अमेरिका ने आखिरकार भारत के वैश्विक कूटनीति और तकनीकी क्षेत्र में बढ़ते वर्चस्व को स्वीकार करते हुए उसे अपनी महत्वपूर्ण रणनीतिक पहल 'पैक्स सिलिका' में शामिल करने पर सहमति व्यक्त की है। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने इस ऐतिहासिक निर्णय की घोषणा की, जिससे दोनों। देशों के बीच संबंधों में एक नए सकारात्मक अध्याय की शुरुआत होने की उम्मीद है। यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब भारत और अमेरिका के बीच टैरिफ विवाद को लेकर संबंधों में कुछ गिरावट देखी गई थी, लेकिन अब यह कदम द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।
संबंधों में सकारात्मक बदलाव की उम्मीद
**'पैक्स सिलिका' क्या है?
भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के बयान ने भारत और अमेरिका के संबंधों में एक सकारात्मक मोड़ की उम्मीद जगाई है। गोर ने स्पष्ट रूप से कहा कि वाशिंगटन के लिए कोई भी देश भारत जितना महत्वपूर्ण नहीं है, जो भारत की बढ़ती वैश्विक स्थिति और अमेरिका के लिए उसके रणनीतिक महत्व को दर्शाता है और उन्होंने यह भी बताया कि दोनों देश व्यापार समझौते को मजबूत करने के लिए सक्रिय रूप से बातचीत कर रहे हैं, जो टैरिफ विवादों के कारण उत्पन्न हुई चुनौतियों को दूर करने का प्रयास है। गोर ने कूटनीतिक रूप से यह भी कहा कि सच्चे दोस्त असहमत हो सकते हैं, लेकिन अंत में हमेशा अपने मतभेद सुलझा लेते हैं, जो दोनों देशों के बीच मजबूत और स्थायी संबंधों की नींव को रेखांकित करता है। इस बयान से यह स्पष्ट होता है कि अमेरिका भारत को एक विश्वसनीय और अपरिहार्य भागीदार के रूप में देखता है, खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक भू-राजनीति और तकनीकी परिदृश्य तेजी से बदल रहा है।
'पैक्स सिलिका' अमेरिका के नेतृत्व में कुछ चुनिंदा देशों का एक रणनीतिक समूह है, जिसका मुख्य उद्देश्य उच्च-स्तरीय माइक्रोचिप्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) के लिए एक अभेद्य और विश्वसनीय सप्लाई चेन का निर्माण करना है। वर्तमान में, इन महत्वपूर्ण क्षेत्रों में चीन का काफी हद तक नियंत्रण है, जिससे वैश्विक तकनीकी सप्लाई चेन में एक बड़ी निर्भरता और संभावित भेद्यता बनी हुई है। 'पैक्स सिलिका' को भविष्य की तकनीक और सेमीकंडक्टर बाजार से चीन के एकाधिकार को चुनौती देने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह पहल चीन पर निर्भरता को पूरी तरह समाप्त करने की दिशा में एक बड़ा और निर्णायक कदम मानी जा रही है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के अनुसार, 'पैक्स सिलिका' का लक्ष्य दबावयुक्त निर्भरता को कम करना, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के लिए मूलभूत सामग्री और क्षमताओं की रक्षा करना, और यह सुनिश्चित करना है कि सहयोगी राष्ट्र बड़े पैमाने पर परिवर्तनकारी टेक्नोलॉजी का विकास कर सकें और उसे सफलतापूर्वक लागू कर सकें। यह पहल वैश्विक तकनीकी सुरक्षा और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए एक सामूहिक प्रयास है।
भारत को शामिल करने का कारण
