमला न हो। ईरान चाहता है कि इसकी गारंटी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद दे। इसके साथ ही ईरान सभी आर्थिक प्रतिबंध हटाने, फ्रीज संपत्तियां लौटाने और अमेरिकी नाकेबंदी खत्म करने की मांग कर रहा है।
सबसे बड़ा विवाद होर्मुज स्ट्रेट और परमाणु कार्यक्रम को लेकर बना हुआ है। अमेरिका चाहता है कि ईरान इस समुद्री रास्ते पर नियंत्रण का दावा छोड़ दे, लेकिन ईरान ऐसा करने को तैयार नहीं दिख रहा। इसी वजह से बातचीत आगे बढ़ने में समय लग रहा है।
