बड़ा हमला: यमन के अदन एयरपोर्ट पर एक हफ्ते में दूसरी बार मिसाइलें गिरीं, भड़का गृहयुद्ध

यमन के अदन एयरपोर्ट पर शुक्रवार रात दो मिसाइलें गिरीं, जिससे एक हफ्ते में दूसरा बड़ा हमला हुआ है। पुलिस ने ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया है।

यमन के बंदरगाह शहर अदन के एयरपोर्ट पर शुक्रवार रात दो मिसाइलें गिरीं, जिससे पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई है। स्थानीय पुलिस ने इस खतरनाक हमले के लिए ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों को पूरी तरह जिम्मेदार ठहराया है। हैरान करने वाली बात यह है कि दस दिनों से भी कम समय में एयरपोर्ट पर हुआ यह दूसरा ऐसा हमला है, जिसने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, राहत की बात यह रही कि पुलिस अधिकारियों के अनुसार इस मिसाइल हमले में किसी के हताहत होने की कोई खबर नहीं मिली है। इस ताजा घटना के साथ ही ईरान से जुड़े इस जटिल संघर्ष में लड़ाई और अधिक तेज हो गई है, जिसमें विद्रोही पड़ोसी देश सऊदी अरब और यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार दोनों को लगातार निशाना बना रहे हैं, जिसे सऊदी अरब का मजबूत सैन्य और कूटनीतिक समर्थन हासिल है।

गौर करने वाली बात यह है कि अदन शहर में महज दो दिनों के भीतर यह दूसरा बड़ा और विनाशकारी हमला था। इससे पहले गुरुवार को हूती विद्रोहियों ने अदन में एक सरकारी परिसर यानी महल परिसर को निशाना बनाकर हमला किया था, जिसमें क्रूरता की हदें पार करते हुए कम से कम पांच लोग मारे गए थे। हमलों की इस श्रृंखला ने यमन की आंतरिक सुरक्षा को पूरी तरह से झकझोर कर रख दिया है और सरकारी मशीनरी को सकते में डाल दिया है।

हूती विद्रोहियों ने हवाई अड्डे पर दागी दो मिसाइलें

घटना के संबंध में जानकारी देते हुए विद्रोहियों के एक सैन्य अधिकारी ने, जिन्होंने अपनी पहचान गुप्त रखते हुए नाम नहीं बताया, हूती-नियंत्रित सबा समाचार एजेंसी को एक बड़ा बयान दिया। उन्होंने पुष्टि की कि उन्होंने हवाई अड्डे के पास स्थित एक प्रमुख सैन्य ठिकाने को निशाना बनाकर ये मिसाइलें दागी थीं। इस सामरिक ठिकाने पर सऊदी अरब के नेतृत्व वाली उन सेनाओं का मुख्य कमांड सेंटर स्थित है जो लगातार विद्रोहियों के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ रही हैं। इसके अलावा, इसी परिसर के भीतर हथियारों का एक बड़ा डिपो भी मौजूद है जिसे तबाह करने की साजिश रची गई थी। सुरक्षा अधिकारियों ने मीडिया को बताया कि इससे पहले सात अक्टूबर को भी हूती विद्रोहियों ने इसी हवाई अड्डे पर दो मिसाइलें दागी थीं, गनीमत यह रही थी कि उस समय भी कोई हताहत नहीं हुआ था। इस बार के हमले की गंभीरता को बयां करते हुए, यमन सरकार के सूचना मंत्री ने आधिकारिक तौर पर बताया कि ये मिसाइलें यमेनिया एयरवेज के एक विमान से महज लगभग पांच सौ मीटर की दूरी पर आकर गिरीं, जो उस समय उड़ान भरने के लिए पूरी तरह से तैयार हो रहा था और रनवे पर था।