अमेरिका ने पहले टैरिफ के मुद्दे पर विवाद के बाद सिलिकॉन सप्लाई चेन वाले मुल्कों की इस सूची से भारत को बाहर रखा था। हालांकि, अब अमेरिका ने वैश्विक कूटनीति और तकनीकी के क्षेत्र। में भारत के बढ़ते वर्चस्व को स्वीकार कर लिया है। भारत की तकनीकी क्षमताएं, विशाल बाजार और लोकतांत्रिक मूल्य उसे इस गठबंधन के लिए एक आदर्श भागीदार बनाते हैं। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने इस बात पर जोर दिया कि भारत की बढ़ती भूमिका। को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, और वाशिंगटन के लिए भारत का महत्व अद्वितीय है। भारत की तकनीकी प्रगति, विशेष रूप से डिजिटल इंडिया पहल और सेमीकंडक्टर विनिर्माण में उसकी महत्वाकांक्षाओं ने अमेरिका को। यह विश्वास दिलाया है कि भारत 'पैक्स सिलिका' के उद्देश्यों को प्राप्त करने में एक महत्वपूर्ण योगदानकर्ता हो सकता है। यह निर्णय भारत की बढ़ती भू-रणनीतिक प्रासंगिकता और तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में उसके प्रयासों की वैश्विक मान्यता को भी दर्शाता है।
'पैक्स सिलिका' में शामिल अन्य देश
'पैक्स सिलिका' समूह में केवल वे ही देश शामिल हैं जो लोकतांत्रिक। मूल्यों को साझा करते हैं और एडवांस्ड टेक्नोलॉजी मैन्यूफैक्चरिंग में सक्षम हैं। इस समूह में वर्तमान में अमेरिका, जापान, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, नीदरलैंड, ब्रिटेन, इज़राइल, संयुक्त अरब अमीरात और ऑस्ट्रेलिया जैसे प्रमुख देश शामिल हैं। ये सभी राष्ट्र उन्नत तकनीकी क्षमताओं और एक मजबूत लोकतांत्रिक ढांचे के साथ वैश्विक तकनीकी परिदृश्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भारत का इस समूह में शामिल होना इन देशों के साथ उसके तकनीकी और रणनीतिक सहयोग को और गहरा करेगा, जिससे एक मजबूत और विविध तकनीकी गठबंधन का निर्माण होगा जो चीन के एकाधिकार को प्रभावी ढंग से चुनौती दे सकता है। यह गठबंधन न केवल सप्लाई चेन की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा, बल्कि सदस्य देशों के बीच नवाचार और अनुसंधान को भी बढ़ावा देगा।
भारत के लिए रणनीतिक महत्व
'पैक्स सिलिका' में शामिल होना भारत के लिए अत्यधिक रणनीतिक महत्व रखता है। यह भारत को वैश्विक चिप हब के तौर पर उभरने का एक अभूतपूर्व अवसर प्रदान करेगा। इस गठबंधन का हिस्सा बनते ही भारत को अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया की दिग्गज कंपनियों से सेमीकंडक्टर 'फैब्स' (विनिर्माण इकाइयां) और डेटा सेंटर स्थापित करने के लिए भारी निवेश और महत्वपूर्ण तकनीकी हस्तांतरण (Tech Transfer) प्राप्त होगा और यह निवेश और तकनीकी सहायता भारत के 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' अभियानों को एक नई गति प्रदान करेगा, जिससे देश में उच्च-तकनीकी विनिर्माण और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। इसके अतिरिक्त, यह गठबंधन भारत की रक्षा और अंतरिक्ष के क्षेत्र में भी मजबूती प्रदान करेगा। आधुनिक मिसाइल प्रणालियों, उन्नत निगरानी उपकरणों और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के लिए सुरक्षित चिप्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अपरिहार्य हैं। 'पैक्स सिलिका' के माध्यम से सुरक्षित और विश्वसनीय घटकों तक पहुंच भारत की सैन्य सुरक्षा को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी, जिससे देश की रणनीतिक स्वायत्तता और रक्षा क्षमताएं मजबूत होंगी और यह भारत को वैश्विक तकनीकी नेतृत्व की दौड़ में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित करेगा।