बृजभूषण शरण सिंह यौन शोषण मामला: दिल्ली कोर्ट 3 अगस्त को सुनाएगी फैसला

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने पूर्व डब्लूएफआई प्रमुख बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ यौन उत्पीड़न मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अदालत 3 अगस्त को तय करेगी कि सिंह दोषी हैं या उन्हें बरी किया जाएगा।

भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व प्रमुख और भारतीय जनता पार्टी के नेता बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ चल रहे यौन शोषण के मामले में कानूनी प्रक्रिया अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच गई है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में इस मामले की सुनवाई पूरी हो चुकी है, जिसके बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। यह मामला देश की महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों से जुड़ा है, जिसने खेल जगत और राजनीति में काफी हलचल पैदा की थी।

3 अगस्त को आएगा अदालत का फैसला

राउज एवेन्यू कोर्ट के एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट अश्विनी पंवार ने मामले की सुनवाई के बाद आदेश दिया कि बृजभूषण शरण सिंह को दोषी ठहराने या बरी करने पर फैसला 3 अगस्त 2024 को सुनाया जाएगा। अदालत ने सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलों को विस्तार से सुना और अब उन्हें 2 हफ्ते के भीतर अपनी लिखित दलीलें जमा करने का निर्देश दिया है। इस मामले में महिला पहलवानों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रेबेका जॉन, बृजभूषण की ओर से अधिवक्ता राजीव मोहन और दिल्ली सरकार की ओर से सरकारी वकील ने अपनी-अपनी दलीलें पेश कीं।

6 महिला पहलवानों के आरोप और पुलिस की कार्रवाई

यह पूरा मामला 6 महिला पहलवानों द्वारा बृजभूषण शरण सिंह पर लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों पर आधारित है। पहलवानों की शिकायतों के आधार पर दिल्ली पुलिस ने गहन जांच की और सिंह के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की थी। 15 जून 2023 को दिल्ली पुलिस ने अदालत में चार्जशीट दाखिल की थी। इस चार्जशीट में बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 354 (महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाना), 354A (यौन प्रकृति की टिप्पणी), 354D (पीछा करना) और 506(1) (आपराधिक धमकी) के तहत आरोप लगाए गए थे।

ट्रायल कोर्ट द्वारा आरोप तय करने की प्रक्रिया

मामले में एक महत्वपूर्ण मोड़ 10 मई 2024 को आया, जब ट्रायल कोर्ट ने बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ औपचारिक रूप से आरोप तय किए। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि रिकॉर्ड पर मौजूद सबूत 5 महिला पहलवानों को परेशान करने के लिए आईपीसी की धारा 354 और 354A के तहत मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त हैं। इसके अलावा, अदालत ने यह भी पाया कि 2 पहलवानों के मामले में धारा 506(1) यानी आपराधिक धमकी के तहत आरोप तय करने के लिए भी पर्याप्त आधार मौजूद हैं। इन आरोपों के तय होने के बाद ही मामले की अंतिम सुनवाई शुरू हुई थी जो अब पूरी हो चुकी है।

सह-आरोपी और नाबालिग पहलवान का प्रकरण

इस मामले में केवल बृजभूषण शरण सिंह ही नहीं, बल्कि डब्लूएफआई के तत्कालीन असिस्टेंट सेक्रेटरी विनोद तोमर भी आरोपी हैं। अदालत ने विनोद तोमर पर पीड़ितों में से एक को धमकाने के लिए आपराधिक धमकी का आरोप तय किया है। उल्लेखनीय है कि शुरुआत में एक नाबालिग पहलवान ने भी बृजभूषण सिंह के खिलाफ यौन शोषण के आरोप लगाए थे, जिसके बाद पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था। हालांकि, बाद में उस नाबालिग पहलवान ने अपनी शिकायत वापस ले ली थी। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने उस मामले में कैंसिलेशन रिपोर्ट दाखिल की थी, जिसे अदालत ने स्वीकार करते हुए नाबालिग से जुड़े मामले को बंद कर दिया था। अब सभी की निगाहें 3 अगस्त को आने वाले फैसले पर टिकी हैं।