सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग का हलफनामा, SIR पर सभी फैसले सर्वसम्मति से

चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में हलفनामा दाखिल कर कहा है कि SIR से जुड़े सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए और फॉर्म 6 में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

भारतीय निर्वाचन आयोग यानी ईसीआई ने सुप्रीम कोर्ट में एक विस्तृत जवाबी हलफनामा दाखिल किया है। यह हलफनामा मुख्य चुनाव आयुक्त के कामकाज के खिलाफ दायर की गई याचिकाओं और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर उठे सवालों के जवाब में दिया गया है। आयोग की ओर से साफ किया गया है कि एसआईआर से जुड़े सभी फैसले पूरी तरह से सर्वसम्मति से लिए गए थे। दस्तावेज के अनुसार, यह जवाबी हलफनामा राकेश कुमार सिंह उर्फ राकेश सिंह बनाम भारत संघ मामले में प्रतिवादी संख्या 2 से 5 की ओर से 26 अक्टूबर 2026 को दाखिल किया गया है।

संवैधानिक अधिकारों और कानूनी आधार का हवाला

सुप्रीम कोर्ट में रखे गए पक्ष में चुनाव आयोग ने संविधान के अनुच्छेद 324 और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 21 के तहत मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण का अधिकार बताया है। आयोग का कहना है कि मतदाता सूची की शुद्धता बनाए रखना स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के लिए अत्यंत आवश्यक है। इसके लिए पात्र मतदाताओं को सूची में शामिल करने और दोहरी प्रविष्टियों जैसी विसंगतियों की जांच करने पर विशेष जोर दिया गया है। हलफनामे के साथ आयोग ने एसआईआर से संबंधित अपने आदेशों, मतदाता पंजीकरण नियमों, फॉर्म 6, घोषणा पत्र और पूर्व में दिए गए न्यायिक आदेशों की प्रतियां भी संलग्न की हैं।

नोटिस और पात्रता से जुड़े महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश

आयोग के दिशा-निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि जिन मतदाताओं का पिछली गहन पुनरीक्षण वाली सूची से मिलान नहीं हो पाता या जिनके विवरण में विसंगति पाई जाती है, उन्हें ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद नोटिस देकर अपनी पात्रता स्पष्ट करने का पूरा अवसर दिया जाना चाहिए। साथ ही, गणना चरण के दौरान मतदाताओं से दस्तावेज एकत्र नहीं करने और नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए फॉर्म 6 उपलब्ध कराने के स्पष्ट निर्देश शामिल हैं। दस्तावेज में यह भी बताया गया है कि एसआईआर के दौरान संबंधित अधिकारियों को पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराए जाएं और निर्वाचन सूची तैयार करने से जुड़े अधिकारियों का तबादला आयोग की पूर्व अनुमति के बिना बिल्कुल न किया जाए। आयोग ने यह भी माना है कि यह याचिका पूरी तरह से केवल एक समाचार रिपोर्ट पर आधारित है।

चुनाव आयोग के हलफनामे के प्रमुख और मुख्य बिंदु

  • फाइलें एक चुनाव आयुक्त के पास जाती हैं, फिर दूसरे चुनाव आयुक्त के पास, और अंत में मुख्य चुनाव आयुक्त के पास पहुंचती हैं।
  • 28 जुलाई का कार्य आवंटन आदेश प्रतिनियुक्ति पर आए एक अतिरिक्त सचिव द्वारा जारी किया गया था। अगले ही दिन दोनों चुनाव आयुक्तों ने कैबिनेट सचिव को पत्र लिखा।
  • फॉर्म 6 में किसी भी प्रकार का संशोधन नहीं किया गया है। इसमें केवल केंद्र सरकार ही कानूनी रूप से संशोधन कर सकती है।
  • आयोग ने माना है कि ऑनलाइन डिस्प्ले को देखकर ऐसा लग सकता है कि कोई संशोधन किया गया है।
  • जिन मतदाताओं का नाम सूची में नहीं है यानी अनमैप्ड वोटर्स, उन्हें सुनवाई के लिए कहीं भी आने की जरूरत नहीं है। बूथ लेवल ऑफिसर यानी बीएलओ खुद उनके घर जाकर दस्तावेज ले लेंगे और
  • ईसीआईनेट प्रणाली के तहत निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी के आदेश के बिना कोई भी नाम न तो जोड़ा जा सकता है और न ही हटाया जा सकता है।
  • पश्चिम बंगाल के संबंध में स्पष्ट किया गया है कि मतदाताओं को शामिल करने के खिलाफ अपीलें, सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के तहत मुख्य निर्वाचन अधिकारी पश्चिम बंगाल के अधिकारियों द्वारा दायर की गई थीं।
  • मुख्य चुनाव आयुक्त को काम करने से रोकने की मांग वाली याचिका पूरी तरह से कानूनन सुनवाई योग्य नहीं है।
  • दशहरा की छुट्टियों के कारण इस बार संक्षिप्त जवाब दाखिल किया गया है।