अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों का खुलेआम मजाक उड़ाने और टैरिफ को लेकर धमकी देने के बावजूद, भारत ने फ्रांस के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने का संकल्प लिया है। भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर वर्तमान में फ्रांस के दौरे पर हैं, जहां उन्होंने वैश्विक राजनीति को स्थिर करने के लिए भारत और फ्रांस के बीच सहयोग के महत्व पर जोर दिया है और यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब ट्रंप के बयानों ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर फ्रांस की स्थिति को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।
ट्रंप की मैक्रों पर टिप्पणी और टैरिफ विवाद
डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को लेकर एक बड़ा खुलासा किया था, जिसमें उन्होंने टैरिफ के मुद्दे पर मैक्रों का मजाक उड़ाया। ट्रंप के अनुसार, मैक्रों ने उनसे प्रिस्क्रिप्शन दवाओं पर लगने वाले टैरिफ के संबंध में गुहार लगाई थी कि वे जनता को इस बारे में न बताएं और ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने मैक्रों से प्रिस्क्रिप्शन दवाओं की कीमतें बढ़ाने के लिए कहा था, क्योंकि अमेरिकी उपभोक्ता फ्रांसीसी उपभोक्ताओं की तुलना में 14 गुना अधिक भुगतान कर रहे थे। मैक्रों ने शुरू में इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया था। इसके बाद, ट्रंप ने फ्रांस को अल्टीमेटम दिया कि या तो वे अमेरिका की मांगों को मानें या शैम्पेन और वाइन सहित सभी फ्रांसीसी उत्पादों पर 25 प्रतिशत का भारी टैरिफ झेलने के लिए तैयार रहें। ट्रंप ने दावा किया कि इस धमकी के बाद मैक्रों अमेरिकी मांगों। के आगे झुक गए और उन्होंने कहा, "डोनाल्ड, आपकी डील पक्की है। मैं अपनी प्रिस्क्रिप्शन दवाओं की कीमतें 200% या जो भी हो, बढ़ाना चाहता हूं। आप जो चाहें। " यह घटनाक्रम वैश्विक व्यापार और कूटनीति में तनाव को दर्शाता है।
भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी का महत्व
एक ओर जहां मैक्रों ट्रंप के निशाने पर हैं, वहीं दूसरी ओर भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर फ्रांस के दौरे पर हैं, जहां उन्होंने एक महत्वपूर्ण वैश्विक संदेश दिया है। जयशंकर ने पेरिस में अपने फ्रांसीसी समकक्ष ज्यां-नोएल बैरोट के साथ बैठक के दौरान यह टिप्पणी की कि वैश्विक राजनीति को स्थिर करने के लिए भारत और फ्रांस का साथ मिलकर काम करना महत्वपूर्ण हो गया है। यह बयान दोनों देशों के बीच गहरे रणनीतिक संबंधों और अंतरराष्ट्रीय स्थिरता के प्रति उनकी साझा प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। भारत और फ्रांस लंबे समय से रणनीतिक साझेदार रहे हैं, और फ्रांस यूरोप में भारत का पहला रणनीतिक साझेदार है और यह साझेदारी केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका व्यापक वैश्विक प्रभाव भी है।
यूरोप के साथ भारत के गहरे होते संबंध
दोनों विदेश मंत्रियों की बैठक का मुख्य उद्देश्य अगले महीने फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की भारत यात्रा के लिए आधार तैयार करना था और मैक्रों भारत में एक एआई शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए आने वाले हैं। जयशंकर ने वार्ता के महत्व को विस्तार से बताते हुए कहा कि ऐसी स्थिति में रणनीतिक भागीदारों के लिए ‘बहुत बारीकी से’ परामर्श करना स्वाभाविक है। उन्होंने मैक्रों की आगामी भारत यात्रा का भी जिक्र किया और कहा, "हम राष्ट्रपति मैक्रों के जल्द ही भारत आने की उम्मीद कर रहे हैं। " प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले साल फरवरी में पेरिस में मैक्रों के साथ एआई शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता की थी, जो प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच बढ़ते सहयोग को दर्शाता है और यह आगामी यात्रा दोनों देशों के बीच संबंधों को और मजबूत करने का एक और अवसर प्रदान करेगी, विशेष रूप से कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे महत्वपूर्ण उभरते क्षेत्रों में।
विदेश मंत्री जयशंकर ने अपने यूरोप दौरे के पीछे के कारणों को भी स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि भारत का मानना है कि यूरोप के साथ संबंध और गहरे होने वाले हैं, और यूरोप वैश्विक राजनीति में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी है। जयशंकर ने इस दौरे को एक "बहुत सोच-समझकर लिया गया फैसला" बताया, जो इस बात पर भारत के विश्वास को दर्शाता है कि यूरोप के साथ यह रिश्ता अगले स्तर पर जाने के लिए तैयार है। उन्होंने पिछले कुछ हफ्तों में भारत में यूरोप से जुड़े मामलों पर हुई चर्चाओं का भी उल्लेख किया, जिनमें मुक्त व्यापार समझौता (FTA), प्रौद्योगिकी के मुद्दे, सेमीकंडक्टर, रेलवे, रक्षा और विमानन शामिल हैं। यह दर्शाता है कि दोनों पक्षों के बीच एक बहुत ही ठोस। रिश्ता है और भविष्य में भी बहुत कुछ किया जा सकता है।
वैश्विक व्यवस्था पर व्यापक चर्चा की आवश्यकता
जयशंकर ने इस बात पर भी जोर दिया कि आज दुनिया को वैश्विक व्यवस्था के बारे में एक बड़ी चर्चा की आवश्यकता है। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय संबंध जटिल होते जा रहे हैं और विभिन्न देशों के बीच तनाव बढ़ रहा है और भारत और फ्रांस जैसे रणनीतिक साझेदारों का साथ आना और वैश्विक स्थिरता के लिए काम करना इस संदर्भ में अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है। यह साझेदारी न केवल द्विपक्षीय हितों को साधती है, बल्कि एक अधिक स्थिर और संतुलित वैश्विक व्यवस्था बनाने में भी योगदान देती है। भारत की विदेश नीति का यह पहलू वैश्विक मंच पर उसकी बढ़ती भूमिका और जिम्मेदारी को दर्शाता है, जहां वह विभिन्न चुनौतियों का सामना करने के लिए समान विचारधारा वाले देशों के साथ मिलकर काम करने को तैयार है।
भविष्य की दिशा और सहयोग के क्षेत्र
भारत और फ्रांस के बीच यह मजबूत संबंध विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग के नए रास्ते खोलता है। रक्षा और सुरक्षा से लेकर प्रौद्योगिकी, जलवायु परिवर्तन और बहुपक्षीय मंचों। पर समन्वय तक, दोनों देश एक-दूसरे के लिए महत्वपूर्ण भागीदार हैं। मैक्रों की आगामी भारत यात्रा और एआई शिखर सम्मेलन पर ध्यान केंद्रित करना यह दर्शाता है कि दोनों देश भविष्य की चुनौतियों और अवसरों को समझते हैं। यह साझेदारी न केवल आर्थिक और तकनीकी प्रगति को बढ़ावा देगी, बल्कि एक अधिक सुरक्षित और स्थिर विश्व के निर्माण में भी सहायक होगी। भारत और फ्रांस के बीच निरंतर बातचीत और परामर्श इस रिश्ते को विकसित करने का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो उन्हें बदलते वैश्विक परिदृश्य में एक साथ आगे बढ़ने में मदद करेगा।