एक सतर्क सुरक्षा अधिकारी ने घटना का आंखों देखा हाल बताते हुए बताया कि उस संकट के समय विमान में सवार सभी यात्रियों को तुरंत और सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, जिससे एक बड़ा और भयावह विमान हादसा टल गया। इस कायराना हरकत पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए यमन के परिवहन मंत्रालय ने इस हमले को महत्वपूर्ण बुनियादी सुविधाओं और सरकारी संपत्तियों को सुनियोजित तरीके से निशाना बनाने वाली हूती विद्रोहियों की एक बेहद खतरनाक कार्रवाई करार दिया है। मंत्रालय ने अपने बयान में दो टूक शब्दों में कहा कि ये विद्रोही किसी भी कीमत पर निर्दोष आम नागरिकों की जान खतरे में डालने पर पूरी तरह आमादा हैं और इन्हें मानवता की कोई परवाह नहीं है।

गृहयुद्ध को फिर से भड़काया और क्षेत्रीय तनाव

यमन के भीतर लड़ाई में आई इस अप्रत्याशित तेजी ने वहां के पहले से ही बेहद विनाशकारी गृहयुद्ध को एक बार फिर से भड़का दिया है। यह पूरा घटनाक्रम कई महीने पहले ईरान से जुड़े व्यापक क्षेत्रीय तनाव के बीच शुरू हुआ था। अपने ही नियंत्रण वाले सना हवाई अड्डे पर हुए हमलों और विद्रोहियों पर लंबे समय से लगाई गई नाकेबंदी से अत्यधिक नाराज होकर, हूती विद्रोहियों ने जवाबी कार्रवाई करते हुए पड़ोसी देश सऊदी अरब के खिलाफ अपनी खुद की एकतरफा नाकेबंदी करने की औपचारिक घोषणा कर दी थी।

तब से लेकर आज तक, इन विद्रोहियों ने सऊदी अरब के तमाम प्रमुख हवाई अड्डों, संवेदनशील तेल प्रतिष्ठानों और सामरिक सैन्य ठिकानों को लगातार अपने हमलों का निशाना बनाया है। हूती विद्रोहियों की इन हरकतों के कारण देश-विदेश की हजारों उड़ानें बुरी तरह बाधित हुई हैं और अब तक कुल उन्नीस लोगों की जान जा चुकी है। इनमें से सबसे ज्यादा मौतें देश की राजधानी रियाद के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुए भीषण हमलों के दौरान हुईं। दुनिया के सबसे बड़े तेल निर्यातक देश के रूप में पहचान रखने वाले सऊदी अरब को तब एक और बहुत बड़ा और गहरा झटका लगा, जब उनके दुनिया के सबसे प्रमुख तेल प्रतिष्ठान यानी अरामको के मुख्य मुख्यालय को भी इन आतंकियों द्वारा निशाना बनाया गया।

ईरान से खतरे का सामना कर रहा होर्मुज स्ट्रेट और लाल सागर

इस पूरे घटनाक्रम के बीच, हूती विद्रोहियों ने अपनी रणनीति बदलते हुए लाल सागर के तट की ओर आक्रामक रूप से आगे बढ़ना शुरू कर दिया और सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण बाब अल-मंदेब स्ट्रेट के कई महत्वपूर्ण हिस्सों पर अवैध कब्जा जमा लिया। यह जलमार्ग, वर्तमान में ईरान से लगातार खतरे का सामना कर रहे होर्मुज स्ट्रेट का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और वैकल्पिक समुद्री मार्ग माना जाता है, जिस पर नियंत्रण पाने के लिए युद्ध छिड़ा हुआ है।

मौजूदा गंभीर स्थिति से निपटने के लिए सऊदी अरब के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन ने इसी महीने एक बहुत बड़ा और निर्णायक सैन्य अभियान शुरू किया है। इस विशेष अभियान का मुख्य और स्पष्ट मकसद इन विद्रोहियों को इस रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जगह से पूरी तरह खदेड़ कर भगाना और उन सभी क्षेत्रों को वापस अपने नियंत्रण में लेना है। इस उठापटक और तनावपूर्ण स्थिति ने एक बार फिर से पूरी दुनिया के वैश्विक बाजारों को हिलाकर रख दिया है। वहीं दूसरी ओर, यमन के बेकसूर आम नागरिक, जैसे कि घेराबंदी का शिकार बने ऐतिहासिक शहर ताइज़ में रहने वाले तमाम लोग, इस क्रूर संघर्ष के बीच अपनी जिंदगी जीने के लिए बेहद अमानवीय और भयानक मुश्किलों का सामना करने को मजबूर हैं।