बिहार के मंत्री लखेंद्र पासवान ने उठाये सवाल, कहा कबूतर भी नहीं खाता चावल

बिहार में मंत्री लखेंद्र पासवान ने सार्वजनिक रूप से अपनी ही सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने जन वितरण प्रणाली के चावल की गुणवत्ता पर नाराजगी जताते हुए कहा कि कबूतर भी ऐसा चावल नहीं खाता है।

बिहार की राजनीति से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां राज्य सरकार के एक मंत्री ने ही अपनी ही सरकार की व्यवस्थाओं और नीतियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बिहार में जन वितरण प्रणाली यानी पीडीएस के माध्यम से गरीबों को मिलने वाले राशन और उसकी गुणवत्ता को लेकर खुद सरकार के भीतर से आवाज उठाई गई है। सवाल उठाने वाले मंत्री का नाम लखेंद्र पासवान है और इस पूरी घटना से जुड़ा एक वीडियो भी सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर तेजी से सामने आया है, जिसके बाद से राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है।

चावल की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल

मंत्री लखेंद्र पासवान ने जन वितरण प्रणाली के तहत बांटे जाने वाले चावल की खराब गुणवत्ता पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है। उनका एक बयान सामने आया है जिसमें उन्होंने बहुत ही तीखे शब्दों में कहा है कि चावल की गुणवत्ता इतनी ज्यादा खराब है कि उसे कबूतर भी नहीं खा सकता है। मंत्री ने सवालिया लहजे में यह भी कहा कि जब कबूतर जैसे पक्षी इस तरह के चावल को नहीं खाते हैं, तो आम आदमी इसे कैसे खाएगा और उसका सेवन कैसे करेगा? इस तरह का बयान सीधे तौर पर सरकार की वितरण प्रणाली और खाद्यान्न की खरीद व आपूर्ति करने वाले महकमे की कार्यशैली पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है।

मौके पर मौजूद थे कई बड़े मंत्री और अधिकारी

इस पूरे मामले की सबसे खास और ध्यान खींचने वाली बात यह रही कि जिस समय मंत्री लखेंद्र पासवान ने चावल की गुणवत्ता पर खुलकर सवाल उठाए, उस वक्त वहां कई अन्य प्रमुख लोग भी मौजूद थे। इस कार्यक्रम या बैठक के दौरान खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के मंत्री अशोक चौधरी, पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश और विभाग के कई वरीय (वरिष्ठ) अधिकारी भी वहां पर उपस्थित थे। इतने बड़े मंत्रियों और अधिकारियों की मौजूदगी के बीच इस तरह के तीखे सवाल उठाना यह दर्शाता है कि जमीनी स्तर पर खाद्यान्न वितरण में कितनी गंभीर खामियां मौजूद हैं, जिन्हें अब खुद सत्ता पक्ष के नेता भी नजरअंदाज नहीं कर पा रहे हैं।

सामने आया वीडियो

मंत्री लखेंद्र पासवान द्वारा दिए गए इस बयान और चावल की गुणवत्ता पर उठाए गए सवालों से जुड़ा एक वीडियो भी अब सामने आ चुका है। इस वीडियो के सार्वजनिक होने के बाद से विपक्ष को भी सरकार को घेरने का एक और मौका मिल गया है, वहीं प्रशासनिक हलकों में भी इस बात की चर्चा जोरों पर है कि आखिर गरीबों तक पहुंचने वाले राशन की क्वालिटी में इतनी बड़ी लापरवाही कैसे बरती जा रही है। बहरहाल, मंत्री के इस बयान के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार के भीतर इस पर क्या रुख अपनाया जाता है और क्या खाद्यान्न की गुणवत्ता सुधारने के लिए कोई ठोस कदम उठाया जाता है या नहीं।